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बिकने के कगार पर पहुंच गईं ये 5 कंपनियां, कभी थी मार्केट में धाक

भारत में कभी इन कंपनियों की मार्केट में धाक थी। हजारों करोड़ में टर्नओवर हुआ करता था।

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नई दिल्ली. भारत में कभी इन कंपनियों की मार्केट में धाक थी। हजारों करोड़ में टर्नओवर हुआ करता था। इनमें हजारों लोग नौकरी किया करते थे। इनमें शामिल कुछ लिस्टेड कंपनियों में इन्वेस्टर्स भी बढ़-चढ़कर पैसा लगाया करते थे, लेकिन अचानक हालात पूरी तरह बदल गए। कुछ दूसरी कंपनियों के हाथों बिकने को मजबूर हो गईं तो कुछ बिकने के कगार पर पहुंच गईं। मनीभास्कर यहां ऐसी ही 5 कंपनियों के बारे में बता रहा है।

   

#भूषण स्टील

भूषण स्टील की कभी अपने सेक्टर में धाक हुआ करती थी। अब भारी कर्ज के कारण हाल में इसके टाटा स्टील के हाथों बिकने का ऐलान हुआ। इसके बिकने की वजह उस पर मौजूदा 56 हजार करोड़ रुपए का कर्ज बना।

 

एक समय कंपनी के क्लाइंट्स में मारुति सुजुकी, महिंद्रा और टाटा मोटर्स जैसी कंपनियां शामिल थीं। कंपनी को बैंक हाथोंहाथ अरबों के कर्ज दे रहे थे। लेकिन हालात ऐसे बदले कि बिजनेस पटरी से उतर गया और उस पर 56 हजार करोड़ रुपए का कर्ज हो गया।

 

मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, कंपनी के प्रमोटर्स ने अपनी मुसीबतों के लिए ग्लोबल मंदी, खराब रेग्युलेशन और अपनी किस्मत को जिम्मेदार ठहराया। भूषण स्टील के एक प्रमोटर पर कर्ज के लिए एक बैंकर को घूस देने के भी आरोप लगे।

 

1987 में अस्तित्‍व में आई कंपनी 


साल 1 9 87 में भूषण स्टील अस्तित्‍व में आई । इस कंपनी की स्‍थापना बृज भूषण सिंघल ने की। ये देश के टॉप स्टील उत्पादक कंपनियों में से एक रही। इस कंपनी की महाराष्ट्र, उत्तर प्रदेश और ओडिशा में प्‍लांट हैं। भूषण स्‍टील ने 2009 में ऑस्ट्रेलियाई एक्सप्लोरेशन फर्म को खरीदा।  इस कंपनी का  दिल्ली में हेड क्‍वार्टर है। वहीं कंपनी के प्रमोटर बृज भूषण सिंघल को 2014 में फोर्ब्‍स ने भारत के टॉप 15 अमीरों की सूची में भी रखा। 

 

 

 

#सत्यम कंप्यूटर

बी रामालिंगा राजू ने अपने साले डीवीएस राजू के साथ मिलकर 1987 में सत्यम कंप्यूटर सर्विस लिमिटेड की स्थापना थी। सत्यम दक्षिण भारतीय राज्य आंध्र प्रदेश की राजधानी हैदराबाद में स्थापित होने वाली पहली कंपनी थी। स्थापना के कुछ समय बाद ही सत्यम सॉफ्टवेयर क्षेत्र की देश की चार बड़ी आईटी कंपनियों में से एक बन गई। इसने 60 हजार लोगों को रोजगार दिया। लेकिन, फिर इसके गिरने का सिलसिला शुरू हो गया।

 

कंपनी के चेयरमैन बी. रामालिंगा राजू ने जनवरी 2009 में खुद कबूल किया था कि उन्होंने कंपनी के अकाउंट्स में मुनाफा बढ़ा-चढ़ाकर दिखाया और देनदारियों को छुपाया। घोटाला सामने आने से पहले कंपनी में 53 हजार लोग काम करते थे। फॉर्च्यून-500 की श्रेणी में आने वाली 185 कंपनियां सत्यम की क्लाइंट थीं। कंपनी का कारोबार 66 देशों में था। दिसंबर 2008 तक सत्यम का एक शेयर 544 रुपए का था। जैसे ही घोटाला सामने आया, जनवरी 2009 में मूल्य गिरकर 11 रुपए प्रति शेयर हो गया। आखिरकार कंपनी बिकने को मजबूर हो गई।


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#आरकॉम

कभी देश की दूसरी सबसे बड़ी टेलिकॉम कंपनी का ओहदा रखने वाली आरकॉम इस समय बुरी तरह से कर्ज के संकट से जूझ रही है। इस पर कंपनी पर करीब 45,000 करोड़ रुपए का कर्ज है। जियो की मार्केट में इंट्री के बाद शुरू हुए कड़े कॉम्पिटीशन के सामने कंपनी नहीं टिक पाई और इसे 2017 के आखिरी तक अपना वायरलेस बिजनेस बेचने के लिए मजबूर होना पड़ा है। अब बाकी बचा बिजनेस बेचने के लिए जूझ रही है।

 

इंडस्‍ट्री में 17 फीसदी था आरकॉम का शेयर
2002 के समय जब मोबाइल फोन एक लग्‍जरी हुआ करता था, रिलायंस इंफोटेक (अब रिलायंस कम्युनिकेशंस) ने महज 500 रुपए में लोगों को मोबाइल की सुविधा उपलब्ध करा दी। इंडस्ट्री में जब कॉम्पिटिशन बढ़ा तो सस्ती कॉल दरें, अट्रैक्टिव ऑफर्स देकर इंडस्ट्री में नए बिजनेस मॉडल की शुरुआत की। बाद में इसी मॉडल को सभी बड़ी टेलिकॉम कंपनियों ने अपनाया।

 

2010 तक आर-कॉम का मार्केट शेयर टेलिकॉम इंडस्ट्री में 17 फीसदी था और वह दूसरी बड़ी कंपनी थी। कंपनी के सब्सक्राइबर्स की संख्‍या भी अच्छी खासी थी।

 

 

#बिनानी सीमेंट

एक समय बिनानी सीमेंट देश की अग्रणी सीमेंट कंपनियों में शुमार थी। हालात ऐसे बदले कि उसकी सेल्स घटती गई और उसके बैंकों का कर्ज चुकाना मुश्किल हो गया। फिलहाल उसके ऊपर बैंकों का लगभग 7 हजार करोड़ रुपए का कर्ज है। इनसॉल्वेंसी एंड बैंकरप्सी कोड के तहत बिक्री की प्रक्रिया से गुजर रही है।

 
देश के अलावा विदेशों में भी विस्‍तार 
बिनानी सीमेंट ने भारतीय कंस्‍ट्रक्‍शन सेक्‍टर में अपनी एक खास पहचान बनाई। इसकी पैरेंट कंपनी बिनानी इंडस्‍ट्रीज है। भारत के अलावा बिनानी सीमेंट ने इंटरनेशनल मार्केट में भी विस्‍तार किया।  इंटरनेशनल मार्केट में चीन में शेडोंग बिनानी रोंगान सीमेंट कंपनी लिमिटेड (SBRCCL) और दुबई-बिनानी सीमेंट फैक्ट्री एलएलसी ने एक खास पहचान बनाई है। इस ब्रांड के सेल्‍स नेटवर्क यूएई, यूके, सूडान, साउथ अफ्रीका और नामीबिया जैसे देशों में भी हैं। 

 

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#एयरसेल

एक समय एयरसेल ने सस्ती दरों पर कॉल ऑफर करके भारत की टेलिकॉम इंडस्ट्री को हिलाकर रख दिया था, जो अब दिवालिया होने की स्थिति में आ गई है। मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक कंपनी ने हाल में नेशनल कंपनी लॉ ट्रिब्यूनल में दिवालिया होने की अर्जी दी थी। दिवालिया घोषित होने के बाद एयरसेल कंपनी के तौर पर खत्म हो जाएगी। गौरतलब है कि कंपनी अपने कर्जदारों से सितंबर से 15,500 करोड़ रुपये के कर्ज को रिस्ट्रक्चर करने की बातचीत कर रही थी, लेकिन कुछ हो नहीं पाया।

 

 

1999 में भारतीय मार्केट में एंट्री 


किसी दौर में देश की जानी - मानी टेलीकॉम ऑपरेटर एयरसेल अब दिवालिया हो चुकी है। इस कंपनी ने 1999 में सबसे पहले तमिलनाडु सर्कल में एंट्री की थी । मलयेशिया की टेलिकॉम कंपनी मैक्सिस कम्‍युनिकेशन के 2005 में 74 फीसदी स्‍टेक खरीदने के बाद एयरसेल ने विस्‍तार करना शुरू किया। करीब 5 साल तक इस कंपनी ने  यूपी, बिहार, आंध्र प्रदेश, पंजाब , गुजरात और मध्‍य प्रदेश समेत 8 राज्‍यों में अपना दबदबा बनाए रखा।  सस्‍ती कॉलिंग और टैरिफ के जरिए फ्री मैसेज की सर्विस लोगों को खूब पसंद आई। 

 

 
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