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SBI ने 20339 करोड़ बट्टेखाते में डाले, सरकारी बैंकों के 81 हजार करोड़ से ज्‍यादा लोन राइट ऑफ

नई दिल्‍ली. देश के सबसे बैंक SBI ने वर्ष 2016-17 के दौरान 20,339 करोड़ रुपए के लोन को राइट ऑफ (बट्टेखाते) किया। यह किसी भी सरकारी बैंक की तुलना में सबसे ज्‍यादा है। इस वर्ष के दौरान देश के सरकारी बैंकों ने कुल मिलाकर 81,683 करोड़ रुपए का लोन राइट ऑफ किया है। यह आंकड़ा उस दौरान का है जब एसबीआई में उसके सहयोगी बैंकों का मर्जर नहीं हुआ था। चालू वित्‍तीय वर्ष के शुरुआत छह माह के दौरान अभी तक सरकारी बैंक 53,625 करोड़ रुपए के लोन राइट ऑफ कर चुके हैं।

 

 

पांच गुना बढ़ा राइट ऑफ

सरकार की तरफ से जारी आंकड़ों के अनुसार 2012-13 के दौरान कुल मिलाकर सरकारी बैंकों ने 27231 करोड़ रुपए का लोन राइट ऑफ किया था। इसकी तुलना में 2016-17 में 81683 करोड़ रुपए लोन राइटऑफ किया गया। इस प्रकार इस दौरान इसमें करीब 5 गुना बढ़त दर्ज की गई है। सरकारी बैंकों ने 2013-14 के दौरान 34409 करोड़ रुपए का लोन राइट ऑफ किया, वहीं 2014-15 के दौरान 49018 करोड़ रुपए के लोन राइट ऑफ किए गए। 2015-16 में 57585 करोड़ रुपए के लोन माफ किए गए। मार्च 2017 में यह बढ़कर 81683 करोड़ रुपए के हो गए।

 

बैंकों के हिसाब से राइट ऑफ की रकम

एसबीआई के अलावा वर्ष 2016-17 के दौरान पंजाब नैशनल बैंक ने 9205 करोड़ रुपए के लोन राइट ऑफ किए। इसके बाद बैंक आफ इंडिया का नबंर हर जिसने 7346 करोड़ रुपए के लोन राइट ऑफ किए। इस दौरान कैनरा बैंक ने 5545 करोड़ रुपए और बैंक ऑफ बड़ौदा ने 4348 करोड़ रुपए के लोन राइट आफ किए।

 

NPA को लेकर खराब हैं स्थिति

भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) की तरफ से जारी आंकड़ों के अनुसार 21 में नौ सरकारी बैंकों का नॉन परपरफार्मिंग आसेट (NPA) रेश्‍यो 15 फीसदी के ऊपर निकल गया है। यह आंकड़ें 30 सितंबर 2017 के हैं। वहीं 14 बैंकों का यह रेश्‍यो 12 फीसदी के ऊपर है। बैंकों को  इस स्थिति से निकालने के लिए सरकार ने 2.11 लाख करोड़ रुपए की पूंजी डालने का फैसला किया है, जिससे बैंकों की वित्‍तीय स्थिति सुधरेगी और यह फिर से सामान्‍य कामकाज कर सकेंगे।

 

क्‍या होता है राइट ऑफ

बैंक जिन लोन को वसूल नहीं पाते हैं उनको राइट आफ कर देते हैं। यह लोन उनकी बुक्‍स पर तो नहीं दिखता है, लेकिन इन कार्ज को लोन माफ भी नहीं माना जाता है।

 

 

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