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TCS को US में बड़ी राहत, हायरिंग में अमेरिकियों से भेदभाव के आरोप खारिज

TCS: इस फैसले को भारतीय आउटसोर्सिंग इंडस्ट्री के लिए बड़ी राहत माना जा रहा है

TCS not guilty of anti American bias in staffing its US offices

 

नई दिल्ली. टाटा ग्रुप की प्रमुख कंपनी टाटा कंसल्टैंसी सर्विसेस (TCS) को अमेरिका में बड़ी राहत मिली है। कैलिफोर्निया की एक ज्यूरी ने उन दावों को खारिज कर दिया, जिनमें टीसीएस पर अपने अमेरिका स्थित कार्यालयों में तैनाती को लेकर अमेरिकी वर्कर्स के साथ लंबे समय से भेदभाव के आरोप लगाए गए थे।

 

भारत की आईटी इंडस्ट्री को बड़ी राहत

इस फैसले को भारतीय आउटसोर्सिंग इंडस्ट्री के लिए बड़ी राहत माना जा रहा है, जिनका बिजनेस मॉडल काफी हद तक अमेरिका में भारतीय इंजीनियरों को भेजकर काम कराने पर निर्भर करता है। ओकलैंड, कैलिफोर्निया की एक ज्यूरी टीसीएस के खिलाफ उसके चार पूर्व कर्मचारियों द्वारा दायर मुकदमे की सुनवाई कर रही थी। उन्होंने दावा किया कि उन्हें महज इसलिए किनारे कर दिया गया और फिर निकाल दिया गया, क्योंकि वे साउथ इंडियन नहीं हैं।

 

पहले मामले में हुआ था ट्रायल

ब्लूमबर्ग की एक रिपोर्ट के मुताबिक, अमेरिका में यह किसी भारतीय आईटी कंपनी के खिलाफ नियुक्ति में भेदभाव का ऐसा पहला मामला है, जिस पर ट्रायल हुआ था। एचसीएल टेक्नोलॉजिज, इन्फोसिस और विप्रो को भी ऐसे दावों का सामना करना पड़ा है।

 

सुर्खियों में आ गया था वर्क वीजा प्रोग्राम

इस केस के चलते वर्क-वीजा प्रोग्राम सुर्खियों में आ गया था, जिसका इस्तेमाल कंपनियां विदेशी वर्कर्स को अमेरिका ले जाने में करती रही हैं। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प भी संरक्षणवाद को बढ़ावा देने के क्रम में इसकी आलोचना कर चुके हैं। एशिया की सबसे बड़ी आउटसोर्सर टीसीएस और उसकी राइवल इन्फोसिस और विप्रो पर अमेरिका सरकार देश में ज्यादा अमेरिकियों को भर्ती के लिए दबाव बना रही है।

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