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SAIL को Q3 में 616 करोड़ रु का प्रॉफिट, रेवेन्यू रहा 15660 करोड़ रु

SAIL) को दिसंबर, 2018 में समाप्त तिमाही के दौरान 616 करोड़ रुपए का नेट प्रॉफिट हुआ।

SAIL Q3 profit jumps manifold to over Rs 616.30 cr

स्टील अथॉरिटी ऑफ इंडिया लिमिटेड (SAIL) को दिसंबर, 2018 में समाप्त तिमाही के दौरान 616 करोड़ रुपए का नेट प्रॉफिट हुआ, जबकि बीते साल समान अवधि के दौरान यह 43 करोड़ रुपए रहा था। वहीं कंपनी का प्रॉफिट मौजूदा वित्त वर्ष की पिछली तिमाही के 554 करोड़ रुपए के मुकाबले भी 11 फीसदी बेहतर रहा। 

नई दिल्ली. स्टील अथॉरिटी ऑफ इंडिया लिमिटेड (SAIL) को दिसंबर, 2018 में समाप्त तिमाही के दौरान 616 करोड़ रुपए का नेट प्रॉफिट हुआ, जबकि बीते साल समान अवधि के दौरान यह 43 करोड़ रुपए रहा था। वहीं कंपनी का प्रॉफिट मौजूदा वित्त वर्ष की पिछली तिमाही के 554 करोड़ रुपए के मुकाबले भी 11 फीसदी बेहतर रहा। 

 

15660 करोड़ रुपए का किया कारोबार

सेल (SAIL) ने चालू वित्त वर्ष की तीसरी तिमाही में 3 फीसदी की ग्रोथ के साथ कुल 15,660 करोड़ रुपए का कारोबार किया, जबकि एक साल पहले समान अवधि के दौरान यह 15,190 करोड़ रुपए रहा था। कंपनी ने तीसरी तिमाही में 2653 करोड़ रुपए का EBITDA दर्ज किया, जो पिछले वित्त वर्ष की इसी अवधि के 1560 करोड़ रुपए से 70 फीसदी ज्यादा है।
मौजूदा वित्त वर्ष में अक्टूबर-दिसंबर यानी शुरुआती 9 महीनों में भी कंपनी के नेट प्रॉफिट, कुल बिजनेस और एबिट्डा में भी अच्छी ग्रोथ दर्ज की गई। इससे कंपनी के बिजनेस में टिकाऊ ग्रोथ के संकेत मिलते हैं।

 

क्षमता बढ़ने का मिल रहा फायदा

सेल के चेयरमैन अनिल कुमार चौधरी ने एक बयान में कहा कि देश की सबसे बड़ी सरकारी इस्पात कंपनी अपने आधुनिकीकरण और विस्तार के तहत स्थापित सभी नई इकाइयों और सुविधाओं की निर्धारित क्षमता को हासिल करने के लक्ष्य के साथ उत्पादन बढ़ाने पर जोर दे रही है। कंपनी को इसका फायदा मिल रहा है।

 

उत्पादन में भी रही ग्रोथ

सेल ने वित्त वर्ष 2018-19 की तीसरी तिमाही में 43 लाख टन क्रूड स्टील का उत्पादन किया है, जो अब तक की किसी भी तिमाही का सर्वाधिक क्रूड स्टील उत्पादन है और यह वित्त वर्ष 2017-18 की तीसरी तिमाही के 39 लाख टन के मुकाबले भी 10 फीसदी अधिक है। 
सेल चेयरमैन ने इस्पात की कीमतों में जारी उतार-चढ़ाव पर कहा, ‘भारत में इस्पात की कीमतें सस्ते आयात से प्रभावित हो रही हैं, हालांकि इसके बावजूद बढ़ती इनपुट लागत के चलते आने वाले दिनों में इस्पात की कीमतों में सुधार की उम्मीद है।’
 

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