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कीड़े-मकोड़े पकड़ने का मिला नया आइडिया, सालाना लाखों में कर रही कमाई

एक ऐसी तकनीक है कि ये कीड़े खुद व खुद जाल में फंस जाएंगे।

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नई दिल्ली.  कीड़े-मकोड़े फसल की पैदावार को अत्यधिक क्षति पहुंचाते हैं जिससे न सिर्फ किसानों की मेहनत बर्बाद होती है, बल्कि उनको आर्थिक नुकसान भी उठाना पड़ता है। इन समस्याओं से निपटने के लिए किसान कीटनाशकों का प्रयोग करते हैं, जिसका प्रतिकूल असर खेती पर पड़ता है और प्रोडक्शन घट जाता है। किसानों की इस समस्या से निजात दिलाने के लिए महाराष्ट्र के वर्धा की रहने वाली निलिशा जिभकाटे को एक नया आइडिया मिला और आज वो अपने खास आइडिया से सालाना लाखों में कमाई कर रही हैं।

 

 

क्या मिला नया आइडिया

 

निलिशा ने मनी भास्कर को बताया कि कीट-पतंगों का प्रकोप बढ़ जाता है, ऐसे में किसान कीटनाशक का प्रयोग करते हैं, जो कि फसल और पर्यावरण दोनों के लिए नुकसानदायक होता है। ऐसे में स्टिकी ट्रैप के इस्तेमाल से फसलों में होने वाले नुकसान से बचा जा सकता है। स्टिकी ट्रैप एक पीले रंग की शीट होती हैं जो फसल को नुकसान पहुंचाने वाले कीटों को अपनी तरफ आकर्षित करने के लिए खेत में लगाई जाती है। इससे फसलों पर कीटों से रक्षा हो जाती है। एक ऐसी तकनीक है कि ये कीड़े खुद व खुद जाल में फंस जाएंगे।

 

कैसे करता है काम

 

हर कीट पीले रंग की ओर आकर्षित होता है। अब अगर उसी रंग की शीट पर कोई चिपचिपा पदार्थ लगाकर फसल की ऊंचाई से करीब एक फीट और ऊंचे पर टांग दिया जाए तो कीट रंग से आकर्षित होकर इस शीट पर चिपक जाता है। फिर यह फसल को नुकसान नहीं पहुंचा पाते हैं। मकसद यह है कि कीड़ों से न सिर्फ फसलों की सुरक्षा हो, बल्कि रसायन का इस्तेमाल भी घटे व बंपर उत्पादन भी हो। इसका प्रयोग बेहद आसान व सस्ता है। यह हर मौसम के लिए कारगर है। आगे भी पढ़ें,

नौकरी की तैयारी छोड़ शुरू किया कारोबार

 

निलिशा ने बताया की फॉरेस्ट्री में मास्टर्स डिग्री करने के बाद वो नौकरी के लिए प्रतिस्पर्धी परीक्षाओं की तैयारी करने लगी। इस दौरान उन्हें एग्री क्लिनिक एंड एग्री बिजनेस के बारे में पता चला औऱ फिर परीक्षा की तैयारी छोड़ दो महीने का कोर्स ज्वाइन कर लिया। दुर्गापुर में ट्रेनिंग के बाद वो खुद का बिजनेस शुरू करने के लिए प्रेरित हुई औऱ फिर ट्री टेक नर्सरी की शुरुआत हुई।

 

बिना लोन शुरू किया बिजनेस

 

वो बताती हैं कि ट्रेनिंग पूरी होने के बाद उन्होंने फॉरेस्ट सीडलिंग नर्सरी खोली और वो किसानों को सीडलिंग पौधे उपलब्ध कराने लगी। अमरावती डिविजन में देखा कि सफेद कीड़े ने कॉटन की फसल बर्बाद कर दी है औऱ किसान कीड़ों को मारने के लिए कीटनाशक छिड़क रहे हैं। फिर उन्होंने स्टिकी ट्रैप बनाने का बिजनेस शुरू किया। इस बिजनेस को शुरू करने में उनको 7 लाख रुपए लगे जो उन्होंने घर से मैनेज किया। आगे भी पढ़ें,

सालाना 22 लाख रु है टर्नओवर

 

निलिशा का सनी येलो ट्रैप का बिजनेस तेजी से बढ़ रहा है। 2016 में उनके बिजनेस का सालाना टर्नओवर 15 लाख रुपए था, जो 2017 में बढ़कर 22 लाख रुपए हो गया है। वो कहती हैं कि इस साल इससे भी ज्यादा टर्नओवर हासिल करने का लक्ष्य है। इस बिजनेस में टर्नओवर पर 20 फीसदी का मुनाफा हो जाता है।

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