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कभी कोई कर्ज देने को नहीं था तैयार, इस शख्स ने खड़ा किया 58000 Cr का बैंक

आइए जानते हैं इस शख्स की कामयाबी का सफर...

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नई दिल्ली.  कहते हैं हौसला मजबूत हो तो बड़ी से बड़ी चुनौतियों से आप आसानी से पार पा सकते हैं। यह कहावत बंधन बैंक के एमडी और सीईओ चंद्रशेखर घोष पर सटिक बैठती है। एक समय इस शख्स को कोई भी बैंक कर्ज देने को तैयार नहीं था। फिर, उन्होंने एक साहूकार से पौने दो लाख रुपए उधार लेकर एक माइक्रो फाइनेंस कंपनी की शुरुआत की और आज यह 58 हजार करोड़ रुपए का बैंक बन गया है। आइए जानते हैं इस शख्स की कामयाबी का सफर...

 

21 सरकारी बैंकों से बड़ा हुआ बंधन बैंक

पौने दो लाख रुपए के उधार से शुरू हुई माइक्रो फाइनेंस कंपनी आज देश की 21 सरकारी बैंकों से भी बड़ा बैंक बन गया है। 27 मार्च 2018 को बंधन बैंक का स्टॉक शेयर बाजार में लिस्ट हुआ। बाजार में लिस्ट होने के बाद बैंक का मार्केट कैप 58,837 करोड़ रुपए हो गया, जो देश की 22 में से 21 सरकारी बैंकों के मार्केट कैप से कहीं ज्यादा है।

 

 

आगे पढ़ें-  कौन हैं चंद्रशेखर घोष

 

बांग्लादेशी रिफ्यूजी हैं घोष

 

घोष मूल रूप से बांग्लादेश से हैं। उनके पिता की मिठाई की दुकान थी और घोष पिता के कारोबार में हाथ बंटाते थे। फाइनेंशियल कंडिशन बहुत अच्‍छी नहीं होने के बावजूद अपने पिता के प्रयास से घोष ने ढाका यूनिवर्सिटी से कॉमर्स में ग्रैजुएट किया। 1985 में घोष ने बांग्लादेश में बीआरएसी नामक संस्था के फील्ड ऑफिसर के तौर पर काम किया। इसके बाद वह भारत आकर कई एनजीओ से जुड़े रहे। यह एनजीओ गरीबों के लिए काम करते थे। इसी दौरान घोष को माइक्रो फाइनेंस सेक्टर में काम करने की जरूरत महसूस हुई। घोष ने पश्चिम बंगाल में एक एनजीओ के साथ जरूरतमंद लोगों को लोन देने का काम शुरू किया। इसके लिए उन्होंने 7.5 फीसदी प्रति माह की दर से 1.75 लाख रुपए उधार लिए क्योंकि कोई बैंक उन्हें लोन देने के लिए तैयार नहीं था।

 

आगे पढ़ें- कैसे हुई थी शुरुआत

 

इस तरह शुरू हुई थी बंधन फाइनेंशियल
 

कोलकाता में साल 2001 में चंद्रशेखर घोष ने बंधन फाइनेंशियल शुरुआत की थी। साल 2007 में फोर्ब्स पत्रिका ने पहली बार दुनिया की शीर्ष 50 माइक्रोफाइनेंस इंस्टिट्यूट में बंधन को दूसरे स्थान पर रखा था।

 

2014 में मिली थी बैंक शुरू करने की इजाजत


बंधन फाइनेंशियल सर्विसेज देश की पहली माइक्रोफाइनेंस कंपनी है, जिसे बैंकिंग का लाइसेंस मिला है। बंधन फाइनेंशियल ने जब बैंकिंग लाइसेंस के लिए आवेदन किया था, तो उसके सामने रिलायंस ग्रुप, आदित्य बिड़ला ग्रुप और बजाज ग्रुप जैसे बड़े कॉरपोरेट हाउस की चुनौती थी। बावजूद इसके बंधन इकलौती माइक्रोफाइनेंस कंपनी थी, जिसने बैंकिंग लाइसेंस का आवेदन किया था। 

 

2015 में शुरू हुआ था बंधन बैंक का कामकाज

 

23 अगस्त 2015 को देश में नया कमर्शियल बैंक बंधन बैंक का कामकाज शुरू हुआ था। बंधन बैंक एक कमर्शल बैंक है जिसका उद्देश्य उन लोगों तक पहुंच बनाना है जिन्हें अब तक मुख्य धारा के बैंकों ने तवज्जो नहीं दी है। 

31 दिसंबर 2017 तक बैंक की कुल 887 ब्रांच थी और 430 एटीएम लगे थे। इस दिन तक बैंक के 21.3 लाख ग्राहक थे। इसका डिस्ट्रीब्यूशन नेटवर्क खासकर पूर्वी और उत्तर-पूर्वी भारत में मजबूत है। पश्चिम बंगाल, असम और बिहार में इसके 56.37 फीसदी ब्रांच और 57.58 फीसदी डीएससीएस (डोर स्टेप सर्विस सेंटर्स) हैं। बैंक की पूरे देश में विस्तार की योजना है। 

 

आगे पढ़ें- निवेशक हुए खुश

बंधन बैंक के स्टॉक मंगलवार को लिस्ट हो गए। इसके आईपीओ में पैसा लगाने वाले निवेशक खुश हो गए। खासकर उन निवेशकों को जश्न मनाने का मौका मिला, जिन्होंने लिस्टिंग गेन के लिए इस इश्यू में निवेश किया था। एनएसई पर बैंक का स्टॉक 499 रुपए पर लिस्ट हुआ। बैंक ने 375 रुपए पर निवेशकों को शेयर आवंटित किए थे।

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