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जिस बिजनेस से मालामाल हुए मुकेश अंबानी, अब वही बढ़ा रहा मुसीबत

मोदी सरकार का एक फैसला पड़ रहा भारी

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नई दिल्ली.  रिलायंस इंडस्ट्रीज (RIL) के चेयरमैन मुकेश अंबानी जिस बिजनेस के दम पर देश के सबसे अमीर शख्स बने हैं। अब वही बिजनेस उनके लिए मुसीबत बन रहा है। रिलायंस इंडस्ट्रीज ने सालों तक भारत को नजरअंदाज कर पूरे एशिया, अफ्रीका और यूरोप में तेल का कारोबार किया और खूब मुनाफा कमाया। लेकिन अब RIL को पेट्रोलियम कारोबार में देश में बड़ी चुनौती का सामना करना पड़ रहा है। तेल की कीमतों में रिकॉर्ड बढ़ोतरी के बाद सरकार द्वारा पेट्रोल और डीजल के दाम में कटौती की वजह से RIL को झटका लगा है। इस वजह से रिलायंस को मार्केट कैप के मामले में नंबर वन का ताज गंवाना पड़ा।

 

इन देशों में तेल बेचकर कमाया पैसा

रिलायंस इंडस्ट्रीज ने मिडिल ईस्ट में क्रूड ऑइल प्रोसेस करने के बाद चीन, जापान, साउथ कोरिया और ताइवान जैसे देशों को बेचा। लेकिन जब ऑयल कंजम्पशन के मामले में भारत ने जापान को पीछे छोड़ा तो रिलायंस ने देश के ऑयल बाजार में दिलचस्पी दिखाई और देश में 1,300 सर्विस स्टेशन खोले। फिलहाल रिलायंस इन संकटों के बावजूद अपनी खुदरा योजना के साथ टिका हुआ है। इसी योजना के तहत रिलायंस अगले तीन साल में बीपी पीएलसी के साथ मिलकर 2,000 नए रिटेल स्टेशन की योजना बना रहा है।

 

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दाम में कमी के बाद रिलायंस के शेयर गिरे

 

4 अक्टूबर को सरकार द्वारा पेट्रोल और डीजल में 2.50 रुपए प्रति लीटर की कटौती की घोषणा वाले दिन ही रिलायंस का शेयर 6.9 फीसदी गिर गया और 28 अगस्त के रिकॉर्ड स्तर से अब तक 20 फीसदी की गिरावट आ चुकी है। 

 

गंवाया नंबर वन का ताज

इस गिरावट की वजह से रिलायंस का मार्केट वैल्युएशन घटकर 6.64 लाख करोड़ रुपए हो गया। 6.7 लाख करोड़ रुपए मार्केट कैप के साथ टीसीएस ने पहले स्थान पर फिर कब्जा कर लिया है। 

 

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ग्रॉस रिफाइनिंग मार्जिन में गिरावट

 

RIL ने सितंबर, 2018 में समाप्त तिमाही के दौरान 17.35 फीसदी की बढ़ोत्तरी के साथ 9,516 करोड़ रुपए का प्रॉफिट दर्ज किया। यह RIL के इतिहास का सबसे ज्यादा प्रॉफिट रहा है। वहीं एक साल पहले समान अवधि के दौरान कंपनी को 8,109 करोड़ रुपए का प्रॉफिट हुआ था। हालांकि कंपनी के ग्रॉस रिफाइनिंग मार्जिन (GRM) में कमी दर्ज की गई जो 9.50 डॉलर प्रति बैरल रह गया, जबकि बीते साल समान तिमाही के दौरान यह आंकड़ा 12 डॉलर रहा था।

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