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खेतीबाड़ी से खड़ा किया करोड़ों का कारोबार, कभी करता था प्राइवेट जॉब

आइए जानते हैं समीर ने कैसे ये मुकाम हासिल की...

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नई दिल्ली.  एक ओर जहां आए दिन किसानों की खुदकुशी की खबरें सुनने को मिलती हैं। वहीं दूसरी ओर नौकरी छोड़ खेतीबाड़ी से जुड़ने वालों की संख्या बढ़ती जा रही है। असम के रहने वाले समीर रंजन बोरडोलोई भी इनमें से एक हैं जिन्होंने अपनी नौकरी छोड़ खेतीबाड़ी को न सिर्फ अपना करियर बनाया बल्कि करोड़ों का कारोबार भी खड़ा कर दिया। आइए जानते हैं समीर ने कैसे ये मुकाम हासिल की...

 

 

समीर ने moneybhaskar.com से बातचीत में बताया किया कि एग्रीकल्चर में ग्रैजुएशन करने के बाद वो टाटा केमिकल्स के एग्रोकेमिकल डिविजन में नौकरी करने लगे। असम के जोरहट जिले में उनकी पोस्टिंग हुई। यहां उन्होंने देखा कि अधिकांश किसान टी क्रॉप पर निर्भर हैं। वो अच्छी उपज के लिए केमिकल्स और फर्टीलाइजर्स का बहुत ज्यादा उपयोग कर रहे हैं। किसानों को केमिकल्स के कॉकटेल से बचाने के लिए उनको आइडिया मिला और 2003 में उनकी फर्स्ट वेंचर एसएस बोटैनिकल्स की शुरुआत हुई। समीर एग्रीप्रेन्योर हैं और उन्होंने एक से ज्यादा बिजनेस में हाथ आजमाया है। उनकी कंपनी का टर्नओवर 3 करोड़ रुपए से ज्यादा है।

 

 

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दो बैंकों का मिला साथ, तो बढ़े आगे

 

समीर कहते हैं कि आइडिया से प्रभावित होकर दो बैंकों ने उनका साथ दिया। एसबीआई से उन्होंने 5 लाख रुपए का लोन लेकर शुरुआत की थी। इसके बाद इंडियन बैंक ने 10 लाख रुपए का लोन दिया। लोन मिलने के बाद उन्होंने एक एग्री क्लीनिक की शुरुआत की। यहां पर वो मिट्टी की जांच के साथ खेती से जुड़े से अन्य मसलों पर किसानों को सुझाव देते हैं।

 


बच्चों को देते हैं एग्रीप्रेन्योर बनने का मंत्र

इसके अलावा समीर स्कूली स्तर पर बच्चों को खेती के बारे में जानकारी देने के मकसद से फार्म स्कूल भी चलाते हैं। यहां पर बच्चों को खेतीबाड़ी की जानकारी दी जाती है। उनका कहना है कि इसका मकसद युवाओं का गांव से पलायन रोकना है। साथ ही वे खेती कर अपने पैरों पर खड़े हो सकें और अच्छी इनकम अर्जित कर सकें। उनके साथ 2000 से ज्यादा किसान जुड़े हैं।

 

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फार्म टूरिज्म पर शुरू किया है काम

 

समीर का कहना है कि खेतीबाड़ी में कमाई की अपार संभावनाएं हैं। उन्होंने हाल ही में फार्म टूरिज्म पर काम शुरू किया है। इसके जरिए वो पर्यटकों को गांव के रहन-सहन से रूबरू करवाते हैं। इसके अलावा उन्होंने एक ग्रीन कमांडो का कॉन्सेप्ट तैयार किया है जिसका मकसद युवाओं को खेती के बारे में जानकारी देना है।

 

मॉडल विलेज किया डेवलप

उन्होंने नॉथ-ईस्ट के कुछ जिलों में मॉडल विलेज की शुरुआत की है। जहां किसान सिर्फ ऑर्गेनिक खेती करते हैं और संसाधनों को बचाने पर जोर देते हैं। इसके अलावा बांस की खेती को बढ़ावा दिया है। बांस से बने सामानों की अच्छी डिमांड है। इससे किसानों की इनकम बढ़ाने में मदद मिलेगी।

 

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ऐसा है बिजनेस मॉड्यूल

 

समीर ने एक और फर्म की नींव रखी जिसका नाम फार्म2फूड फाउंडेशन है। इसके जरिए वो किसानों और युवाओं को खेती की टेक्निक्स सिखाते हैं। एमडी ऑग्रेनिक्स के अंतर्गत 250 गायें हैं। वहीं वो अपने फर्म से 650 टन वर्मी कम्पोस्ट भी तैयार करते हैं। इनको बेचकर भी पैसे मिल जाते हैं। इसके अलावा वो उन कंपनियों में स्टेक खरीदते हैं जिनका फोकस रूरल होता है।

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