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पी-नोट्स इन्वेस्टमेंट 1 लाख करोड़ रु के साथ 9 साल के लो पर, सेबी की सख्ती का असर

अप्रैल में भारतीय कैपिटल मार्केट में पी-नोट्स के माध्यम से कुल इन्वेस्टमेंट 9 साल के निचले लेवल पर पहुंच गया है।

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नई दिल्ली. अप्रैल में भारतीय कैपिटल मार्केट में पार्टिसिपेट्री नोट्स (पी-नोट्स) के माध्यम से कुल इन्वेस्टमेंट 9 साल के निचले लेवल 1 लाख करोड़ रुपए पर आ गया है। इसकी वजह सेबी द्वारा इस इंस्ट्रुमेंट्स के दुरुपयोग को रोकने के लिए नॉर्म्स में की गई सख्ती मानी जा रही है।  

रजिस्टर्ड फॉरेन पोर्टफोलियो इन्वेस्टर्स (एफपीआई) द्वारा ऐसे ओवरसीज इन्वेस्टर्स को पी-नोट्स जारी किए जाते हैं, जो खुद को सीधे रजिस्टर्ड कराए बिना भारतीय स्टॉक मार्केट का हिस्सा बनना चाहते हैं। हालांकि उन्हें इसके लिए एक लंबी प्रक्रिया (ड्यू डिलिजेंस) से गुजरना पड़ता है। 

 

 

जून, 2009 के लो लेवल पर पी-नोट्स निवेश
सेबी के आंकड़ों के मुताबिक अप्रैल के अंत तक इंडियन मार्केट में इक्विटी, डेट और डेरिवेटिव्स में पी-नोट्स इन्वेस्टमेंट की कुल वैल्यु घटकर 1,00,245 करोड़ रुपए पर आ गई, जबकि एक महीने पहले तक यह आंकड़ा 1,06,760 करोड़ रुपए के आसपास था। यह जून, 2009 के बाद का सबसे निचला लेवल है, जब कुल इन्वेस्टमेंट वैल्यू 97,885 करोड़ रुपए थी। 

 

 

एफपीआई में पी-नोट्स की हिस्सेदारी 3 फीसदी
बीते महीने किए गए कुल निवेश में पी-नोट्स की इक्विटीज में होल्डिंग 72,321 करोड़ रुपए थी और बाकी डेट व डेरिवेटिव मार्केट्स में थी। इसके अलावा अप्रैल में एफपीआई में पी-नोट्स के माध्यम इन्वेस्टमेंट की हिस्सेदारी घटकर 3 फीसदी रह गई, जबकि पिछले महीने यह आंकड़ा 3.4 फीसदी था। 
पी-नोट्स इन्वेस्टमेंट बीते साल जून से लगातार घट रहा है और सितंबर में यह 8 महीने के निचले लेवल पर पहुंच गया था। हालांकि अक्टूबर में इसमें मामूली बढ़ोत्तरी दर्ज की गई, लेकिन नवंबर में इसमें एक बार फिर गिरावट आई और इस साल अप्रैल तक लगातार यह ट्रेंड जारी है।

 

 

सेबी ने सख्त किए हैं नॉर्म्स 
पी-नोट्स इन्वेस्टमेंट में गिरावट की वजह मार्केट रेग्युलेटर द्वारा इसका दुरुपयोग रोकने के लिए उठाए गए कई कदम बताए जा रहे हैं। पी-नोट्स के दुरुपयोग पर कई सवाल भी उठते रहे हैं। जुलाई, 2017 में सेबी ने ब्लैकमनी को चैनलाइज करने के लिए हो रहे इसके दुरुपयोग को रोकने के लिए प्रति इंस्ट्रुमेंट 1,000 डॉलर फीस लगाई थी। इसके अलावा भी कई प्रकार से नॉर्म्स सख्त किए गए हैं। 

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