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जून में P-notes इन्वेस्टमेंट घटकर रह गया 83,688 करोड़ रु, 9 साल का निचला स्तर

भारत के कैपिटल मार्केट्स में जून महीने में P-Notes के माध्यम से निवेश घटकर 83,688 करोड़ रुपए रह गया।

P-notes investment continue to drop; hit fresh low at Rs 83,688-cr

 

नई दिल्ली. भारत के कैपिटल मार्केट्स में जून महीने में पार्टिसिपेटरी नोट्स (P-Notes) के माध्यम से  निवेश घटकर 83,688 करोड़ रुपए रह गया, जो 9 साल से भी ज्यादा वक्त का न्यूनतम स्तर है। मार्केट रेग्युलेटर SEBI द्वारा इन इंस्ट्रुमेंट्स का दुरुपयोग रोकने के लिए हाल में लागू किए गए सख्त नॉर्म्स का इस पर खासा असर दिखा।  

 

 

क्या होते हैं पी-नोट्स

पी-नोट्स ऐसे इंस्ट्रुमेंट्स हैं, जो फॉरेन पोर्टफोलियो इन्वेस्टर्स (FPI) द्वारा बिना रजिस्ट्रेशन कराए सीधे भारतीय शेयर बाजार में निवेश के इच्छुक विदेशी निवेशकों को जारी किए जाते हैं। हालांकि उन्हें इसके लिए उचित प्रक्रिया से गुजरना होता है।

 

 

पी-नोट्स निवेश रहा 83688 करोड़ रु

सेबी द्वारा जारी डाटा के मुताबिक, जून महीने में भारतीय बाजारों-इक्विटी, डेट और डेरिवेटिव्स में पी-नोट्स से निवेश की कुल वैल्यू घटकर 83,688 करोड़ रुपए रह गई है, जबकि मई में यह आंकड़ा 93,497 करोड़ रुपए रहा था। इससे पहले यह आंकड़ा 1,00,245 करोड़ रुपए रहा था।

 

 

अप्रैल, 2009 के बाद का सबसे निचला स्तर

यह अप्रैल, 2009 के बाद का सबसे निचला स्तर है जब ऐसे निवेश 72,314 करोड़ रुपए के स्तर पर थे। पिछले महीने किए गए कुल निवेश में इक्विटीज में पी-नोट्स की होल्डिंग 61,786 करोड़ रुपए रही थी और बाकी निवेश डेट व डेरिवेटिव्स मार्केट्स में हुआ था।

इस अवधि के दौरान पी-नोट्स के माध्यम से एफपीआई निवेश की मात्रा इस अवधि के दौरान घटकर 2.6 फीसदी रह गई, जबकि पिछले महीने यह आंकड़ा 2.9 फीसदी रहा था।  

 

 

जून, 2017 से बना हुआ गिरावट का ट्रेंड

पी-नोट्स से निवेश में बीते साल जून से गिरावट का ट्रेंड देखने को मिल रहा है और सितंबर में यह 8 साल के निचले स्तर पर पहुंच गया था। हालांकि अक्टूबर में ऐसे निवेश में मामूली बढ़ोत्तरी दर्ज की गई, लेकिन नवंबर में एक बार फिर इसमें गिरावट दर्ज की गई और इस साल जून तक यह ट्रेंड जारी है।

इस गिरावट की मुख्य वजह मार्केट रेग्युलेटर द्वारा पी-नोट्स का दुरुपयोग रोकने के लिए उठाए गए कुछ कदम हो सकते हैं।

जुलाई, 2017 में सेबी ने ब्लैकमनी को चैनलाइज करने के लिए दुरुपयोग रोकने के वास्ते हर इंस्ट्रुमेंट पर 1,000 डॉलर की फीस जैसे कई सख्त नॉर्म्स लागू किए थे। इसके अलावा भी कई नॉर्म्स लागू किए गए थे।

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