एक ई-मेल से डूब गए 10 हजार करोड़, अरबपति को लगा बड़ा झटका

महज एक ई-मेल से अरबपति दिलीप सांघवी (Dilip Shanghvi) को तगड़ा झटका लगा है। दरअसल एक व्हिशलब्लोअर ने सेबी को भेजे ईमेल के माध्यम से सन फार्मास्युटिकल (Sun Pharma) इंडस्ट्रीज के फाउंडर-मैनेजिंग डायरेक्टर दिलीप सांघवी पर और उनके ब्रदर-इन-लॉ सुधीर वालिया पर धर्मेश दोशी के साथ वित्तीय अनियमितता में लिप्त होने का आरोप लगाया है। इस खबर से सोमवार को सन फार्मा को शेयर लगभग 10 फीसदी तक टूट गया और उसकी मार्केट वैल्यू लगभग 10 हजार करोड़ रुपए घट गई।

moneybhaskar

Dec 03,2018 01:30:00 PM IST

मुंबई. महज एक ई-मेल से अरबपति दिलीप सांघवी (Dilip Shanghvi) को तगड़ा झटका लगा है। दरअसल एक व्हिशलब्लोअर ने सेबी को भेजे ईमेल के माध्यम से सन फार्मास्युटिकल (Sun Pharma) इंडस्ट्रीज के फाउंडर-मैनेजिंग डायरेक्टर दिलीप सांघवी पर और उनके ब्रदर-इन-लॉ सुधीर वालिया पर धर्मेश दोशी के साथ वित्तीय अनियमितता में लिप्त होने का आरोप लगाया है। इस खबर से सोमवार को सन फार्मा को शेयर लगभग 10 फीसदी तक टूट गया और उसकी मार्केट वैल्यू लगभग 10 हजार करोड़ रुपए घट गई।

150 पेज का लेटर भेजकर की शिकायत

व्हिशलब्लोअर ने मार्केट रेग्युलेटर सेबी को भेजे 150 पेज के लेटर में कई आरोप लगाए। सेबी ने 2001 में शेयर बाजार में हुए स्कैम के बाद धर्मेंद्र दोशी और केतन पारेख को मार्केट से बैन कर दिया था। दोशी, पारेख के पुराने सहयोगी हैं। हालांकि मीडिया रिपोर्ट्स में व्हिशलब्लोअर की सत्यता की पुष्टि नहीं की गई है। एक वेबसाइट मनीलाइफ ने सेबी को भेजी गई इस शिकायत को शनिवार को पब्लिश किया था।

केतन पारेख स्कैम में आया था धर्मेश दोशी का नाम

शिकायत के मुताबिक, वर्ष 2002-07 के दौरान सन फार्मा ने फॉरेन करंसी कन्वर्टिबल बॉन्ड्स (FCCB) के कई बड़े राउंड्स में भारी अनियमितताएं की थीं, जिनका प्रबंधन जेरमिन कैपिटल एलएलसी ने किया था।

केतन पारेख स्कैम पर वर्ष 2001 में सेबी द्वारा दिए गए आदेश के मुताबिक, ‘इस स्कैम में जेरमिन कैपिटल एलएलसी, जेरमिन कैपिटल पार्टनर्स और धर्मेश दोशी/केतन पारेख के बीच संबंध सामने आए हैं।’

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ऐसे हुई थी FCCBs की डील

व्हिसलब्लोअर ने आरोप लगाए, ‘इन FCCBs के लिए शुरुआती तौर पर बोमिन फाइनेंस लिमिटेड, फर्स्ट इंटरनैशनल ग्रुप, ऑर्बिट इन्वेस्टमेंट और सन ग्लोबल इन्वेस्टमेंट ने सब्सक्राइब किया था। हालंकि बाद में हुए ट्रांजैक्शंस के माध्यम से इन्हें ऑरेंज मॉरिशस इन्वेस्टमेंट लि. और हिपनॉस फंड लि. को अलॉट कर दिया गया था।’

 

व्हिसलब्लोअर ने लिखा, ‘सन फार्मा के शुरुआती एफसीसीबी से बड़ा फंड तैयार करने के बाद ग्रुप (दोशी, वालिया, सांघवी और सन फार्मा) ने एफसीसीबी कन्वर्जन या एफसीसीबी कन्वर्जन से मिले पैसे से दूसरी कंपनियों में बड़ी हिस्सेदारी खरीदना शुरू किया।’

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ब्रोकरेज कंपनियों का किया यूज

व्हिसलब्लोअर के मुताबिक, सन फार्मा ग्रुप द्वारा विदेशी दवा कंपनियों के अधिग्रहण और कई भारतीय ब्रोकरेज कंपनियों को रुख ‘पूरी तरह गलत’ था। उन्होंने कहा कि ग्रुप ने टारगेट कंपनियों की पहचान के लिए ब्रोकरेज कंपनियों के इन्फ्रास्ट्रक्चर का इस्तेमाल किया और फिर प्रत्यक्ष व अप्रत्यक्ष तरीके से शेयर की कीमत को बढ़ाना शुरू किया।

 

सन फार्मा ने क्या कहा

वहीं मार्केट रेग्युलेटर ने 27 नवंबर को सन फार्मा पर ऑस्ट्रेलिया की इन्वेस्टमेंट बैंकिंग और सिक्युरिटीज फर्म मैक्वायरी के नोट को खुद संज्ञान लिया है, जिसमें एफसीसीबी के इश्यू में अनियमितताओं के आरोप लगाए थे।

इस संबंध में सन फार्मा ने कहा, ‘सेबी ने अभी तक इस संबंध में हमसे संपर्क नहीं किया है।’

 
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