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Rcom को सुप्रीम कोर्ट से भी झटका, टावर एसेट सेल को नहीं दी मंजूरी

अनिल अंबानी के स्वामित्व वाली रिलायंस कम्युनिकेशंस (आरकॉम) को सुप्रीम कोर्ट से भी झटका लगा है।

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नई दिल्ली. अनिल अंबानी के स्वामित्व वाली रिलायंस कम्युनिकेशंस (आरकॉम) को सुप्रीम कोर्ट से भी झटका लगा है। कोर्ट ने आरकॉम को रिलायंय जियो इन्फोकॉम के हाथों अपनी टावर एसेट्स बेचने की मंजूरी देने से इनकार कर दिया। साथ ही नेशनल कंपनी लॉ ट्रिब्यूनल (एनसीएलटी) द्वारा लगाए गए स्टे को हटाने से भी इनकार कर दिया।

 

 

अपीली ट्रिब्यूनल के पास भेजा मामला
सुप्रीम कोर्ट ने कंपनी की सब्सिडियरी रिलायंस इन्फ्राटेल पर अपनी एसेट्स की बिक्री पर लगाई गई रोक को हटाने से इनकार करते हुए मामले को नेशनल कंपनी लॉ अपीली ट्रिब्यूनल के पास भेज दिया और अपीली ट्रिब्यूनल को इस मामले में 4 हफ्ते के भीतर फैसला लेने के निर्देश दिए हैं।
हालांकि सुप्रीम कोर्ट ने बॉम्बे हाई कोर्ट के उस आदेश को खारिज कर दिया, जिसमें आरकॉम को स्पेक्ट्रम, फाइबर, रियल एस्टेट और स्विचिंग नोड्स की बिक्री पर रोक लगाई गई थी। इसमें विस्तृत आदेश मिलने का इंतजार है।
रिलायंस कम्युनिकेशन और उसके लेंडर स्टेट बैंक ऑफ इंडिया व बैंक ऑफ बड़ौदा ने इन दोनों स्टे ऑर्डर्स को चुनौती दी थी।

 

 

स्टे खारिज कराने की होगी कोशिशः आरकॉम
आरकॉम के लॉयर मुकुल रोहतगी ने न्यूज एजेंसी कोजेन्सिस ने कहा कि सुप्रीम कोर्ट ने एनसीएलटी के स्टे ऑर्डर के मामले को पूरी तरह प्रोसिजरल ग्राउंड्स पर अपीली ट्रिब्यूनल को रेफर कर दिया। रोहतगी ने कहा, ‘सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि एनसीएलटी के ऑर्डर के खिलाफ अपील पर सुनवाई सुप्रीम कोर्ट के बजाय अपीली ट्रिब्यूनल में होनी चाहिए। हम हाई कोर्ट का स्टे खारिज होने के फैसले को दिखाएंगे और ट्रिब्यूनल स्टे को खारिज कराने की कोशिश करेंगे।’

 


2 मामलों में क्रेडिटर्स को मिल चुका है स्टे
एचएसबीसी डेजी इन्वेस्टमेंट (मॉरिशस) ने टॉवर एसेट सेल मामले में 7 मार्च को एनसीएलटी में स्टे हासिल किया था। एचएसबीसी डेजी इन्वेस्टमेंट (मॉरिशस), रिलायंस इन्फ्राटेल में एक ऑफशोर इन्वेस्टर है।
वहीं बॉम्बे हाई कोर्ट ने 8 मार्च को आर्बिट्रेशन कोर्ट के आदेश को बरकरार रखा था, जिसमें आरकॉम और उसकी सब्सिडियरीज रिलायंस इन्फ्राटेल व रिलायंस टेलिकॉम पर एसेट बिक्री पर रोक लगा दी गई थी।

 

आरकॉम पर है इरिक्सन का 1100 करोड़ बकाया
वहीं आरकॉम को कर्ज देने वाली एक अन्य कंपनी इरिक्सन इंडिया प्राइवेट लिमिटेड भी आर्बिट्रेशन कोर्ट से स्टे हासिल करने में कामयाब रही थी। इरिक्सन ने दलील दी थी कि यदि बिक्री हो जाती है तो उसके लिए अपना 1100 करोड़ रुपए का बकाया वसूलना मुश्किल हो जाएगा।

आरकॉम पर एसबीआई के अगुआई वाले लेंडर्स के कंसोर्टियम का 45 हजार करोड़ रुपए बकाया है। बैंकों का दावा है कि वे एसेट सेल के क्रम में अपने 25 हजार करोड़ रुपए की वसूली करेंगे।

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