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सेबी ने म्‍युचुअल फंड स्‍कीम्‍स में बदलाव के लिए लास्‍ट डेट बढ़ाई, 15 दिसंबर तक का दिया समय

सेबी ने म्‍युचुअल फंड कंपनियों को योजनाओं को नए सिरे से एडजेस्‍ट करने के लिए समयसीमा को बढ़ाकर 15 दिसंबर कर दिया है।

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नई दिल्‍ली. मार्केट रेग्‍युुलेटर सेबी ने म्‍युचुअल फंड कंपनियों को अपनी योजनाओं को नए सिरे से एडजेस्‍ट करने के लिए समयसीमा को बढ़ाकर 15 दिसंबर कर दिया है। पहले इन कंपनियों को अपनी योजनाओं को 5 दिसंबर तक नए दिशा निर्देश के अनुसार परिवर्तन करना था। अब म्‍युचुअल फंड कंपनियां 15 दिसंबर तक अपनी योजना सेबी को सौंप सकेंगी। म्‍युचुअल फंड कंपनियां अब सिर्फ 5 कैटेगरी और 36 सब कैटेगरी में ही अपनी योजनाओं को रख पाएंगी।  म्‍युचुअल फंड कंपनियों को अपनी सभी योजनाओं को इसी फ्रेम में लाना होगा। इस वक्‍त सभी म्‍युचुअल फंड कंपनियों की मिला कर करीब 2000 योजनाएं चल रही हैं, जिनको घटाकर 1300 से करीब लाना होगा।

 


कंपनियों की कैपिटलाइजेशन के लिए बदल गए हैं नियम

सेबी के सर्कुलर के अनुसार अब म्‍युचुअल फंड कंपनियों की कैपिटलाइजेशन के अनुसार निवेश कर सकेंगे। सेबीने लार्ज कैप, मिड कैप और स्‍माल कैप की परिभाषा तय कर दी है। इन कंपनियों की हर साल जून और दिसबंर में जो मार्केट कैप होगी, म्‍युचुअल फंड कंपनियां उसी हिसाब से इनमें निवेश कर सकेंगी।

 

क्‍या है सेबी का नया आदेश

सेबी ने निवेशकों की सुविधा के लिए म्‍युचुअल फंड कंपनियों के लिए कैटेगरी तय कर दी हैं। इस प्रकार अब म्‍युचुअल फंड कंपनियां 36 से ज्‍यादा इक्विटी फंड की योजनाएं नहीं चला सकती हैं। पहले से चल रही योजनाओं को बदल कर इन्‍हीं कैटेगरी में लाना होगा।

 

नए नियम से क्‍या होगा फायदा

सेबी के नए नियम के बाद हर कैटेगरी में एक ही योजना होगी। इससे निवेशक को अच्‍छी योजना छांटने में मदद मिलेगी। अगर किसी निवेशक को लार्ज कैप स्‍कीम में निवेश करना है तो हर कंपनी की सिर्फ एक ही योजना पर नजर डालनी होगी। अभी ऐसा नहीं है। नियम साफ न होने के चलते निवेशक समझ ही नहीं पाता था कि कौन सी योजना लार्ज कैप है। कई बार रिसर्च कंपनियां भी योजनाओं को अलग-अलग कैटेगरी में रखती थीं, जिससे निवेशकों को अच्‍छी योजना छांटने में दिक्‍कत बढ़ जाती थी।

 

रोज जुड़ रहे 27 हजार निवेशक

म्‍युचुअल फंड का आकार तेजी से बढ़ रहा है। इस साल अप्रैल से लेकर सितंबर तक रोज औसतन 27 हजार नए निवेशक म्‍युचुअल फंड से जुड़े हैं। अंश फायनेंशियल एंड इन्‍वेस्‍टमेंट के डायरेक्‍टर दिलीप कुमार गुप्‍ता का कहना है कि ब्‍याज दरों में गिरावट का ट्रेंड और म्‍युचुअल फंड की समझ बढ़ने के चलते यह हो रहा है। अब लोग काफी समझदारी से म्‍युचुअल फंड में निवेश कर रहे हैं। यही कारण है सिस्‍टेमेटिक इन्‍वेस्‍टमेंट प्‍लान (SIP) माध्‍यम से निवेश बढ़ा रहे हैं। अप्रैस से सितंबर के बीच करीब 50 लाख SIP अकाउंट खुले हैं।

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