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Rcom फिलहाल नहीं बेच सकेगी टावर एसेट, सुप्रीम कोर्ट ने लगाई रोक

 

 

नई दिल्ली.  सुप्रीम कोर्ट ने सोमवार को नेशनल कंपनी लॉ अपीली ट्रिब्यूनल (एनसीएलएटी) की रिलायंस कम्युनिकेशंस (आरकॉम) के टॉवर्स की सेल को दी गई मंजूरी पर स्टे लगा दिया है। कोर्ट ने मामले में अपीली ट्रिब्यूनल का फैसला आने तक के लिए स्टे लगाया है। आरकॉम की टावर सेल की प्रक्रिया को उसकी सब्सिडियरी रिलायंस इन्फ्राटेल पूरा कर रही है। इसे अनिल अंबानी के स्वामित्व वाली कंपनी के लिए बड़ा झटका माना जा रहा है।

 

18 अप्रैल को होगी अगली सुनवाई
6 अप्रैल को एनसीएलएटी ने आरकॉम के एक लेंडर स्टेट बैंक ऑफ इंडिया (एसबीआई) को इस एसेट की सेल की दिशा में आगे बढ़ने के लिए मंजूरी दे दी थी, हालांकि इस डील से हुई आय को एक एस्क्रो अकाउंट में जमा करने के भी निर्देश दिए थे। अपीली ट्रिब्यूनल में मामले की अगली सुनवाई बुधवार को होगी।

 

रिलायंस इन्फ्राटेल को भी नोटिस
इस बार यह एसेट सेल रिलायंस इन्फ्राटेल की एक माइनॉरिटी इन्वेस्टर एचएसबीसी डेजी इन्वेस्टमेंट (मॉरिशस) लि. की वजह से फंसी है, जिसने अपीली ट्रिब्यूनल के आदेश को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी थी। इस मामले में कोर्ट ने रिलायंस इन्फ्राटेल को भी नोटिस जारी किया है।

इससे पहले एचएसबीसी डेजी नेशनल कंपनी लॉ ट्रिब्यूनल में रिलायंस  इन्फ्राटेल की एसेट की सेल पर स्टे हासिल करने में कामयाब रही थी। रिलायंस कम्युनिकेशंस ने इस स्टे को अपीली ट्रिब्यूनल में चुनौती दी थी।

 

 

आरकॉम की बढ़ीं मुश्किलें
सुप्रीम कोर्ट के इस आदेश से आरकॉम की मुश्किलें बढ़ गई हैं। दरअसल कंपनी ने अपने कर्ज को कम करने के लिए दिसंबर, 2017 में अपनी एसेट्स रिलायंस जियो को बेचने का एक प्लान पेश किया था।
आरकॉम पर मार्च, 2017 तक बैंकों का 39 हजार करोड़ रुपए का कर्ज था, जब उन्होंने अपने कर्ज के आंकड़े सार्वजनिक किए थे।

कंपनी के लॉयर ने कहा कि एसेट सेल से मिलने वाले 8 हजार करोड़ रुपए में माइनॉरिटी स्टेकहोल्डर एचएसबीसी डेज का शेयर लगभग 300 से 400 करोड़ रुपए के बीच होना चाहिए।

 

 

हाईकोर्ट ने भी लगाया था एसेट सेल पर स्टे
इससे पहले स्वीडन की कंपनी इरिक्सन की अपील पर आर्बिट्रेशन कोर्ट ने आरकॉम को झटका दिया था। आर्बिट्रेशन कोर्ट ने आरकॉम और उनकी दो अन्य कंपनियों पर बिना उसकी मंजूरी के किसी भी एसेट्स के ट्रांसफर और बिक्री करने पर रोक लगा दी थी। इस फैसले के खिलाफ आरकॉम ने दिल्ली हाईकोर्ट में अपील की थी, हालांकि हाईकोर्ट से भी अनिल अंबानी को झटका लगा था। कोर्ट ने उनकी कंपनी आरकॉम की आर्बिट्रेशन कोर्ट के उस आदेश को चुनौती देने वाली याचिका खारिज कर दी है, जिससे उस पर बिना पूर्व मंजूरी के कंपनी की एसेट बेचने या ट्रांसफर पर रोक लग गई थी।  

 

 

एसबीआई का सपोर्ट भी नहीं आया काम
देश के सबसे बड़ा सरकारी लेंडर स्टेट बैंक (एसबीआई) ने भी बुधवार को ट्रिब्यूनल के आदेश को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी थी। एसबीआई ने सिक्योर्ड लेंडर के तौर पर दलील दी थी कि दूसरों की तुलना में उसका दावा पहले बनता है। एसबीआई के अलावा 24 अन्य लेंडर्स का भी आरकॉम पर बकाया है। इनमें एलआईसी भी शामिल है। एसबीआई का आरकॉम पर 28 फरवरी तक कुल 4,027 करोड़ रुपए बकाया था।


 
चाइना डेवलपमेंट बैंक से आरकॉम ने लिया है कर्ज
इससे पहले आरकॉम को सबसे ज्यादा कर्ज देने वाले विदेशी लेंडर चाइना डेवलपमेंट बैंक ने जियो डील सहित अपने कर्ज में कटौती के प्लान पेश किए जाने के बाद उसके खिलाफ अपनी इनसॉल्वेंसी की पिटीशन वापस ले ली थी।

 

 

 

 

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