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रिलायंस और एस्‍सार की पेट्रो सेक्‍टर में हिस्‍सेदारी हुई डबल, सरकार ने दी लोकसभा में जानकारी

देश में प्राइवेट फ्यूल रिटेलर रिलायंस और एस्‍सार ने पिछले तीन सालों में अपना मार्केट शेयर दोगुना कर लिया है।

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नई दिल्‍ली. देश में प्राइवेट फ्यूल रिटेलर रिलायंस और एस्‍सार ने पिछले तीन सालों में अपना मार्केट शेयर दोगुना कर लिया है। अब देश में कुल बिकने वाले पेट्रोल में 7 फीसदी और डीजल में इन कंपनियें की हिस्‍सेदारी 8 फीसदी पर पहुंच चुकी है। एस्‍सार को अब रूस की कंपनी ने रोसनेफ्ट ने खरीद लिया है। 
 
 
लोकसभा में दी जानकारी
लोकसभा में ऑयल मिनिस्‍टर धर्मेंद्र प्रधान ने लिखित उत्‍तर में यह जानकारी दी। उन्‍होंने बताया कि प्राइवेट कंपनियों को देश में मार्च 2002 में ईंधन बेचने की इजाजत दी गई थी। वहीं अप्रैल 2002 में पेट्रो पदार्थ के दाम भी डिरेग्‍युलेट कर दिए गए थे। 
 
 
निजी कंपनियों ने खोल पेट्रोल पंप
इसके बाद निजी कंपनियों रिलायंस, एस्‍सार और शेल ने देश में अपने पेट्रोल पंप खोल कर डीजल और पेट्रोल बेचना शुरू किया। लेकिन बाद में 2004 - 05 में सरकार ने पेट्रो पदार्थ पर फिर से नियंत्रण लागू कर दिया। इससे निजी कंपनियां बिना सब्सिडी के पेट्रो पदार्थ बेचने में परेशानी महसूस करने लगीं और धीरे धीरे उनका काम काफी कम हो गया। 
 
 
2010 में फिर पेट्रोल के दाम हुए डिरेग्‍युलेट
सरकार ने बाद में 2010 में पहले पेट्रोल के दाम डिरेग्‍युलेट किए और फिर 2014 में डीजल के दाम भी डिरेग्‍युलेट किए गए। इसके बाद से निजी कंपनियों ने फिर से अपना आपरेशन तेजी से शुरू किया। प्रधान ने बताया कि वर्ष 2015-16 में निजी कंपनियों की पेट्रोल के बाजार में हिस्‍सेदारी 3.5 फीसदी और डीजल के क्षेत्र में 3.1 फीसदी थी। यह अगले वर्ष में बढ़कर क्रमश 5.3 और 6 फीसदी हो गई। 2017-18 में यह आंकड़ा क्रमश 6.8 फीसदी और 8.2 फीसदी हो गया। 
 
 
4 फीसदी की दर से बढ़ रही खपत
प्रधान बताया कि देश में पेट्रो पदार्थ की खपत में हर साल औसतन 3 से 4 फीसदी की बढ़त हो रही है। देश में जनवरी 2018 तक 61,678 पेट्रोल पंप थे। इसमें सबसे ज्‍यादा आईओसी के 26,752, HPCL के 14,853 और BPCL के 14,293 पंप थे। वहीं निजी कंपनियों में एस्‍सार के 4,275 और Reliance के 1,400 पेट्रोल पंप काम कर रहे थे। शेल के मात्र 100 पेट्राल पंप काम कर रहे हैं। 
 

 

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