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कंपनियों को देनी होगी डायरेक्‍टर-ऑडिटर की पूरी डिटेल, MF खरीदना पड़ेगा सस्ता: सेबी बोर्ड

मार्केट रेग्युलेटर सेबी ने स्टॉक मार्केट में बड़े रिफॉर्म लागू करने की दिशा में कदम बढ़ा दिए हैं।

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नई दिल्ली. मार्केट रेग्युलेटर सेबी ने स्टॉक मार्केट में बड़े रिफॉर्म लागू करने की दिशा में कदम बढ़ा दिए हैं। सेबी ने गुरुवार को इस संबंध में की गईं कोटक पैनल की 80 सिफारिशों में से 40 को बिना बदलाव किए स्वीकार कर लिया। वहीं 15 सिफारिशें कुछ बदलाव के साथ स्वीकार की गईं। सेबी बोर्ड की मीटिंग में ये फैसले लिए गए।

 

 

टॉप 500 कंपनियों में खत्म होंगी सीएमडी की पोस्ट

सीएमडी की पोस्ट पर भी सेबी ने एक बड़ा फैसला किया। त्यागी ने कहा कि अब मार्केट वैल्यु के लिहाज से टॉप 500 लिस्टेड कंपनियों को सीएमडी यानी चेयरमैन और एमडी/सीईओ की पोस्ट को दो भागों में बांटनी होगी। इसका मतलब है कि इन कंपनियों में कोई एक व्यक्ति सीएमडी नहीं होगा। इसके अलावा कंपनी के बोर्ड में इंडिविजुअल डायरेक्टर्स की हिस्सेदारी घटाकर 8 फीसदी कर दी गई है, जो फिलहाल 10 फीसदी है।

 

 

प्रमोटर शेयर होल्डिंग फ्रीज कर सकेंगे एक्सचेंज

सेबी ने इनसॉल्वेंट कंपनियों पर सख्ती की शुरुआत करने के संकेत दिए। सेबी बोर्ड की मीटिंग के बाद चेयरमैन अजय त्यागी ने कहा कि अब एक्सचेंज नॉर्म्स के नॉन कंप्लायंस पर प्रमोटर्स की शेयरहोल्डिंग सीज कर सकेंगे। इसके अलावा मार्केट रेग्युलेटर ने इनसॉल्वेंट कंपनियों के रेग्युलेटरी कंप्लायंस पर पब्लिक व्यू भी मांगे हैं।

गौरतलब है इन दिनों देश में इनसॉल्वेंट कंपनियां खासी सुर्खियों में हैं, जिनमें पैसा लगाने वाले छोटे निवेशकों के हजारों करोड़ रुपए डूब चुके हैं।

 

म्युचुअल फंड खरीदना होगा सस्ता

अब इन्वेस्टर्स के लिए म्युचुअल फंड में निवेश करना सस्ता हो जाएगा। सेबी बोर्ड ने म्युचुअल फंड पर एक्जिट लोड में 0.15 फीसदी की कटौती करने को मंजूरी दे दी है। इस प्रकार जल्द ही म्युचुअल फंड पर एक्जिट लोड 0.20 फीसदी से घटकर 0.05 फीसदी रह जाएगा। सेबी चीफ त्यागी ने कहा कि इससे इन्वेस्टमेंट कॉस्ट में कमी लाने में मदद मिलेगी।

 

 

डायरेक्टर्स की संख्या होगी सीमित

सेबी चीफ ने कहा कि लिस्टेड कंपनियों में डायरेक्टर्स की संख्या अधिकतम 7 होगी। इस नॉर्म्स को 1 अप्रैल, 2020 से लागू किया जाएगा।

सेबी ने कहा कि उसकी टेकओवर रेग्युलेशंस में बदलाव की योजना है। इसके तहत एंटिटीज को ओपन ऑफर प्राइस बढ़ाने के लिए अतिरिक्त समय दिया जा सकता है।

त्यागी ने कहा कि लिस्टेड कंपनियों को डायरेक्टर्स और ऑडिटर्स की पूरी डिटेल भी एक्सचेंज को देनी होगी।

 

को-लोकेशन फैसिलिटी से घटेगी कॉस्ट

इसके साथ को-लोकेशन फैसिलिटी पेश किए जाने का रास्ता भी साफ हो गया। सेबी चेयरमैन ने कहा कि अब स्टॉक एक्सचेंज को-लोकेशन फैसिलिटी लॉन्च करनी होगी, जिससे कॉस्ट में कमी आएगी।

 

 

सेबी बोर्ड के अन्य अहम फैसले

-टिक-बाई-टिक डाटा को मुफ्त में उपलब्ध कराया जाएगा।

-रिलेटेड पार्टी ट्रांजैक्शंस के लिए डिसक्लोजर नॉर्म्स को बढ़ा दिया गया है।

-एंजल फंड्स के लिए कुछ इन्वेस्टमेंट नॉर्म्स को सरल बना दिया गया है। इन फंड्स के मिनिमम कॉर्पस की शर्त को 10 करोड़ रुपए से घटाकर 5 करोड़ रुपए कर दिया गया है।

-सेबी इनसाइडर ट्रेडिंग रेग्युलेशंस में बदलाव पर भी विचार कर रहा है।

-सेबी ने कहा कि प्राइस सेंसिटिव इन्फोर्मेशन शेयरिंग पर सख्ती के लिए नॉर्म्स जल्द ही जारी हो सकते हैं।

-अगर अल्गो ऑर्डर्स पर ऑर्डर-टू-ट्रेड रेश्यो 0.75 फीसदी से ज्यादा होता है तो पेनल्टी की कार्रवाई का सामना करना पड़ेगा।

 

 

एफएंडओ मार्केट में होंगे मामूली बदलाव

-सेबी ने कहा कि रिटेल इन्वेस्टर की सेफ्टी के लिए एफएंडओ मार्केट में दखल देना जरूरी है। मार्केट रेग्युलेटर को एफएंडओ मार्केट में मामूली बदलाव करना होगा।

-एफएंडओ ट्रेडिंग के मौजूदा नॉर्म्स को बढ़ा दिया गया है।

-एफएंडओ कॉन्ट्रैक्ट्स की फिजिकल डिलिवरी चरणबद्ध तरीके से की जाएगी।

-रिलेटेड पार्टी ट्रांजैक्शंस के लिए डिसक्लोजर नॉर्म्स को बढ़ा दिया गया है।

 


 

 

 


 
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