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कंपनियां खरीदना-बेचना होगा आसान, SEBI का टेकओवर रेग्युलेशंस में संशोधन का प्रस्ताव

SEBI: देश में कंपनियों को खरीदना और बेचना जल्द आसान हो जाएगा।

Sebi plans to amend takeover regulations, remove inconsistencies

 

नई दिल्ली. देश में कंपनियों को खरीदना और बेचना जल्द आसान हो जाएगा। मार्केट रेग्युलेटर SEBI जल्द ही टेकओवर रेग्युलेशंस के चुनिंदा प्रोविजंस में बदलाव कर सकता है, जिसमें ओपन ऑफर प्राइस के रिवीजन का प्रस्ताव भी शामिल है। एक वरिष्ठ अधिकारी ने यह जानकारी दी है। सेबी एसएएसटी (सब्सटैंशियल एक्विजिशन ऑफ शेयर्स एंड टेकओवर्स) रेग्युलेशंस की समीक्षा से संबंधित एक डिस्कशन पेपर पर सार्वजनिक चर्चा के बाद यह कदम उठाने जा रहा है।  

 

 

किए जा सकते हैं ये बदलाव

अधिकारी ने मुताबिक, रिव्यू की कवायद का उद्देश्य रेग्युलेशंस की लैंग्वेज की सरल बनाना, गैर जरूरी प्रोविजंस और विसंगतियों को दूर करने के साथ ही कंपनीज एक्ट, 2013 के संबंधित जरूरी संदर्भों से अपडेट करना है।

 

 

ओपन ऑफर का प्राइस बढ़ाने के लिए मिल सकता है समय

अधिकारी के मुताबिक, यह भी प्रस्ताव किया जा रहा है कि ओपन ऑफर प्राइस बढ़ाने के लिए एक दिन का अतिरिक्त समय दिया जा सकता है। यह समय ओपन खुलने के एक दिन पहले से माना जाएगा। उन्होंने कहा कि इस टाइम फ्रेम को शेयरों की टेंडरिंग के दौरान ओपन ऑफर प्राइस के रिवीजन के फैसले से इन्वेस्टर्स में असमंजस की स्थिति पैदा हो सकती है।

 

 

21 जून को होगी सेबी की बोर्ड मीटिंग

डिस्कशन पेपर में टेंडरिंग पीरियड के क्लोजर से चार दिन पहले तक ओपन ऑफर प्राइस रिवीजन का सुझाव दिया गया था। हालांकि रेग्युलेटर ने पब्लिक कंसल्टेशन प्रोसेस के दौरान मिले कमेंट्स पर विचार करने के बाद इसमें बदलाव का फैसला किया।

इन प्रस्तावित बदलावों पर 21 जून को होने वाली सेबी की बोर्ड मीटिंग में चर्चा होने का अनुमान है। सेबी नॉर्म्स के तहत, एक लिस्टेड कंपनी में शेयरहोल्डिंग एक सीमा से ऊपर जाने की स्थिति में पब्लिक शेयरहोल्डर्स के लिए ओपन ऑफर लाना जरूरी है।

 

 

फ्रीक्वेंटली ट्रेडेड शेयर्स की बदलेगी परिभाषा

अधिकारी ने कहा कि इसके साथ ही फ्रीक्वेंटली ट्रेडेड शेयर्स की परिभाषा को संशोधित किया जाएगा और साथ ही एसएएसटी रेग्युलेशंस में एस्क्रो अकाउंट के कैश कंपोनेंट को एक इंटरेस्ट बियरिंग अकाउंट में रखने का ऑप्शन भी दिया जाएगा।

इसके अलावा इलेक्ट्रॉनिक मोड के माध्यम से लेटर ऑफ ऑफर डिस्पैच करने का विकल्प भी उपलब्ध कराने का प्रस्ताव भी किया गया है।

 
 

 

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