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Rcom को सुप्रीम कोर्ट से भी नहीं मिली राहत, फिलहाल Jio को नहीं बेच पाएगी एसेट

अनिल अंबानी के स्वामित्व वाली रिलायंस कम्युनिकेशंस (आरकॉम) को सुप्रीम कोर्ट से भी राहत नहीं मिली।

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नई दिल्ली. अनिल अंबानी के स्वामित्व वाली रिलायंस कम्युनिकेशंस (आरकॉम) को सुप्रीम कोर्ट से भी राहत नहीं मिली। कोर्ट ने आरकॉम को  अपनी एसेट मुकेश अंबानी की स्वामित्व वाली रिलायंस जियो इन्फोकॉम (जियो) को बेचने पर यथास्थित बरकरार रखने के निर्देश दिए हैं। कोर्ट ने कहा कि एसेट सेल मामले में अंतिम आदेश पर निर्भर करेगी, जिसका मतलब है कि यह डील सुप्रीम कोर्ट की मंजूरी के बिना पूरी नहीं होगी।

इस खबर के बाद आरकॉम के स्टॉक में 5 फीसदी तक की गिरावट दर्ज की गई। फैसले से पहले जहां स्टॉक 26 रुपए पर ट्रेड कर रहा था, जो बाद में 5 फीसदी गिरकर 24 रुपए से नीचे आ गया।

 

 

 

बॉम्बे हाईकोर्ट के स्टे ऑर्डर को हटाने से इनकार
सुप्रीम कोर्ट की जस्टिस ए के गोयल, आर एफ नरीमन और यू यू ललित की मौजूदगी वाली बेंच ने आरकॉम की एसेट सेल के मामले में बॉम्बे हाई कोर्ट के स्टे ऑर्डर को हटाने से इनकार कर दिया। सुु्प्रीम कोर्ट एचसी द्वारा एसेट सेल पर स्टे के खिलाफ मिली बैंकों के कंसोर्टियम और आरकॉम की अपील पर 5 अप्रैल को सुनवाई करेगा।  

 

आरकॉम की बढ़ीं मुश्किलें
सुप्रीम कोर्ट के इस आदेश से आरकॉम की मुश्किलें बढ़ गई हैं। दरअसल कंपनी ने अपने कर्ज को कम करने के लिए दिसंबर, 2017 में अपनी एसेट्स रिलायंस जियो को बेचने का एक प्लान पेश किया था।
आरकॉम पर मार्च, 2017 तक बैंकों का 39 हजार करोड़ रुपए का कर्ज था, जब उन्होंने अपने कर्ज के आंकड़े सार्वजनिक किए थे।

 

हाईकोर्ट ने एसेट सेल पर लगाया था स्टे

दरअसल स्वीडन की कंपनी इरिक्सन की अपील पर आर्बिट्रेशन कोर्ट ने मार्च के पहले हफ्ते आरकॉम को झटका दिया था। आर्बिट्रेशन कोर्ट ने आरकॉम और उनकी दो अन्य कंपनियों पर बिना उसकी मंजूरी के किसी भी एसेट्स के ट्रांसफर और बिक्री करने पर रोक लगा दी थी। इस फैसले के खिलाफ आरकॉम ने दिल्ली हाईकोर्ट में अपील की थी, हालांकि हाईकोर्ट से भी अनिल अंबानी को झटका लगा था। कोर्ट ने उनकी कंपनी आरकॉम की आर्बिट्रेशन कोर्ट के उस आदेश को चुनौती देने वाली याचिका खारिज कर दी है, जिससे उस पर बिना पूर्व मंजूरी के कंपनी की एसेट बेचने या ट्रांसफर पर रोक लग गई थी।  

 

एसबीआई का सपोर्ट भी नहीं आया काम
मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक देश के सबसे बड़ा सरकारी लेंडर स्टेट बैंक (एसबीआई) ने भी बुधवार को ट्रिब्यूनल के आदेश को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी थी। एसबीआई ने सिक्योर्ड लेंडर के तौर पर दलील दी थी कि दूसरों की तुलना में उसका दावा पहले बनता है। एसबीआई के अलावा 24 अन्य लेंडर्स का भी आरकॉम पर बकाया है। इनमें एलआईसी भी शामिल है। एसबीआई का आरकॉम पर 28 फरवरी तक कुल 4,027 करोड़ रुपए बकाया था।


इरिक्सन का आरकॉम पर है 1,155 करोड़ का बकाया
टेलिकॉम इक्विपमेंट बनाने वाली कंपनी इरिक्सन की भारतीय सब्सिडियरी ने आरकॉम के देश भर में स्थित नेटवर्क को ऑपरेट और प्रबंधन के लिए 7 साल का करार किया था। इसी कंपनी ने 1,155 करोड़ रुपए के बकाये को लेकर बीते साल आरकॉम के खिलाफ सितंबर, 2017 में इनसॉल्वेंसी पिटीशन फाइल की थी।

 
चाइना डेवलपमेंट बैंक से आरकॉम ने लिया है कर्ज
इससे पहले आरकॉम को सबसे ज्यादा कर्ज देने वाले विदेशी लेंडर चाइना डेवलपमेंट बैंक ने जियो डील सहित अपने कर्ज में कटौती के प्लान पेश किए जाने के बाद उसके खिलाफ अपनी इनसॉल्वेंसी की पिटीशन वापस ले ली थी।

 

 

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