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एक SMS से करें असली-नकली दवा की पहचान, सरकार का ये है प्लान

एसएमएस करते ही यह पता चल जाएगा कि दवा किस कंपनी द्वारा तैयार की गई है।

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नई दिल्ली.  अब दवा विक्रेता आपको नकली दवाई नहीं बेच पाएगा क्योंकि सरकार एक ऐसी योजना बना रही है जिससे आप खुद असली या नकली दवा की पहचान कर सकेंगे, वो भी कुछ सेकंड में। घरेलू बाजार में मिलने वाली दवाइयों की पैकिंग पर भी एक यूनिक कोड छपा होगा, जिसे आप एसएमएस कर आसानी से पता लगा सकेंगे। एसएमएस करते ही यह पता चल जाएगा कि दवा किस कंपनी द्वारा तैयार की गई है।

 

कैसे होगी पहचान

- दवाइयों की पैकिंग पर 14 डिजिट का यूनिक कोड नंबर प्रिंट होगा।
- इसमें दवा की ओरिजिन से लेकर इसकी पूरी सप्लाई चेन की जानकारी होगी।
- कोई भी कंज्यूमर दवा लेने के बाद यूनिक कोड नंबर को एसएमएस कर सकेगा।
- एसएमएस करते ही दवा की ओरिजिन कंपनी के अलावा इसके सप्लाई चेन की जानकारी मिल जाएगी।
- इस तरह से आप नकली दवा लेने की किसी भी संभावना से बच जाएंगे।
- देश की सबसे बड़ी एडवाइजरी बॉडी 16 मई को नकली दवाओं की बिक्री पर अंकुश लगाने के उपायों पर चर्चा करेगी।

 

डाटा बैंक बनाने की योजना

इसके लिए सरकार 300 दवा ब्रान्डों और उसके कंजम्पशन पैटर्न का डाटा बैंक बनाने की योजना बना रही है। उसके बाद दवा कंपनियों को दवा की पैकिंग पर एक यूनिक 14 डिजिट का अल्फान्यूमेरिक कोड प्रिंट करने के लिए कहा जाएगा।

 

आगे पढ़ें, योजना के पीछे क्या है उद्देश्‍य

ये है उद्देश्य

 

असल में घरेलू बाजार में नकली दवाइयों की शिकायत अक्सर आती है। इससे मरीजों की जान के साथ भी खिलवाड़ हो रहा है। ऐसे में यूनिक कोड होने से प्राइमरी लेवल पर केमिस्ट खुद असली और नकली दवा में पहचान कर सकेगा। नकली दवा बनाने वाले अपनी ओर से कोड डालते हैं तो भी एसएमएस के जरिए पता चल जाएगा कि यह दवा नकली है।

2014 और 2016 के बीच भारत में घटिया दवाओं के अनुपात की जांच के लिए किए गए एक सरकारी सर्वे में 3.16 फीसदी सैंपल घटिया पाए गए थे, जबकि 0.02 फीसदी सैंपल नकली थे।

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