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अगले हफ्ते भी शेयर मार्केट में कमजोरी की आशंका, ये 4 फैक्टर्स रहेंगे हावी

नई दिल्ली.  बजट के बाद से ही शेयर मार्केट गिरावट से उबर नहीं पाया है। गुरूवार को छोड़ बाकी सभी ट्रेडिंग सेशन में गिरावट देखने को मिली और सेंसेक्स 1900 अंक तक टूट गया। एलटीसीजी और अमेरिका सहित दुनिया के बड़े बाजारों में गिरावट से मार्केट कमजोर हुआ। एक्सपर्ट्स का कहना है कि अगले हफ्ते भी मार्केट में गिरावट की आशंका है। अगर निफ्टी 10650 से ऊपर नहीं जाता तो मार्केट में कमजेारी बनी रहेगी। वहीं, अगर 10276 का लेवल टूटता है तो यह 10 हजार के लेवल पर आ सकता है। 

 

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इन वजहों से टूटा मार्केट 
1 फरवरी को बजट में LTCG टैक्स लगाए जाने के बाद से सेंसेक्स में 1900 अंक यानी 5.58 फीसदी की गिरावट हुई है। LTCG टैक्स लगाए जाने से बाजार में ऊपरी स्तरों से मुनाफावसूली हावी हुई है। इसके अलावा ग्लोबल मार्केट में बिकवाली का मार्केट पर दबाव है। असल में बॉन्ड यील्ड में तेजी की वजह से निवेशक इक्विटी मार्केट से पैसे निकालकर बॉन्ड में लगा रहे हैं। जिससे यूएस सहित कई बड़े बाजार में सेलिंग प्रेशर है। 

 

 

 

मार्केट में अभी रहेगी कमजोरी
 

- SMC इंस्टीट्यूशनल इक्विटी के टेक्निकल एनालिस्ट सचिन सर्वदे के मुताबिक, मार्केट में फिलहाल सुधार की संभावना नहीं दिख रही है। जब तक निफ्टी 10,650 के ऊपर बंद नहीं होता है। तब तक मार्केट में कमजोरी बनी रहेगी। इस पुट कॉल रेश्यो ओपन इंटरेस्ट 1 से नीचे है। इसका मतलब बाजार में अभी कमजोरी रह सकती है। फिलहाल निफ्टी में 10,300 का सपोर्ट है। यह लेवल ब्रेक होने पर निफ्टी 10,000 के लेवल से नीचे आ सकता है।

- वहीं, फॉर्च्यून फिस्कल के डायरेक्टर जगदीश ठक्कर का कहना है कि मार्केट में गिरावट के लॉन्ग टर्म कैपिटल गेन टैक्स जिम्मेदार है। वहीं ग्लोबल सेल ऑफ का असर मार्केट पर हुआ है। फिलहाल मार्केट में नीचे की ओर से 10,250 का सपोर्ट है जो अभी तक टूटा नहीं है। मार्केट में काफी करेक्शन हो चुका है। अगले हफ्ते से मार्केट में सुधार देखने को मिल सकता है। निफ्टी में ऊपर की ओर 10,750 के लेवल का रेजिस्टेंस दिख रहा है।

 

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ये फैक्टर्स रहेंगे हावी


अर्निंग

क्रिस रिसर्च के फाउंडर अरुण केजरीवाल के मुताबिक, अगले हफ्ते भी घरेलू स्तर पर ब्रिटानिया, सांघी इंडस्ट्रीज जैसी कंपनियों के तीसरी तिमाही के नतीजे जारी होंगे। बड़ी कंपनियों के आ चुके हैं। वहीं मिडकैप और स्मॉलकैप कंपनियों के नतीजे जारी होने हैं।

 

ग्लोबल मार्केट का असर

वहीं बाजार पर ग्लोबल मार्केट का असर दिखेगा। फेड रेट बढ़ोतरी की आशंका से अमेरिकी मार्केट के बाजार में क्या होता है औऱ जो होगा उसका असर भारतीय बाजार पर होगा। 

 

CPI डाटा

इस हफ्ते निवेशकों की नजर सीपीआई आंकड़ों पर भी रहेगी। इस दौरान जनवरी 2018 सीपीआई आंकड़े जारी किए जाएंगे। इसका असर भी मार्केट पर दिखेगा। 

 

FII पर रहेगी नजर

फरवरी में गुरुवार तक एफआईआई ने भारतीय बाजार में 4,859.48 करोड़ रुपए के शेयर बेचे। जनवरी में इन निवेशकों ने 22 हजार करोड़ रुपए के शेयर खरीदे थे। जगदीश ठक्कर का कहना है कि जगदीश ठक्कर का कहना है कि अमेरिका में बॉन्ड यील्ड बढ़ने की वजह से फॉरेन इन्वेस्टर्स बेहतर रिटर्न के लिए भारतीय बाजार से पैसे निकालकर बॉन्ड में लगा रहे हैं। इस महीने 6 ट्रेडिंग सेशन में से 5 में एफआईआर्इ बिकवाल रहे। हालांकि इस दौरन DII ने 4,830.88 करोड़ रुपए खरीददारी की है।


 

ग्लोबल सेल ऑफ की ये है वजह

- एक्सपर्ट्स का कहना है कि अमेरिका में बॉन्ड यील्ड 4 साल के हाई 2.88% पर पहुंच गई है। बॉन्ड यील्ड बढ़ने से निवेशक इक्विटी मार्केट से पैसे निकालकर बॉन्ड में लगा रहे हैं। इस वजह से गुरूवार को डाओ जोंस 1033 अंक टूट गया। यह अमेरिकी शेयर बाजार के इतिहास में दूसरी सबसे बड़ी गिरावट है। इससे पहले सोमवार को भी बाजार में डाओ जोंस 1,175 अंक टूट गया था।
- अमेरिकी बाजार में गिरावट का असर दुनियाभर के बाजारों पर पड़ा है। ग्लोबल सेल ऑफ के लिए दुनियाभर की इकोनॉमी में महंगाई का बढ़ना और ब्याज दरों में बढ़ोतरी को माना जा रहा है। सेंट्रल बैंक महंगाई पर काबू पाने के लिए ब्याज दरों में बढ़ोतरी करते हैं। ब्याज दरें अधिक होने का असर कर्ज पर पड़ेगा, मतलब कंपनियों और लोगों के लिए कर्ज लेना महंगा हो जाएगा।

 

 

निवेशकों के डूबे 5.6 लाख करोड़

- बजट के बाद से 6 दिनों के कारोबार में निवेशकों के 5,66,981.38 करोड़ रुपए डूब गए। एक फरवरी को बीएसई पर लिस्टेड कुल कंपनियों का मार्केट कैप 1,53,13,033.38 करोड़ रुपए था। जो 9 फरवरी को 1,47,46,052 करोड़ रुपए हो गया।

 

8 फीसदी तक टूटे हैवीवेट स्टॉक्स

बाजार में गिरावट से 6 दिनों में हैवीवेट स्टॉक्स 8 फीसदी तक टूट गए। सबसे ज्यादा गिरावट आईओसी में 7.34 फीसदी की हुई। इसके अलावा एचडीएफसी में 6.87%, यस बैंक में 6.73%, इंडसइंड बैंक में 6.33%, एलएंडटी में 6.09% और टीसीएस में 5.77% की गिरावट रही।

 

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