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2G फैसला: आरोपी कंपनियों के शेयर 2 दिन में 40 फीसदी तक बढ़े

2जी स्पेक्ट्रम घोटाले में फैसला आने के बाद दो दिनों में आरोपी कंपनियों के शेयरों में 40 फीसदी तक की तेजी दर्ज की गई है।

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नई दिल्ली. 2जी स्पेक्ट्रम घोटाले में फैसला आने के बाद दो दिनों में आरोपी कंपनियों के शेयरों में 40 फीसदी तक की तेजी दर्ज की गई है। गौरतलब है कि गुरुवार को स्‍पेशल सीबीआई कोर्ट ने पूर्व टेलिकॉम मिनिस्‍टर ए राजा, डीएमके सांसद कनिमोझी समेत सभी आरोपियों को बरी कर दिया है।

 

2 दिन में 40 फीसदी तक बढ़ा डीबी रियल्टी

- 2जी मामले में सीबीआई ने जो पहला केस दायर किया था, उनमें यूनिटेक के एमडी संजय चंद्रा और डीबी रियल्टी के प्रमोटर विनोद गोयनका का भी नाम शामिल था।
- गुरुवार को फैसला आने के बाद डीबी रियल्टी के शेयरों में 20 फीसदी की तेजी आई थी। वहीं शुक्रवार को भी शेयर में 20 फीसदी का उछाला आया है। इस तरह दो दिनों में कंपनी के शेयर में 40 फीसदी की बढ़ोतरी हुई है। शुक्रवार को बीएसई पर शेयर 19.91 फीसदी बढ़कर 52.40 रुपए के भाव पर पहुंच गया। गुरुवार को स्टॉक 19.89 फीसदी बढ़कर 43.70 रुपए पर बंद हुआ।

 

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यूनिटेक में रही 25 फीसदी की तेजी

- 2जी घोटाले में बरी हुए आरोपी संजय चंद्रा की कंपनी यूनिटेक लिमिटेड के शेयरों में दो दिनों में 25 फीसदी की तेजी देखने को मिली है। गुरुवार को बीएसई पर स्टॉक 19.91 फीसदी बढ़कर 8.49 के हाई पर पहुंचा था। हालांकि कारोबार के अंत में स्टॉक 11.86 फीसदी बढ़कर 7.92 रुपए पर बंद हुआ था। वहीं आज शुक्रवार के कारोबार में यूनिटेक का शेयर 4.61 फीसदी तक बढ़ा और 8.29 रुपए पर पहुंच गया।

 

क्या है 2जी स्पेक्ट्रम घोटाला?
- 2010 में आई कैग की रिपोर्ट में 2008 में आवंटित किए गए 2जी स्पेक्ट्रम पर सवाल उठाए गए। इसमें बताया गया था कि स्पेक्ट्रम की नीलामी के बजाए 'पहले आओ, पहले पाओ' के आधार पर इसे बांटा गया था। इससे सरकार को 1 लाख 76 हजार करोड़ रुपए का नुकसान (रेवेन्‍यू लॉस) हुआ था। कैग का कहना था कि नीलामी के जरिए यदि यह स्‍पेक्‍ट्रम आवंटित किए जाते तो यह रकम सरकारी खजाने में जाती। 
- इस आवंटत के तहत 2जी स्पेक्ट्रम के लिए 122 लाइसेंस दिए गए थे। सुप्रीम कोर्ट ने 9 टेलिकॉम कंपनियों को दिए गए सभी 122 लाइसेंस 2 फरवरी, 2012 को रद्द कर दिया।

दिसंबर 2010 में सुप्रीम कोर्ट ने 2जी स्पेक्ट्रम घोटाले में स्पेशल कोर्ट बनाने पर विचार करने को कहा था। 
- 2011 में पहली बार स्पेक्ट्रम घोटाला सामने आने के बाद अदालत ने इसमें 17 आरोपियों को शुरुआती दोषी मानकर 6 महीने की सजा सुनाई थी। इस घोटाले से जुड़े केस में एस्सार ग्रुप के प्रमोटर रविकांत रुइया, अंशुमान रुइया, लूप टेलीकॉम की प्रमोटर किरण खेतान, उनके पति आईपी खेतान और एस्सार ग्रुप के डायरेक्टर विकास सराफ भी आरोपी हैं।

 

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