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लिस्टेड फर्म्स में फ्रॉड्स पर सेबी अलर्ट, ऑडिटर्स और वैल्युअर्स पर बढ़ाएगा सख्ती

सेबी सिक्युरिटीज मार्केट में ऑडिटर्स और अन्य जिम्मेदार लोगों के लिए नए नॉर्म्स लागू करने पर विचार कर रहा है।

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नई दिल्ली. मार्केट रेग्युलेटर सेबी सिक्युरिटीज मार्केट में ऑडिटर्स और अन्य जिम्मेदार लोगों के लिए नए नॉर्म्स लागू करने पर विचार कर रही है। इनके तहत डिफॉल्टर्स को ऑडिट या वैल्युएशन रिपोर्ट जारी करने पर बैन सहित जुर्माने जैसी कार्रवाई का सामना करना पड़ेगा। साथ ही गलत तरीके से हुए फायदे और अपनी फीस भी लौटानी होगी।
सेबी का यह प्रस्तावित कदम इसलिए भी महत्वपूर्ण है, क्योंकि सत्यम और किंगफिशर जैसे हाई-प्रोफाइल मामलों में ऑडिटर्स और वैल्युअर्स की भूमिका पर सवाल उठे थे। इसके साथ ही हाल में हुए पीएनबी स्कैम, वाट्सऐप लीक और फोर्टिस के मामले में भी ऐसे ही सवाल उठे थे।

 

 

फ्रॉड्स पर रोक लगाना होगा आसान
एक वरिष्ठ अधिकारी ने कहा कि सेबी सिक्युरिटी मार्केट में जिम्मेदार व्यक्तियों के लिए नए नियम लागू होने के साथ ही भविष्य में ऐसे फ्रॉड्स पर रोक लगाने के लिए सतर्कता बढ़ाने पर विचार कर रहा है। इसके लिए ज्यादा डिसक्लोजर्स और ऑडिटर्स व थर्ड पार्टीज द्वारा जारी फाइनेंशियल स्टेटमेंट्स की ज्यादा स्क्रूटनी की जरूरत होगी।

 

 

28 मार्च को होगी सेबी की बोर्ड मीटिंग
सेबी ने प्रस्तावित रेग्युलेशंस के लिए ड्राफ्ट कंसल्टेशन पेपर तैयार किया है, जिसे सेबी बोर्ड की 28 मार्च को होने वाली अगली मीटिंग में रखे जाने का अनुमान है। सभी स्टेकहोल्डर्स के कमेंट्स को शामिल किए जाने के बाद फाइनल रेग्युलेशंस को कंसल्टेशन पेपर में शामिल किया जाएगा।
नए नियमों के औचित्य से जुड़े सवाल पर एक वरिष्ठ अधिकारी ने कहा कि सिक्युरिटीज मार्केट के सफल परिचालन के लिए इन्वेस्टर्स का भरोसा अहम है और यह इन्वेस्टर्स को कैपिटल अलोकेशन के संबंध में विश्वसनीय जानकारियां मिलने पर निर्भर करता है।

 

 

इन्वेस्टर्स को मिलें सही जानकारियां
उन्होंने कहा, ‘सेबी का मुख्य उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि फाइनेंशियल रिजल्ट्स और अन्य जानकारियों का पूर्ण, समयबद्ध और सटीक डिसक्लोजर होना चाहिए, जो इन्वेस्टर्स के फैसलों के लिहाज से अहम होते हैं।’ गौरतलब है कि वाट्सऐप पर फाइनेंशियल रिजल्ट्स लीक होने, पीएनबी स्कैम और फोर्टिस व सत्यम-पीडब्ल्यूसी से जुड़े मामलों में ऐसी ही खामियों के आरोप लगे थे।
अधिकारी ने कहा कि ऑडिटर्स, मर्चेंट बैंकर्स, रेटिंग एजेंसीज, कॉस्ट अकाउंट्स और वैल्युअर्स से जुड़ी जानकारियां ही इन्वेस्टर्स के अधिकांश निवेश और वित्तीय फैसलों का आधार होती हैं। इन्हीं एंटिटीज को ‘प्रमुख रक्षक और मुख्य रखवाले’ के तौर पर देखा जाता है। इनके मामले में खामियों या संभावित जोखिम सामने लाने के प्रयासों में कोई कमी नहीं होनी चाहिए।

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