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म्‍युचुअल फंड खरीदना होगा तीन गुना सस्‍ता, कंपनियों की नहीं चलेगी मनमानी

म्‍युचुअल फंड खरीदना तीन गुना सस्‍ता हो जाएगा।

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मुम्‍बई. म्‍युचुअल फंड खरीदना तीन गुना सस्‍ता हो जाएगा। इसके अलावा म्‍युचुअल फंड कंपनियों को निवेशकों को अतिरिक्‍त जानकारी भी देना होगी। ऐसा नहीं करने वाले फंड हाउस पर अब सख्‍ती होगी। सेबी ने इस संबंध में फैसला ले लिया है और अब म्‍युचुअल फंड कंपनियों को नए नियम लागू करना होंगे। 
 

 

कैसे होगा म्‍युचुअल फंड खरीदना सस्‍ता

सेबी ने म्‍युचुअल फंड एक्‍सपेंस चार्ज को घटा दिया है। अभी तक म्‍युचुअल फंड कंपनियां 20 बेसिस प्‍वाइंट (0.20 फीसदी) का एक्‍सपेंस चार्ज लेती थीं, जिसे घटा कर 5 बेसिस प्‍वांट (0.05 फीसदी) कर दिया है। इसमें 75 फीसदी की कमी से निवेशकों का रिटर्न काफी बढ़ जाएगा।

 

 

कैसे मिलेगा यह फायद

म्‍युचुअल फंड में निवेश करने वालों को अभी 1 लाख रुपए के निवेश पर 200 रुपए एक्‍सपेंस चार्ज देना होता था। यह पैसा निवेश के समय के अलावा कंपनियां हर साल लेती हैं। अब जहां निवेश के वक्‍त भी उनको केवल 50 रुपए देना होगा बल्कि हर साल भी 1 लाख की आसेट अंडर मैनेजमेंट पर 50 रुपए ही देना होगा। इस प्रकार उनका 150 रुपए जो एक्‍सपेंस चार्ज के नाम पर कट जाता था अब वह उनका निवेश माना जाएगा। इस प्रकार लम्‍बे समय के निवेशकों को रिटर्न अब बढ़ जाएगा।

 

 

अजय त्‍यागी ने दी जानकारी

सेबी के चेयरमैन अजय त्‍यागी ने बोर्ड की बैठक के बाद बताया कि इससे निवेशकाें की इन्‍वेस्‍टमेंट लागत काफी कम हो जाएगी और बाद में भी चार्ज भी कम देना होगा। इसका सबसे ज्‍यादा फायदा लंबे समय के लिए निवेश करने वालाें को होगा। सेबी ने म्‍युचुअल फंड कंपनियों को एग्जिट लोड हटाने के बदले 20 बेसिस प्‍वांट (0.20 फीसदी) का एक्‍सपेंस चार्ज लगाने की इजाजत 2012 में दी थी।

 

 

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निवेशकों को देनी होगी पूरी जानकारी

सेबी ने तय किया है कि म्‍युचुअल फंड निवेशकों को अब फंड हाउस ज्‍यादा जानकारी देंगे। इसके अलावा इलेक्‍ट्रोनिक फॉर्म में भी जानकारी देनी होगी। अब रोज नेट आसेट वैल्‍यू देने का तरीका भी बदलना होगा। इसके अलावा हर छह माह में उन निवेशकों को जिनके ईमेल एड्रेस उपलब्‍ध नहीं है, उनको हार्ड कॉपी में यह जानकारी देना जरूरी होगा। इसके अलावा निवेशकों को दी जाने वाली जानकारी अपनी बेवसाइट के अलावा एम्‍फी की साइट पर भी देनी होगी।

 

 

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