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फार्मा सेक्टर में 12 महीने तक रहेगा प्राइसिंग प्रेशर, ऐसे बनाएं निवेश स्ट्रैटजी

घरेलू स्तर पर ग्रोथ को देखते हुए एक्सपर्ट्स ने फार्मा सेक्टर लंबी अवधि के नजरिए से निवेश की सलाह दी है।

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नई दिल्ली.  नई दिल्ली. फाइनेंशियल ईयर 2017-18 की तीसरी तिमाही में फार्मा कंपनियों के नतीजे खासे कमजोर रहे। इसमें खास तौर से अमेरिका में बिजनेस करने वाली कंपनियों का मुनाफा और रेवेन्यू कमजोर रहा है। एक्सपर्ट्स का कहना है कि फार्मा सेक्टर पर अभी 12 महीने तक प्राइसिंग का प्रेशर बना रहेगा। घरेलू स्तर पर कारोबार में दिक्कत नहीं है, लेकिन अमेरिकी मार्केट में दिक्कतें बनी हुई हैं। इससे फार्मा सेक्टर पर अभी दबाव बना रहेगा। हालांकि घरेलू स्तर पर ग्रोथ को देखते हुए एक्सपर्ट्स ने फार्मा सेक्टर लंबी अवधि के नजरिए से निवेश की सलाह दी है।

 

78 फीसदी तक गिरा टॉप कंपनियों का मुनाफा

अमेरिका में प्राइसिंग प्रेशर का असर देश की बड़ी फार्मा कंपनियों पर देखने को मिला। उनके मुनाफे में 16 से 78 फीसदी की गिरावट रही। तीसरी तिमाही में डॉ रेड्डीज का मुनाफा 29 फीसदी गिरा। वहीं ग्लेनमार्क फार्मा का मुनाफा 78 फीसदी, सन फार्मा का मुनाफा 75 फीसदी, ल्यूपिन का मुनाफा 65 फीसदी तक गिरा।

 

 

कंपनी मुनाफा रेवेन्यू
ग्लेनमार्क फार्मा 78% गिरा 13.07% गिरा
सन फार्मा 75% गिरा 16% गिरा
ल्यूपिन 65% गिरा 11.3% गिरा
डॉ रेड्डीज 29% गिरा 3% गिरा
डिविस लैब 16.3% गिरा 5.68% बढ़ा
अरविंदो फार्मा 2.8% बढ़ा 11.2% बढ़ा
सिप्ला 4.8% बढ़ा 7.3% बढ़ा
कैडिला हेल्थकेयर 67.7% बढ़ा 41% बढ़ा

 

कंपनियों के वॉल्यूम में बढ़ोत्तरी

ब्रोकरेज हाउस मोतीलाल ओसवाल की रिपोर्ट के मुताबिक, दिसंबर तिमाही में कंपनियों की सेल्स में बढ़ोत्तरी हुई है। दिसंबर में सेकंडरी सेल्स 8.7 फीसदी रही। हालांकि इस महीने प्राइस ग्रोथ में गिरावट रही। सालाना आधार पर दिसंबर 2017 में इंडियन फार्मास्युटिकल मार्केट (आईपीएम) 7.8 फीसदी बढ़ा, जबकि FY18 के तीसरे क्वार्टर में सालाना ग्रोथ 7.2 फीसदी रही।

 

अमेरिकी बाजार की चिंताओं से बढ़ा दबाव

आईआईएफएल के फार्मा एनालिस्ट श्रीकांत अकोलकर ने कहा कि बड़ी फार्मा कंपनियों के तीसरी तिमाही नतीजे पर अभी भी दबाव देखने को मिला। उन्होंने कहा कि घरेलू स्तर पर फार्मा कंपनियों के कारोबार में कोई दिक्कत नहीं है, जिसमें डबल डिजिट ग्रोथ हुई है। लेकिन अमेरिकी कारोबार में कंपनियों को मुश्किलों का सामना करना पड़ रहा है। अमेरिकी सरकार अपने देश में सस्ती दवाई बेचने के लक्ष्य पर काम कर रही है। इससे अमेरिका में दुनियाभर की फार्मा कंपनियों की एंट्री बढ़ रही है, जिससे भारतीय कंपनियों के लिए चुनौती बढ़ गई है। इस वजह से कंपनियों पर कीमतें कम करने का प्रेशर बना है।

 

कीमतें स्टेबल होने में लगेगा वक्त

फॉर्च्यून फिस्कल के डायरेक्टर जगदीश ठक्कर का कहना है कि कई प्रोडक्ट को यूएस में मंजूरी मिलने और कीमतों के स्‍टेबल होने में समय लग सकता है। हालांकि यूएस एफडीए से कंपनियों की मंजूरी मिलने में तेजी आई है। ऐसे में सेक्टर से दबाव पूरी तरह हटने में अभी कम से कम 12 महीने का समय लग सकता है। डोमेस्टिक लेवल पर कंपनियों का बिजनेस बेहतर हुआ है। यूएस के अलावा भी कंपनियां दूसरे देशों में मार्केट बढ़ा रही हैं।

 

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ऐसे बनाएं निवेश स्ट्रैटजी

 

ठक्कर ने कहा कि फार्मा सेक्टर को मार्केट की तेजी का फायदा अभी तक नहीं मिला है। अच्छे शेयर भी सस्ते वैल्युएशन पर हैं, ऐसे में यह सेक्टर इस साल अच्छा परफार्म कर सकता है। निवेशकों को चुनिंदा स्टॉक्स के साथ लंबी अवधि के नजरिए से निवेश करना चाहिए।

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