Home » Market » StocksChand Bihari Agarwal, A Pakora Seller Becomes A Popular Jeweller in Bihar

ठेले पर पकौड़े बेचने वाला चांद बिहारी बन गया करोड़पति, पटना में खड़ा किया 20 करोड़ का कारोबार

Chand Bihari Agarwal - Gold Jeweller बनने में उनको 5 दशक लग गए।

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नई दिल्ली.  आमतौर पर सुनने को मिलता है कि मेहनत का फल मीठा होता है। इस कहावत को चरितार्थ किया है चांद बिहारी अग्रवाल ने। परिवार के भरण-पोषण के लिए कभी सड़कों पर पकौड़े और फुटपाथ पर साड़ियां बेचने वाले चांद बिहारी आज पटना के एक जाने-माने चांद बिहारी अग्रवाल Gold Jewellery शॉप के मालिक हैं। जिसका सालाना टर्नओवर 20 करोड़ रुपए है। हालांकि उनको इस मुकाम तक पहुंचने में पांच दशक लग गए। इसके साथ ही वो सैंकड़ों लोगों को रोजगार भी दे रहे हैं।

 

 

ठेले पर बेचे पकौड़े
चांद बिहारी ने मनीभास्कर को बताया कि वह जिंदगी के शुरुआती दिनों को कभी भूल नहीं सकते। बचपन में हमने काफी मुश्किलों का सामना किया। उनके पिता सट्टा लगाते थे। सट्टेबाजी में पिता ने बहुत पैसे कमाए भी। लेकिन भाग्य हमेशा एक जैसा नहीं रहता। एक दिन पिताजी सट्टेबाजी में सारे पैसे हार गए और घर की हालत खराब हो गई। घर की खस्ताहाल के चलते वो कभी स्कूल नहीं गए। 10 साल के होने पर घर की जिम्मेदारी में हाथ बटाने के लिए चांद बिहारी ने ठेले पर पकौड़े बेचे। 100 रुपए कमाने के लिए वह 12 से 14 घंटे काम करते थे, ताकि घर को रोटी नसीब हो सके।


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300 रु मंथली सैलरी की मिली जॉब
 
12 वर्ष की उम्र में चांद बिहारी को जयपुर में एक साड़ी शॉप में 300 रुपए मासिक वेतन की नौकरी मिली। यह नौकरी उनके बड़े भाई ने दिलाई थी। वह बताते हैं कि उस समय के हिसाब से सैलरी अच्छी थी और हम जैसे गरीब परिवार के लिए इतना काफी था।

 

एक डकैती ने कर दिया कंगाल
 
चांद बिहारी ने बड़े भाई की शादी में मिले गिफ्ट से 5,000 रुपए बचाए। इस बचत से उन्होंने 18 रुपए प्रति साड़ी के हिसाब से कुछ साड़ियां खरीद जयपुर से पटना पहुंच गए। फिर यहां उन्होंने साड़ी बेचने का काम शुरू किया। साड़ी का बिजनेस अच्छा चल रहा था और महीने बिक्री 80,000-90,000 रुपए तक पहुंच गई थी। लेकिन उनके दुकान में डकैती हो गई और उसी समय उनकी शादी हुई थी। उनके दुकान से 4 लाख रुपए के सामान की चोरी हुई थी। इन दोनों वजहों से वह एक बार फिर उसी राह पर खड़े हो गए।
 
 
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रत्न ने चमकाई किस्मत

 

साड़ी का बिजनेस खत्म होने के बाद चांद बिहारी ने अपने बड़े भाई के सहयोग से रत्न बेचने में हाथ आजमाया। उन्होंने घूम-घूम कर रत्न बेचे और करीब 500 दुकानों को संपर्क किया। रत्न बेचकर उन्होंने 10 लाख रुपए जमा किए और इस जमा पूंजी से उन्होंने 2002 में 350 वर्गफुट की शॉप में चांद बिहारी अग्रवाल ज्वैलरी हाउस की नींव रखी। जिसका सालाना टर्नओवर 20 करोड़ रुपए है।

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