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3 दोस्तों ने MNC की नौकरी छोड़ शुरू किया बिजनेस, 2 साल में खड़ी हो गई 75 लाख की कंपनी, गाड़ियों में लगाती है ट्रैकिंग डिवाइस

बिजनेस शुरू करने में 35 लाख का रुपए का इन्वेस्टमेंट लगा।

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नई दिल्ली.  आए दिन सुनने या पढ़ने को मिलता है कि स्कूल बस किसी दुर्घटना का शिकार हो गई या फिर ड्राइवर बस को गलत रूट पर ले गया। ऐसी घटनाओं के कारण पैरेंट्स अपने बच्चों को लेकर चिंता में रहते हैं। इस कारण ही सरकार ने स्कूल बसों में कैमरा और GPS ट्रैकिंग सिस्टम अनिवार्य कर दिया है।

बिजनेस के लिए आइडिया खोज रहे तीन दोस्तों को सरकार के फैसले में मौका दिखा और उन्होंने अपनी MNC की नौकरी छोड़ ट्रैक्यूला सर्विसेज प्राइवेट लि. की शुरुआत है। महज 2 साल में कंपनी का टर्नओवर 75 लाख रुपए हो गया है।


MNC की नौकरी छोड़ बनाई कंपनी

कंपनी के एक फाउंडर मेंबर रोहित जैन ने मनीभास्कर को बताया कि ट्रैक्यूला सर्विसेज को तीन दोस्तों ने मिलकर शुरू किया है। मैं, मनीष सेवलानी और स्वप्निल तामगाडगे इसके फाउंडिंग मेंबर हैं। हम तीनों ने एनआईआईटी वारंगल से ग्रैजुएशन किया है। एक ही कॉलेज में पढ़ने की वजह से हमारी दोस्ती हो गई थी। ग्रैजुएशन करने के बाद हमने मल्टी नेशनल कंपनी में काम किया। हालांकि नौकरी के साथ अपना बिजनेस शुरू करने के लिए आइडिया की तलाश जारी रही। आइडिया मिलते ही हमने नौकरी छोड़ दी और फरवरी 2016 में बिजनेस शुरू कर दिया। 

 

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35 लाख रुपए का किया निवेश

 

रोहित का कहना है कि इस बिजनेस को शुरू करने में 35 लाख का रुपए का इन्वेस्टमेंट किया। यह रकम परिवार और दोस्तों से जुटाई गई। हमने व्हीकल ट्रैकिंग सिस्टम के लिए Dhundhoo ऐप बनाया। इंटरनेट और स्मार्टफोन के यूजर्स बढ़ने से हमारे बिजनेस को फायदा मिला। वे देश भर के 40 से 45 स्कूलों को अपनी सर्विस दे रहे हैं। इसके जरिए स्कूल के 20,000 से ज्यादा अभिभावक सर्विस का उपयोग कर रहे हैं। इसके जरिए अभिभावक स्कूल बस को ऑनलाइन ट्रैक कर सकते हैं।


स्मार्ट सिटीज में भी दे रहे हैं सर्विस


रोहित के मुताबिक, ट्रैक्यूला सर्विसेज हैदराबाद में बन रहे स्मार्ट सिटीज को भी सर्विसेस प्रोवाइड कर रही है। ट्रैक्यूला सर्विसेस फिलहाल 14 शहरों में ऑपरेशनल है। इसमें दिल्ली, अजमेर, आगरा, हैदराबाद, नैलोर, बेंगलुरू, कोयंबटूर, विशाखापट्टनम, नागपुर, वारंगल शामिल है। इसके अलावा 500 व्हीकल को ट्रैकिंग सर्विस उपलब्ध करा रहा है।

 

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75 लाख रु हुआ कंपनी का टर्नओवर

 

रोहित और उनके दोस्त अब स्मार्ट ट्रांसपोर्टेशन पर फोकस बढ़ा रहे हैं। उनका कहना है कि कंपनी ब्रेक इवन यानी मुनाफे में आ चुकी है। सवा दो साल में कंपनी का टर्नओवर 75 लाख रुपए हो चुका है। इस ऐप का हार्डवेयर और सॉफ्टवेयर इन्होंने इन हाउस डेवलप किया है,. जिससे कॉस्ट खासी बच गई। 

 

अमेरिका में बिजनेस बढ़ाना लक्ष्य

 

ट्रैक्यूला सर्विसेज अब अमेरिका में अपना बिजनेस बढ़ाना पर भी फोकस कर रही है। इसके लिए कंपनी ने एक अमेरिकी कंपनी से टाइअप किया है। इसके जरिए कंपनी वहां ट्रैकिंग सिस्टम का बिजनेस बढ़ाएगी।

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