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LTCG-यूएस मार्केट में कमजोरी से गिरावट बढ़ने का डर, 10500 के स्तर तक टूट सकता है निफ्टी

इस हफ्ते आरबीआई पॉलिसी, ग्लोबल संकेतों और बड़ी कंपनियों के नतीजों से बाजार की दिशा तय होगी।

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नई दिल्ली.   बजट में लॉन्ग टर्म कैपिटल गेन टैक्स (एलटीसीजी) के एलान से स्टॉक मार्केट में ढाई साल की सबसे बड़ी गिरावट देखने को मिली है। एक्सपर्ट्स का कहना है कि मार्केट में एलटीसीजी टैक्स का असर आगे भी देखने को मिल सकता है। वहीं ग्लोबल मार्केट में कमजोरी के साथ कुछ और फैक्टर्स हैं जिसकी वजह से इस हफ्ते मार्केट में करेक्शन की आशंका है। ऐसे में निवेशकों के मन में भी मार्केट को लेकर कनफ्यूजन बना हुआ है। हम एक्सपर्ट्स के हवाले से बता रहे हैं कि इस हफ्ते शेयर बाजार की चाल कैसी रहेगी और निवेशकों को क्या स्ट्रैटजी अपनानी चाहिए......

 

 

 

10,500 तक फिसल सकता है निफ्टी
- सिमी भौमिक डॉट कॉम की टेक्निकल एनालिस्ट सिमी भौमिक का कहना है कि एलटीसीजी का असर इस हफ्ते भी बाजार में दिख सकता है। मार्केट में गिरावट का डर है। निफ्टी मौजूदा लेवल ने 200 अंक से ज्यादा टूट सकता है। हालांकि नीचे की ओर से निफ्टी को 10500 के लेवल पर सपोर्ट मिलता दिख रहा है। 
- वहीं फॉर्च्यून फिस्कल के डायरेक्टर जगदीश ठक्कर का कहना है कि अमेरिकी बाजारों में कमजोरी, एलटीसीजी, एमएसपी लागत से 1.5 गुना करने की घोषणा से महंगाई बढ़ने की आशंका जैसे फैक्टर्स इस हफते बाजार में हावी रहेंगे। बाजार में गिरावट बढ़ने पर इस हफ्ते निफ्टी 10,500 के स्तर पर जा सकता है। यह लेवल ब्रेक हुआ तो निफ्टी 10,200 के लेवल पर भी जा सकता है। 

 

 

 

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इस हफ्ते ये फैक्टर्स रहेंगे मार्केट पर हावी

 

RBI पॉलिसी बैठक

इस हफ्ते 6 और 7 फरवरी को आरबीआई की मॉनिटरी पॉलिसी की बैठक होगी। दिसबंर 2017 में रिटेल महंगाई की दर 5.21 फीसदी के रिकॉर्ड लेवल पर पहुंच गई। यह फिगर 16 महीने में सबसे ज्‍यादा है। नवंबर में रिटेल महंगाई 4.88 फीसदी पर थी। ऐसे में आरबीआई की बैठक में दर बढ़ाने पर भी विचार हो सकता है। आरबीआई ने रिटेल महंगाई दर के 4 फीसदी रहने का लक्ष्य निर्धारित किया था।

 

LTCGT इफेक्ट

बजट में स्टॉक्स से होने वाली कमाई पर लॉन्ग्‍ा टर्म कैपिटल गेन टैक्स (LTCGT) का एलान का असर शुक्रवार को बाजार में दिख चुका है। मार्केट एक्सपर्ट्स के मुताबिक, इसका असर इस हफ्ते भी मार्केट में जारी रहने की संभावना है। वहीं सरकार ने साफ किया है एलटीसीजीटी घरेलू के साथ फॉरेन इन्वेस्टर्स पर भी लागू होगा। इससे सेंटीमेंट्स और बिगड़ सकता है। हालांकि एक्सपर्ट्स मान रहे हैं 31 जनवरी तक की इनकम को इससे बाहर रखकर सरकार ने बैलेंस करने की भी कोशिश की है। इसका असर जल्द कम हो जाएगा। 

 

 

अर्निंग
एसबीआई, टाटा स्टील, ओएनजीसी, बैंक ऑफ बड़ौदा, भेल और महिंद्रा एंड महिंद्रा जैसी कई बड़ी कंपनियों के तीसरी तिमाही के नतीजे इस हफ्ते जारी होने वाले हैं। टाटा मोटर्स और बोश के नतीजे सोमवार को जारी होंगे। वहीं हीरो मोटोकॉर्प, और लूपिन के नतीजे मंगलवार को जारी होंगे।

 

PMI आंकड़े
इस हफ्ते निवेशकों की नजर पीएमआई आंकड़ों पर भी रहेगी। इस दौरान जनवरी 2018 के मैन्युफैक्चरिंग प्रोडक्शन आंकड़े जारी किए जाएंगे। इसका असर भी मार्केट पर दिखेगा। दिसंबर माह में बिजनेस एक्टिविटी इंडेक्‍स में नवंबर की तुलना में सुधार हुआ है और यह नवंबर के 48.5 से बढ़ कर 50.9 हो गया है।

 

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ऐसे बनाएं निवेश की स्ट्रैटजी

- एक्सपर्ट्स का कहना है कि नए निवेशकों को अभी मार्केट के संभलने का इंतजार करना चाहिए। मार्केट में और गिरावट हो सकती और इसके थमने के बाद इसमें निवेश करना चाहिए। जो निवेशक मार्केट में आना चाहते हैं, उन्हें स्टॉक स्पेसिफिक रहना चाहिए। बजट रिलेटेड बेहतर फंडामेंटल वाले शेयरों में खरीददारी की जा सकती है। 
- ऐसे समय में नए निवेशकों को एक साथ रकम लगाने की जगह 15 से 20 फीसदी रकम निवेश करने की सलाह है। मार्केट स्टेबल होने पर बाकी रकम निवेश कर सकते हैं। पुराने निवेशक महंगे हो चुके मिडकैप या स्मालकैप से बाहर निकल सकते हैं। 
-बॉटम पर मौजूद फार्मा शेयरों में निवेश बेहतर विकल्प है, फार्मा सेक्टर पहले से ही सस्ते वैल्युएशन पर हैं। ऐसे में गिरावट पर उनमें अच्छा मौका बना है। 
- एक्सपर्ट्स का कहना है कि बजट में सरकार का फोकस रूरल पर ज्यादा रहा है। इसलिए निवेशकों को रूरल बेस्ड शेयरों में खरीददारी करनी चाहिए। इनमें खासकर एफएमसीजी, ऑटो और कैपिटल गुड्स सेक्टर में कमाई के मौके बनेंगे।

 

अमेरिकी बाजारों में भारी गिरावट

1 फरवरी को फेडरल रिजर्व ने ब्याज दरों में बढ़ोतरी नहीं की थी। लेकिन अमेरिका में बॉन्ड यील्ड बढ़ने के डर से शुक्रवार को अमेरिकी बाजारों में भारी गिरावट देखने को मिली है। अमेरिका में 10 साल के बॉन्ड यील्ड 2.85 फीसदी पर पहुंच गई है। बॉन्ड यील्ड बढ़ना ब्याज दरों में बढ़ोतरी का संकेत होता है। जिससे डाओ जोन्स 666 अंक गिर गया। इसका असर एशियाई बाजारों पर हो सकता है।

 

 

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