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500 करोड़ रु की धोखाधड़ी में फंसा ये संन्‍यासी, पाक से आकर दादा ने शुरू किया था कारोबार

फोर्टिस हेल्‍थकेयर के शिवेन्‍दर सिंह हालांकि संन्‍यास ले चुके हैं, लेकिन उन पर 500 करोड़ रुपए की गड़बड़ी का आरोप लगा है।

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नई दिल्‍ली. फोर्टिस हेल्‍थकेयर के को-फाउंडर रहे सिंह ब्रदर्स में एक शिवेन्‍दर सिंह हालांकि संन्‍यास ले चुके हैं, लेकिन उन पर 500 करोड़ रुपए की गड़बड़ी का आरोप लगा है। इस अपराध में उनके भाई मलविन्‍दर सिंह भी शामिल बताए जा रहे हैं। दरअसल, न्‍यूयॉर्क के एक इन्‍वेस्‍टर ने दिल्‍ली हाई कोर्ट में फाइनेंशियल सर्विसेज कंपनी रैलीगेयर एंटरप्राइजेज लिमिटेड के मालिक रहे मलविन्‍दर और उनके संन्‍यासी बन चुके भाई शिवेन्‍दर पर धोखाधड़ी और अनयिमितता का आरोप लगाते हुए केस दर्ज किया था। इस मामले में फैसला आने के बाद इन दोनों को फोर्टिस में अपने पदों को छोड़ना पड़ा है।

 

बन चुके हैं संन्‍यासी

शिवेन्‍दर सिंह ने 2015 में संन्‍यासी बनने का एलान किया था। वे 1 जनवरी 2016 से आध्यात्मिक संगठन, राधा स्वामी सत्संग ब्यास (RSSB) से जुड़ गए। RSSB का मुख्यालय अमृतसर के नजदीक है।

 

 

क्‍या है मामला

काॅरपोरेट जगत की बड़ी हस्तियों में शुमार मलविन्‍दर सिंह और उनके भाई शिवेन्‍दर सिंह पर फोर्टिस हेल्‍थकेयर से 500 करोड़ रुपए बिना बोर्ड अप्रूवल के निकालने का आरोप लगा है। पैसों का यह लेनदेन करीब एक साल पहले हुआ था। उस वक्‍त यह फंड कंपनी की बैलेंस शील पर कैश के रूप में मौजूद था। इस मामले से जुड़े लोगों को कहना है कि कंपनी जब सिंह ब्रदर्स के कंट्रोल में थी उस वक्‍त यह ट्रांजैक्‍शन हुआ। इसके चलते फोर्टिस की ऑडिटर कंपनी डेलॉइट हास्किंस एंड सेल्‍स एलएलपी ने कंपनी के दूसरी तिमाही में रिजल्‍ट पर साइन करने से मना कर दिया, जिसके चलते अभी तक यह परिणाम जारी नहीं किए जा सके हैं। ऑडिटर कंपनी का कहना है कि जब तक यह फंड कंपनी में वापस नहीं आते हैं, या उनके बारे में पूरी जानकारी नहीं मिलती है वह ऑडिट को अंतिम रूप नहीं दे सकते हैं। नियमों केे अनुसार इतनी बड़ी राशि के लेनदेन के लिए बोर्ड के अप्रूवल की जरूरत होती है, जो इस मामले में नहीं लिया गया।

 

 

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किसी को नहीं पता इन पैसों का क्‍या हुआ

इस मामले से जुड़े लोगों का कहना है कि यह अभी तक साफ नहीं है कि इस फंड का क्‍या हुआ। हालांकि जानकारों का कहना है कि सिंह ब्रदर्स इस पैसे को लौटाने जा रहे हैं। इसके बाद ही फोर्टिस का रिजल्‍ट जारी किया जा सकेगा।

 

 

फोर्टिस कर रही लोन दिया

हालांकि फोर्टिस के प्रवक्‍ता का कहना है कि कंपनी ने 473 करोड़ रुपए किसी कॉरपोरेट को लोन के रूप में दिया था। ट्रेजरी ऑपरेशन के तहत ऐसा लोन देना एक आमबात है। यह लोन जुलाई 2017 को दिया गया था। तीसरी तिमाही तक यह कंपनियां सिंह ब्रदर्स से जुड़ी रहीं। प्रवक्‍ता के अनुसार यह लोन रिलेटिड पार्टी ट्रांजैक्‍शन के रूप में दिखाया गया है और यह इसकी वापसी हो रही है।

 

दोनों ने दिया कंपनी से इस्‍तीफा

गुरुवार को दोनों भाइयों ने कंपनी से इस्‍तीफा दे दिया। मलविंदर सिंह कंपनी में कार्यकारी अध्‍यक्ष थे और शिवेन्‍दर सिंह कंपनी में उपाध्‍यक्ष थे। उन्‍होंने कहा कि किसी भी विवाद से अब कंपनी फ्री है।

 

पार्टी रिलेटिड ट्रांजैक्‍शन के नियम

भारत में कंपनीज एक्‍ट के अनुसार अगर कोई कंपनी पार्टी रिलेटिड ट्रांजैक्‍श्‍ान करती है तो इसके लिए बोर्ड का अप्रुवल जरूरी होता है। यही नहीं अगर यह ट्रांजैक्‍शन ज्‍यादा बड़ा हो तो इसके लिए शेयर्स होल्‍डर्स की अनुमति भी लेनी होती है। अगर कोई इन नियमों का उल्‍लंघन करता है तो यह अपराध माना जाता है इसके लिए सजा निर्धारित है। इसके लिए जेल या 5 लाख रुपए तक का जुर्माना लगाया जा सकता है।

 

 

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पाकिस्तान से आए थे भारत

शिवेन्‍दर सिंह के दादा मोहन सिंह भारत और पाकिस्तान के बंटवारे के बाद रावलपिंडी से दिल्ली आ गए थे। उन्होंने यहां सेकेंड वर्ल्ड वार के दौरान कमाए पैसे को ब्याज पर देना शुरू किया। बड़ी दवा कंपनियों में शुमार रेनबैक्सी ने भी 2.5 लाख रुपए उनसे पैसे उधार लिए और वापस नहीं कर पाई। यही कारण था कि मोहन सिंह ने 1952 में रेनबैक्सी को अपने हाथों में ले लिया। अपने बेहतरीन मैनेजमेंट और सोच से उन्होंने कंपनी को नई ऊंचाई पर पहुंचाया।

 

 

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