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देश के लिए मिसाल बना कश्मीर का यह युवक, खड़ा किया करोड़ों का बिजनेस

आइए जानते हैं मीर ने कैसे खड़ा किया करोड़ों का कारोबार...

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नई दिल्ली.  एक तरफ जहां घाटी के कुछ युवा मुख्यधारा से भटककर आतंक का दामन थाम लेते हैं। वहीं दूसरी ओर कश्मीर का मीर गौहर ने ऐसा काम किया है जो देश के लिए मिसाल बना है। मीर की सफलता केवल मीर की ही सफलता नहीं है बल्कि उन तमाम भटके हुए युवाओं के लिए प्रेरणा हैं जो आतंकग्रस्त होने के कारण अपने भविष्य को नहीं बना पाते हैं। मीर ने बंदूकों के साये के बीच अपनी मेहनत और लगन के बल पर करोड़ों का बिजनेस खड़ा किया है। आइए जानते हैं मीर ने कैसे खड़ा किया करोड़ों का कारोबार...

 

श्रीनगर के रहने वाले मीर गौहर ने moneybhaskar.com से बातचीत में बताया कि उनके पिताजी एक कारोबारी थे। उनका होम अप्लाएंस का बिजनेस था। बिजनेस बैकग्राउंड होने के बावजूद वो मीर को बिजनेस की बारीकियां सिखाने के बावजूद पढ़ाई पर ज्यादा जोर देते थे। इसलिए उन्होंने अमृतसर के खालसा कॉलेज से एग्रीकल्चर में बीएससी करने के बाद एमएससी की डिग्री हासिल की। एमएससी करने के बाद कुछ साल तक नौकरी की। फिर अपने घर श्रीनगर लौटकर अपना बिजनेस शुरू और 7 साल में उनके बिजनेस का सालान टर्नओवर 1.5 करोड़ रुपए हो गया।

 

 

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नौकरी छोड़ की शुरुआत

 

मीर ने बताया कि एग्रीकल्चर में एमएससी करने के बाद उसने एक ट्रैक्टर बनाने वाली वीएसटी टिलर्स ट्रैक्टर्स लिमिटेड में नौकरी की। नौकरी के दौरान उनको किसानों से मिलने का मौका मिला। इस दौरान उन्हें किसानों को होने वाली परेशानियों के बारे में पता चला। फिर उन्हें महसूस हुआ कि इन परेशानियों से उनके कश्मीर के किसान भी रूबरू हो रहेंगे। इसलिए उन्होंने नौकरी छोड़ दी और अपने घर लौट आए।

 

खेतीबाड़ी से जुड़ा शुरू किया कारोबार

 

घर लौटने के बाद उन्होंने अपनी जमा-पूंजी और बैंक से लोन लेकर एग्री इक्विपमेंट्स के साथ ऑर्गेनिक कीटनाशक और ऑर्गेनिक फर्टिलाइजर बेचने का बिजनेस शुरू किया। मीर बताते हैं कि उनके यहां के किसान जागरूक नहीं हैं। उनको एग्रीकल्चर सेक्टर में हो रहे डेवलपमेंट के बारे में पता नहीं है। वो सिर्फ सेबी की खेती पर निर्भर हैं। लेकिन कीटनाशक के ज्यादा उपयोग से सेब की उपज खराब हो रही है। इसके समाधान के लिए वो उनकी मदद करते हैं।

 

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सालाना 1.5 करोड़ का हो जाता है कारोबार

 

किसानों को खेती के उपकरण, कीटनाशक और फर्टिलाइजर बेचकर मीर साल में करीब डेढ़ करोड़ रुपए का कारोबार कर लेते हैं। मीर का कहना है कि वो कम से कम प्रॉफिट मार्जिन पर सामान बेचते हैं। इससे वो महीने में 25 से 30 हजार रुपए तक प्रॉफिट कमा लेते हैं।

 

बाहर से खरीदते हैं सामान

 

मीर के मुताबिक, कश्मीर में कोई इंडस्ट्रीज नहीं हैं। इसलिए वो खेती से जुड़े सारे सामान देश के अन्य हिस्से से खरीदते हैं। इनमें नेशनल और मल्टीनेशनल कंपनियों के प्रोडक्ट शामिल हैं। इसके अलावा वो किसानों को उनकी समस्याओं के सामाधान का रास्ता भी दिखाते हैं।

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