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85 हजार की नौकरी छोड़ जमशेदपुर के संतोष ने शुरू किया डेयरी फार्म, 2 साल में कर लिया 2 करोड़ का बिजनेस

मम्मा डेयरी के जरिए वो आदिवासी लोगों को गांव में रोजगार भी उपलब्ध करा रहे हैं।

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नई दिल्ली.  चाह है तो राह मिल ही जाती है। ये साबित कर दिखाया है जमशेदपुर, झारखंड के संतोष शर्मा ने। कुछ करने की इच्छा रखने वाले शर्मा ने पूर्व राष्ट्रपति एपीजे अब्दुल कलाम से प्रभावित होकर 85 हजार रुपए की अच्छी खासी नौकरी छोड़कर नक्सल प्रभावित गांव में मम्मा डेयरी फार्म शुरू किया और मजह दो वर्षों में उनकी कंपनी का टर्नओवर 2 करोड़ रुपए के पार हो गया। मम्मा डेयरी ऑर्गेनिक मिल्क के अलावा पनीर, बटर और घी भी सप्लाई करती है।

 

नक्सल प्रभावित गांव में शुरू किया कारोबार

झारखंड के जमशेदपुर के रहने वाले शर्मा ने नक्सल प्रभावित दलमा गांव के आदिवासी गांव में जिस डेयरी बिजनेस की शुरुआत की थी, आज वह सिर्फ डेयरी न रहकर ऑर्गेनिक फूड, हेल्दी मिल्क बनाने की फैक्‍ट्री शुरू करने तक पहुंच गया है। अपने इस बिजनेस के बूते वह न सिर्फ अपनी जिंदगी बदल रहे हैं, बल्कि इसके जरिए वह आदिवासी लोगों को गांव में रोजगार भी उपलब्ध करा रहे हैं। अपने काम के लिए सुर्खियां बटोर चुके शर्मा ने मनीभास्कर से एयर इंडिया से सफल बिजनेसमैन बनने की कहानी साझा की।

 

गरीबी में गुजरा बचपन

शर्मा ने बताया कि उनके पिता टाटा मोटर्स में नौकरी करते थे और परिवार चलाने के लिए उनकी आय पर्याप्त नहीं थी। संतोष के पैदा होने के एक साल बाद ही उनके पिता रिटायर हो गए थे। पिता के रिटायरमेंट के बाद मां ने परिवार की जिम्मेदारी संभालने का जिम्मा लिया और पड़ोसी से मिले एक गाय को उन्होंने पालना शुरू किया। उन्होंने गाय का दूध बेचना शुरू कर दिया। वह भी अपनी माता और भाइयों के साथ लोगों के घरों पर जाकर दूध बेचा करते थे। दूध बेचने का यह कारोबार चल निकला और परिवार की हालत भी सुधरने लगी। धीरे-धीरे गाय की संख्या बढ़कर 25 हो गई।

 

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एयर इंडिया की छोड़ी नौकरी

 

कॉमर्स से 12वीं करने के बाद उन्होंने दिल्ली यूनिवर्सिटी से बी.कॉम में ग्रैजुएशन किया। इसके साथ उन्होंने कॉस्ट अकाउंटिंग का कोर्स भी किया। शर्मा की पहली नौकरी मारुति में लगी। यहां उन्होंने 6 महीने तक 4800 रुपए के स्टाइपंड पर काम किया। 2000 में इर्नेस्ट एंड यंग में 18000 रुपए महीने की सैलरी पर नौकरी लगी। 2003 में नौकरी छोड़ सिविल सर्विसेज की तैयारी करते-करते शर्मा ने 2004 में जमशेदपुर स्थित एक मल्टीनैशनल बैंक में बतौर ब्रांच मैनेजर ज्वाइन कर लिया। 6 महीने बाद शर्मा ने दूसरा बैंक ज्वाइन किया। इसके बाद 2007 में वह एयर इंडिया से बतौर असिस्टेंट मैनेजर (कोलकाता) जुड़े। यहां पर उनकी मंथली सैलरी 85,000 रुपए थी। फिर एक दिन उनकी मुलाकात कलाम साहब से हुई और उनसे प्रेरित होकर उन्होंने एयर इंडिया से तीन साल की छुट्टी लेकर छोड़ डेयरी फार्म की नींव रखी।

 

80 लाख रुपए किए इन्वेस्ट

शर्मा ने बताया कि उन्होंने डेयरी फर्म की शुरुआत के लिए अपनी पूरी जमा पूंजी लगा दी। डेयरी फर्म खोलने में उनके 80 लाख रुपए लग गए और 8 जानवरों के साथ अपने डेयरी फार्म की शुरूआत की थी, जिनकी संख्या अब बढ़कर 100 तक पहुंच गई है।

 

सिर्फ डेयरी नहीं चलाते शर्मा

शर्मा न सिर्फ अपने डेयरी स्टार्टअप के बिजनेस को बढ़ा रहे हैं, बल्कि वह लेखन और मोटिवेशनल स्पीकिंग का काम भी करते हैं। शर्मा अभी तक दो किताबें नेक्स्ट वॉट इज इन और डिजॉल्व द बॉक्स भी लिख चुके हैं। वह आईआईएम जैसे शीर्ष प्रबंधन संस्थानों में जाकर स्टूडेंट्स को प्रेरित करते हैं।

 

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100 से ज्यादा लोग कर रहे हैं काम

 

2014 में उन्होंने दलमा वाइल्डलाइफ अभ्यारण्य में पार्टनरशिप में 30 हजार रुपए महीने पर जमीन ली। कुछ रिसर्च करने के बाद उन्होंने 2016 में मम्मा डेयरी फर्म की शुरुआत की। इस डेयरी में फिलहाल 100 से ज्यादा लोग काम कर रहे हैं, जिनमें से अधिकतर कम उम्र के युवा और नक्सल प्रभावित दलमा गांव के आदिवासी हैं। उनकी कंपनी का टर्नओवर 2 करोड़ रुपए हुआ।

 

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