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RBI के फैसले पर मार्केट की नजर, निफ्टी में दिख सकती है 200 प्वाइंट्स की गिरावट

सोमवार से RBI की मॉनिटरी पॉलिसी की तीन दिवसीय बैठक शुरू हो रही है और बैठक के नतीजे बुधवार को जारी होंगे।

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नई दिल्ली.   बीते हफ्ते मार्केट में उतार-चढ़ाव भरा कारोबार देखने को मिला। इस दौरान निफ्टी में 91 अंक की बढ़त दर्ज की गई। इस हफ्ते बाजार की नजर RBI मॉनिटरी पॉलिसी बैठक के नतीजे पर होगी। सोमवार से RBI की मॉनिटरी पॉलिसी की तीन दिवसीय बैठक शुरू हो रही है और बैठक के नतीजे बुधवार को जारी होंगे। मार्केट एक्सपर्ट्स का कहना है कि RBI के नतीजे को लेकर असमंजस की स्थिति है। ऐसे में आज से ही मार्केट पर इसका असर दिखेगा। इसके अलावा ट्रेड वार और क्रूड प्राइस जैसे कई अहम फैक्टर्स हैं जिससे इस हफ्ते बाजार में वोलेटिलिटी देखने को मिल सकता है। ऐसे में निफ्टी में 200 प्वाइंट्स की गिरावट आ सकती है।

दरें बढ़ने की संभावना से इनकार नहीं

जानकारों का मानना है कि बैठक में बढ़ती महंगाई, क्रूड की बढ़ती कीमतें आदि फैक्टर रहेंगे।  जीडीपी ग्रोथ के आंकड़ें बताते हैं कि इकोनॉमी रिकवरी मोड में आ चुकी है। ऐसे में दरें बढ़ाई जा सकती हैं। हालांकि मानसून बेहतर रहने का अनुमान जरूर है, लेकिन इस पर अभी क्लेरिटी नहीं है। वहीं, फिस्कल रिस्क और एमएसपी को लेकर भी अभी क्लेरिटी नहीं है। ऐसे में ब्याज दरों में तुरंत बढ़ोत्तरी प्रीमेच्योर हो सकती है।

 

अप्रैल में कोई बदलाव नहीं

रिजर्व बैंक ने लगातार तीसरी मॉनिटरी पॉलिसी में रेपो रेट में कोई बदलाव नहीं किया है। आरबीआई ने 5 अप्रैल को हुई अपनी पिछली बैठक में प्रमुख ब्याज दरों में कोई परिवर्तन नहीं किया था। फिलहाल रेपो रेट 6 फीसदी तथा रिवर्स रेपो रेट 5.75 फीसदी है। आरबीआई ने अगस्त 2017 के बाद से ही ब्याज दरों में कोई बदलाव नहीं किया है। आरबीआई गवर्नर उर्जित पटेल की अध्‍यक्षता में होने वाली एमपीसी मीटिंग पहली बार 3 दिन चलेगी, 6 जून को कमिटी ब्याज दरों को लेकर अपना फैसला देगी।

 

निफ्टी में 10,500 का अहम सपोर्ट

मार्केट एक्सपर्ट सचिन सर्वदे का कहना है कि घरेलू स्तर पर रिजर्व बैंक की नीति व उसके दरों पर पड़ने वाले प्रभाव पर बाजार की चाल निर्भर होगी। शुक्रवार को निफ्टी 10,700 के करीब बंद होने में कामयाब हुआ है। निफ्टी 10,417 के निचले स्तर पर फिसलने के बाद हैवीवेट शेयरों में खरीददारी बढ़ा है। लेकिन आगे मार्केट में ज्यादा तेजी आने की उम्मीद नहीं है। निचले स्तर पर निफ्टी में 10500 का सपोर्ट दिख रहा है। वहीं 10,700-800 का रेजिस्टेंस हैं।

 

वहीं केडिया कमोडिटी के डायरेक्टर अजय केडिया ने कहा कि मई में जीएसटी कलेक्शन में गिरावट आई है। मई में कुल जीएसटी कलेक्‍शन 94,016 करोड़ रुपए रहा, जबकि अप्रैल 2018 में जीएसटी कलेक्‍शन 1,03,458 करोड़ रुपए रहा था। ग्लोबल मार्केट भी डाउन है। ऐसे में बाजार में आगे कमजोरी दिख रही है।

 

इस हफ्ते ये फैक्टर्स रहेंगे हावी

 

# ग्लोबल ट्रेड वार बढ़ा

अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने यूरोपियन यूनियन और कनाडा समेत अन्य देशों पर स्टील और एल्युमीनियम प्रोडक्ट पर इम्पोर्ट ड्यूटी बढ़ा दी है। यूरोपियन यूनियन ने जवाबी कार्रवाई में ट्रम्प प्रशासन के फैसले को वर्ल्ड ट्रेड ऑर्गेनाइजेशन (WTO) में चुनौती दी है। कनाडा भी अमेरिका के खिलाफ डब्ल्यूटीओ में चला गया है। इससे ग्लोबल स्तर पर ट्रेड वार की शुरुआत हो गई है जिसका असर शेयर बाजार पर पड़ेगा।

 

#क्रूड प्राइस में इजाफा

ग्रो के सीओओ हर्ष जैन का कहना है कि क्रूड ऑयल की कीमतें बढ़ने का ऑयल इम्पोर्टिंग इकोनॉमी पर असर पड़ेगा। भारत क्रूड का बड़ा इम्पोर्टर है, ऐसे में करंट अकाउंट डेफिसिट, फिस्कल डेफिसिट, इम्पोर्टेड इंफ्लेशन पर प्रतिकूल प्रभाव डालेगा जो इकोनॉमिक ग्रोथ के लिए हेडविंड बन सकता है। मई में ब्रेंट क्रूड 80.50 डॉलर प्रति बैरल तक पहुंच गया था। हालांकि फिलहाल इसमें 4.6 फीसदी का करेक्शन हो चुका है औऱ ब्रेंट क्रूड का भाव 76.79 डॉलर प्रति बैरल पर आ गया है। 

 

ब्याज दरें बढ़ने पर किन सेक्टर्स पर नहीं पड़ेगा असर

केडिया का कहना है कि ब्याज दरें बढ़ने का असर उन सेक्टर्स पर नहीं पड़ता है जिसका इससे डायरेक्ट लिंक नहीं है। जैसे फार्मा, होटल, लॉजिस्टिक्स सेक्टर्स पर असर नहीं पड़ा है क्योंकि इनका ब्याज दरें बढ़ने से डायरेक्ट लिंक नहीं है।

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