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फाइनेंशियल रिफॉर्म्स के पैकेज का हिस्सा हो PSB रीकैपिटलाइजेशन: IMF

पीएसबी रीकैपिटलाइजेशन एनपीए के प्रस्ताव में तेजी लाने के लिए फाइनेंशियल रिफॉर्म्स के व्यापक पैकेज का हिस्सा होना चाहिए।

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नई दिल्ली.  इंटरनेशनल मोनेटरी फंड (IMF) ने कहा है कि पब्लिक सेक्टर बैंक (पीएसबी) का रीकैपिटलाइजेशन नॉन-परफॉर्मिंग एसेट्स (एनपीए) के प्रस्ताव में तेजी लाने के लिए फाइनेंशियल रिफॉर्म्स के व्यापक पैकेज का हिस्सा होना चाहिए, जिसने नीरव मोदी केस के बाद ज्यादा ध्यान आकर्षित किया है।

 

RBI ने उठाए बड़े कदम

भारत दौरे से पहले आईएमएफ के डिप्टी मैनेजिंग डायरेक्टर ताओ झांग ने कहा कि इंटरनेशनल मोनेटरी फंड के मद्देनजर भारत में बैंकिंग और कॉरपोरेट सेक्टरों में कमजोरियों को दूर करने के लिए हालिया नीतिगत सुधार महत्वपूर्ण है।

 

उन्होंने कहा कि दिसंबर 2015 में रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया (आरबीआई) द्वारा शुरू की गई एसेट क्वालिटी रिव्यू ने बैंकों को सभी नन-पफॉर्मिंग एसेट्स को पहचानने और मार्च 2017 तक बैलेंस शीट में प्रोविजन करने के लिए कदम उठाया है। इसके अलावा मई 2016 में इन्सॉल्वेंसी और बैंकरप्सी कोड जैसे महत्वपूर्ण कदम उठाए हैं। हाल ही में आरबीआई ने भारत के पीएसबी के लिए बड़े रीकैपिटलाइजेशन की घोषणा की है।

 

9.5 लाख करोड़ रु हो जाएगा ग्रॉस NPA

झांग ने एक इंटरव्यू में कहा कि हालिया एसोचैम-क्रिसिल स्टडी के मुताबिक, भारतीय बैंकिंग सेक्टर का ग्रॉस नॉन परफार्मिंग एसेट्स (जीएनपीए) मार्च अंत तक 9.50 लाख करोड़ रुपए हो जाएगा, जो एक साल पहले 8 लाख करोड़ रुपए था। हालांकि उठाए गए सभी स्टेप्स का स्वागत योग्य है। हमें लगाता है कि पीएसबी रीकैपिटलाइजेशन एनपीए रेजलूशन में तेजी लाने, पीएसबी गवर्नेंस में सुधार, फाइनेंशियल सिस्टम्स से पब्लिक सेक्टर की भूमिका कम करने और बैंक लोन देने की कैपसिटी में बढ़ोतरी जैसे फाइनेंशियल रिफॉर्म्स के पैकेज का हिस्सा होना चाहिए।

 

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