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PNB फ्रॉड: 5 दिन में डूबे 11 हजार करोड़ रु, अकेले सरकार को 6 हजार करोड़ की चपत

पंजाब नैशनल बैंक (PNB) में 5 दिन पहले हुए घोटाले में 11 हजार करोड़ रुपए डूब चुके हैं।

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नई दिल्‍ली. पंजाब नैशनल बैंक (PNB) अभी 11,400 करोड़ रुपए के फ्रॉड से उबर भी नहीं पाई थी कि उसे एक और तगड़ा झटका लगा है। फ्रॉड के महज 5 दिन के भीतर बैंक की मार्केट वैल्यू में खासी कमी आई है। इस दौरान उसकी मार्केट कैप लगभग 11 हजार करोड़ रुपए कम हो गई है यानी उसके निवेशकों की इतनी रकम डूब गई है। सरकार की पीएनबी में सबसे ज्‍यादा हिस्‍सेदारी है, जिसके चलते उसको 6 हजार करोड़ रुपए से ज्‍यादा का नुकसान हुआ है। नुकसान उठाने वालों में LIC भी शामिल है, जिसे 1500 करोड़ रुपए से ज्‍यादा का झटका लगा है।

 

 

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5 दिन पहले आई थी घोटाले की खबर

PNB में 5 दिन पहले घोटाले की खबर आई थी। बैंक से डायमंड कारोबारी नीरव मोदी ने 11400 करोड़ रुपए का घोटाला किया है। इस खबर के बाद बैंक के शेयर में लगातार गिरावट आ रही है। इस दौरान निवेशक को 10,939 हजार करोड़ रुपए का नुकसान हो चुका है। पिछले चार दिनों में PNB का शेयर करीब 28 फीसदी गिर चुका है। हालांकि बैंक के शेयर में मंगलवार को गिरावट का दौर थमता दिखा। 

 

 

ऐसे हुई गिरावट

घोटाले के पहले बैंक की मार्केट कैप 39,209 करोड़ रुपए थी। जो मंगलवार को 28,270.22 करोड़ रुपए रह गई। इसमें कुल मिलाकर 10,938.78 करोड़ रुपए की गिरवट दर्ज की गई। PNB का शेयर मंगलवार को बीएसई में 116.55 रुपए पर बंद हुआ। हालांकि मंगलवार को एक समय PNB का शेयर 111 रुपए तक पर आ गया था।

 

 

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किस को हुआ कितना घाटा

-मुम्‍बई शेयर बाजार में फाइलिंग के अनुसार PNB में सरकार की हिस्‍सेदारी 57.04 फीसदी है। इस प्रकार सरकार को शेयर में इस गिरावट से 6,274.4 करोड़ रुपए का नुकसान हुआ है।

 

-एलआईसी की बैंक में 13.93 फीसदी हिस्‍सेदारी है। इस प्रकार एलआईसी को 1,532.3 करोड़ रुपए का नुकसान हुआ है।

 

-फारेन पोर्टफोलिया इन्‍वेस्‍टर (FPIs) की बैंक में हिस्‍सेदारी 12.56 फीसदी है। ऐसे में इन लोगों को 1,381.6 करोड़ रुपए का नुकसान उठाना पड़ा है।

 

-छोटे निवेशकों को हिस्‍सेदारी के हिसाब से 387 करोड़ रुपए का नुकसान उठाना पड़ा है।

 

 

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ऐसे हुआ फ्रॉड

- इस पूरे फ्रॉड को लेटर ऑफ अंडरटेकिंग (एलओयू) के जरिए अंजाम दिया गया। यह एक तरह की गारंटी होती है, जिसके आधार पर दूसरे बैंक अकाउंटहोल्डर को पैसा मुहैया करा देते हैं। अब यदि अकाउंटहोल्डर डिफॉल्ट कर जाता है तो एलओयू मुहैया कराने वाले बैंक की यह जिम्मेदारी होती है कि वह संबंधित बैंक को बकाये का भुगतान करे।

- पीएनबी के कुछ अफसरों ने नीरव मोदी को गलत तरीके से लेटर ऑफ अंडरटेकिंग (एलओयू) दी। इसी एलओयू के आधार पर मोदी और उनके सहयोगियों ने दूसरे बैंकों से विदेश में कर्ज ले लिया। पीएनबी ने भले ही दूसरे लेंडर्स के नाम का उल्लेख नहीं किया, लेकिन समझा जाता है कि पीएनबी द्वारा जारी एलओयू के आधार पर यूनियन बैंक ऑफ इंडिया, इलाहाबाद बैंक और एक्सिस बैंक ने भी क्रेडिट ऑफर कर दिया था।

 

घोटाले में कौन-कौन हैं आरोपी ?

- हीरा कारोबारी नीरव मोदी और गीतांजलि ग्रुप्स के मालिक मेहुल चौकसी इस घोटाले के मुख्‍य आरोपी हैं। इन दोनों ने गोकुलनाथ शेट्टी के साथ मिलकर इस घोटाले को अंजाम दिया।

- 280 करोड़ के फ्रॉड केस में ED ने नीरव मोदी की पत्नी आमी, भाई निशाल, मेहुल चीनूभाई चौकसी, डायमंड कंपनी के सभी पार्टनर्स, सोलर एक्सपर्ट्स, स्टेलर डायमंड और बैंक के दो अफसरों गोकुलनाथ शेट्टी (अब रिटायर्ड) और मनोज खरात को गिरफ्तार कर लिया है।

 

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