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पी नोट्स इन्वेस्टमेंट 9 साल के निचले स्तर पर पहुंचा, सेबी के सख्त नियम का असर

नई दिल्ली.  घरेलू मार्केट में पी नोट्स के जरिए निवेश 9 साल के निचले स्तर पर पहुंच गया। मार्च के अंत तक पी-नोट्स के जरिए निवेश 1.0.6 लाख करोड़ रुपए के स्तर पर आ गया। सेबी द्वारा नियमों को सख्त किए जाने की वजह से इस रूट के जरिए निवेश में गिरावट देखने को मिली।

 

क्या है पी-नोट्स?

पार्टिसिपेटरी नोट यानी (पी-नोट ) एक तरह का ऑफशोर डेरिवेटिव इंस्ट्रूमेंट होता है, जो इन्वेस्टर्स सेबी के पास रजिस्ट्रेशन कराए बगैर इंडियन सिक्योरिटीज में पैसा लगाना चाहते हैं, वे इनका इस्तेमाल करते हैं। विदेशी इन्वेस्टर्स को पी-नोट्स सेबी के पास रजिस्टर्ड फॉरेन ब्रोकरेज फर्म्स या डोमेस्टिक ब्रोकरेज फर्म्स की विदेशी यूनिट्स जारी करती हैं। ब्रोकर इंडियन सिक्योरिटीज (शेयर, डेट या डेरिवेटिव्स) में खरीदारी करते हैं और फीस लेकर उन पर क्लाइंट को पी-नोट्स इश्यू करते हैं।

 


9 साल के लो पर पी नोट्स इन्वेस्टमेंट

सेबी डाटा के अनुसार, मार्च महीने के अंत तक इंडियन मार्केट- इक्विटी, डेट औऱ डेरिवेटिव्स में पी-नोट्स इन्वेस्टमेंट पिछले महीने 1,06,760 करोड़ रुपए से घटकर 1,06,403 करोड़ रुपए हो गया। इसके पहले, पी-नोट्स इन्वेस्टमेंट 1.19 लाख करोड़ रुपए था। अगस्त 2009 के बाद यह सबसे निचला स्तर है, जब पी नोट्स इन्वेस्टमेंट 97,885 करोड़ रुपए था।

 

इक्विटी में 73,264 करोड़ निवेश

- पिछले महीने इक्विटी में पी-नोट्स इन्वेस्टमेंट 73,264 करोड़ रुपए रहा है और बाकी डेट और डेरिवेटिव्स मार्केट में रहा। इसके अलावा, पी नोट्स के जरिए एफपीआई इन्वेस्टमेंट इसके पिछले महीने 3.3 फीसदी तुलना में बढ़कर 3.4 फीसदी रहा।

- पिछले साल जून से पी-नोट्स इन्वेस्टमेंट में गिरावट जारी है और सितंबर में यह गिरकर 8 साल के लो पर आ गया था। हालांकि, अक्टूबर में पी-नोट्स इन्वेस्टमेंट में हल्की बढ़ोतरी हुई थी लेकिन नवंबर में गिरा और इसके बाद मार्च अंत तक इसमें गिरावट रही।

 

सेबी ने सख्त किए थे नियम

- जुलाई 2017 में मार्केट रेग्युलेटर सेबी ने शेयर बाजार में अवैध धन के फ्लो को रोकने के लिए हर इश्‍यू पर ब्रोकर्स को 65,000 रुपए रेग्युलेटरी फीस लगाई थी।
- पी नोट्स रजिस्टर्ड फॉरेन पोर्टफोलियो के द्वारा उन विदेशी निवेशकों को जारी किए जाते हैं जो बिना रजिस्टर हुए भारतीय स्टॉक मार्केट में निवेश करना चाहते हैं। ऐसे में उन्हें कई कागजी कार्रवाईयों से छूट मिल जाती थी। हालांकि इस रूट के जरिए निवेश में कई तरह की गड़बड़ियों की आशंका के बाद सेबी ने पी नोट्स के जरिए निवेश के नियम सख्त कर दिए। 

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