Sun Pharma के खिलाफ नई शिकायत, 12% गिरावट के साथ 6 साल के लो पर शेयर

व्हिशलब्लोअर की एक नई शिकायत से जुड़े डॉक्यूमेंट मार्केट रेग्युलेटर सेबी (SEBI) के पास पहुंचने से दवा कंपनी सन फार्मा (Sun Pharma) के शेयर को तगड़ा झटका। कंपनी का शेयर लगभग 10 फीसदी कमजोर होकर 380 रुपए पर खुला, जो सन फार्मा का 6 साल का निचला स्तर है। इसके साथ ही कुछ ही मिनटों के भीतर कंपनी की मार्केट वैल्यू लगभग 10 हजार करोड़ रुपए कम हो गई। 

moneybhaskar

Jan 18,2019 03:54:00 PM IST


नई दिल्ली. व्हिशलब्लोअर की एक नई शिकायत से जुड़े डॉक्यूमेंट मार्केट रेग्युलेटर सेबी (SEBI) के पास पहुंचने से दवा कंपनी सन फार्मा (Sun Pharma) के शेयर को तगड़ा झटका। कंपनी का शेयर लगभग 10 फीसदी कमजोर होकर 380 रुपए पर खुला, जो सन फार्मा का 6 साल का निचला स्तर है। हालांकि बाद में कुछ रिकवरी दर्ज की गई और शेयर 8.50 फीसदी कमजोर होकर 390 रुपए पर बंद हुआ। इस गिरावट से कंपनी की मार्केट वैल्यू एक समय 10 हजार करोड़ रुपए कम हो गई थी।

तीन साल में हुए 5800 करोड़ के ट्रांजैक्शन

एक फाइनेंशियल वेबसाइट की एक रिपोर्ट के मुताबिक, वर्ष 2014 और 2017 के बीच आदित्य मेडिसेल्स और सन फार्मा के प्रमोटर्स की प्राइवेट कंपनियों के बीच बड़े स्तर पर ट्रांजैक्शंस हुए थे। रिपोर्ट के मुताबिक, ‘एक व्हिशलब्लोअर द्वारा सन फार्मा के खिलाफ मार्केट रेग्युलेटर सेबी को भेजी गई नई शिकायत के मुताबिक, 2014 और 2017 के बीच महज तीन साल में आदित्य मेडिसेल्स (एएमएल) और सन फार्मा के को-प्रमोटर सुधीर वालिया के कंट्रोल वाली सुरक्षा रियल्टी के साथ 5800 करोड़ रुपए का ट्रांजैक्शन हुआ। ’

12 फीसदी टूटा स्टॉक

इस खबर के बाद बीएसई (BSE) में सन फार्मा का स्टॉक 12 फीसदी टूट गया। बीते दो ट्रेडिंग सेशंस की बात करें तो दवा कंपनी का शेयर लगभग 17 फीसदी टूट चुका है। शेयर के 375 रुपए के लो के हिसाब से कंपनी की मार्केट वैल्यू में लगभग 12 हजार करोड़ रुपए कमी देखने को मिली। बीते दो दिन में कंपनी की वैल्युएशन लगभग 18,702 करोड़ रुपए घट चुकी है।
इन खबरों के चलते ग्रुप की एक अन्य कंपनी एसपीआरसी (सन फार्मा एडवांस्ड रिसर्च कंपनी) का शेयर बीएसई पर 158 रुपए के साथ 52 हफ्ते के लो पर पहुंच गया।

पहले भी हो चुकी है एक शिकायत

पीटीआई की 13 दिसंबर, 2018 की एक रिपोर्ट के मुताबिक, व्हिशलब्लोअर ने 150 पेज के लेटर के माध्यम से भेजी एक अन्य शिकायत में कंपनी पर तमाम आरोप लगाए थे। इसके मुताबिक, वर्ष 2002-07 के दौरान सन फार्मा ने फॉरेन करंसी कन्वर्टिबल बॉन्ड्स (FCCB) के कई बड़े राउंड्स में भारी अनियमितताएं की थीं, जिनका प्रबंधन जेरमिन कैपिटल एलएलसी ने किया था।

केतन पारेख स्कैम पर वर्ष 2001 में सेबी द्वारा दिए गए आदेश के मुताबिक, ‘इस स्कैम में जेरमिन कैपिटल एलएलसी, जेरमिन कैपिटल पार्टनर्स और धर्मेश दोशी/केतन पारेख के बीच संबंध सामने आए हैं।’

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