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24 साल का गोगोई गांव में कमाता है सालाना 6 लाख, मां की मौत के बाद 10 रु से शुरू किया था बिजनेस

अब वह इसके माध्यम से 300 से ज्यादा लोगों को रोजगार दे रहा है।

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नई दिल्ली.  कहते हैं अगर आप में आत्मविश्वास है तो आप जिंदगी में कैसे भी मुश्किल हालात का निडर होकर सामना कर सकते हैं। यह बात असम के एक छोटे से गांव शिवसागर के रहने वाले हिरणमोय गोगोई पर सटीक बैठता है। बचपन में ही भाई और मां की मौत के सदमे से उबरकर उसने 10 रुपए से बिजनेस शुरू किया। उसके बिजनेस का सालाना टर्नओवर अब छह लाख रुपए हो गया है। अब वह इसके माध्यम से 300 से ज्यादा लोगों को रोजगार दे रहा है।


10 रुपए में शुरू हुआ ‘गांव का खाना’

गोगोई ने अपने बिजनेस ‘गांव का खाना’ की शुरुआत साल 2016 में की थी। उसके पास शुरू में एक गैस सिलेंडर और एक स्टोव था। घर में रखे चावल, दाल और सब्जियों से बिजनेस की शुरुआत हुई। गोगोई बताते हैं कि उन्हें सिर्फ नमक खरीदने के लिए 10 रुपए खर्च करने पड़े थे। बाकी सामान घर से ही मिल गया था। गोगोई पहले घर में खाना बनाकर शहर में लोगों को खाना पहुंचाते और फिर शहर में ही घर का खाना बनाना शुरू किया।

 

ऑनलाइन हुआ गांव का खाना

गोगोई कहते हैं कि पहले तो फेसबुक से इसका प्रचार किया। इसके माध्यम से हमें 120 रुपए का पहला ऑर्डर मिला था। धीरे-धीरे बिजनेस में जब फायदा होने लगा तो उसे अपने बिजनेस को ऑनलाइन करने का आइडिया आया और फिर 'गांव का खाना' की वेबसाइट बनाई। 

 

6 लाख हुआ सालाना टर्नओवर

जून 2016 में गांव का खाना लॉन्च हुआ। बिजनेस का टर्नओवर 6 लाख रुपए हो गया है। गोगोई का लक्ष्य मौजूदा फाइनेंशियल ईयर में 10 लाख रुपए से ज्यादा का टर्नओवर हासिल करना है। गोगोई ने अपने बिजनेस का विस्तार किया है। वह अब नॉन-वेज पिकल्स भी बनाने लगे हैं। उनका कहना है कि इसके लिए उन्होंने 50 ऑथराइज्ड डिस्ट्रीब्यूटर भी बनाए हैं। 

 

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मां से मिला हौंसला

 

23 वर्षीय हिरणमोय गोगोई ने मनीभास्कर को बताया कि जब वह 15 साल का था तो एक दुर्घटना में उसके भाई की मौत हो गई थी। इसके तीन साल बाद मां के निधन ने उसे तोड़कर रख दिया। उन्होंने कहा, ‘फिर मैंने सोचा कि मेरी मां जैसी देश में करोड़ों मां हैं जो पैसे के अभाव में जरूरी सुविधाओं से वंचित हैं। यहां से मुझे इनके लिए कुछ करने की चाहत हुई।’

 

मां के इलाज में खर्च हो गई थी पूरी जमा-पूंजी 

 

गोगोई ने बताया कि बीमार मां के इलाज में घर की माली हालत खराब हो गई। आगे की पढ़ाई के लिए हमारे पास पैसे नहीं थे। पापा के सारे बैंक अकाउंट खाली हो गए थे। इसलिए मैंने हायर एजुकेशन नहीं करने का फैसला किया। उनका मानना था कि हायर एजुकेशन के बदले अगर कोई टेक्निकल कोर्स किया जाए तो उसका ज्यादा फायदा मिलेगा।

 

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70 हजार में मर्चेंट नेवी की ली ट्रेनिंग

 

हिरणमोय गोगोई ने एसटीसीडब्ल्यू 95 बेसिक सेफ्टी ट्रेनिंग कोर्स में एडमिशन लिया। इसे पूरा करने के बाद मर्चेंट नेवी की ट्रेनिंग ली। इस कोर्स पर 70,000 रुपए खर्च हुए। कोर्स पूरा होने के बाद वह नौकरी के लिए मलेशिया गया। हालांकि मलेशिया मे मन नहीं लगा और वापस लौटकर कोलकाता के एक बीपीओ में करीब डेढ़ साल नौकरी की और इसके बाद जमा हुए पैसे लेकर अपने गांव लौट गए।

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