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ओवरसप्लाई से कमजोर हुआ क्रूड का सेंटीमेंट, आगे अमेरिका की नीतियों से तय होगी चाल

नई दिल्ली.  पिछले कुछ हफ्तों से क्रूड ऑयल उतार-चढ़ाव के बीच दायरे में कारोबार कर रहा है। इंटरनेशनल मार्केट में क्रूड 60 से 64 डॉलर प्रति बैरल की रेंज में ट्रेड कर रहा है। एक्सपर्ट्स का कहना है कि अमेरिका में प्रोडक्शन में लगातार बढ़ोतरी के बावजूद क्रूड की कीमतें कम नहीं हुई हैं। इसका कारण है कि ओपेक और उसके सहयोगी देश कीमतें बढ़ाने के प्रयास में क्रूड प्रोडक्शन में कटौती जारी रखे हुए है। फिलहाल अमेरिका में ओवरप्रोडक्शन से क्रूड का सेंटीमेंट कमजोर है। इसके बावजूद क्रूड में ज्यादा गिरावट के आसार नहीं हैं। आगे अमेरिका की नीतियों पर क्रूड की चाल टिकी है। 

 

US सेंट्रिक रहेगा मार्केट
केडिया कमोडिटी के डायरेक्टर अजय केडिया का कहना है कि क्रूड की कीमतें अब अमेरिका से गाइड होंगी। ओपेक देशों द्वारा प्रोडक्शन कट का फैसला आगे बढ़ाने से मार्केट में क्रूड का शॉर्टेज हुआ था। लेकिन अमेरिका ने प्रोडक्शन बढ़ाकर इस शॉर्टेज की भरपाई कर दी, जिससे क्रूड कीमतों में स्थिरता बनी रही। वहीं, अमेरिका अब‍ किसी भी कीमत पर क्रूड का प्रोडक्शन घटाने को राजी नहीं है। यूएस में डाटा बेहतर आए हैं, जॉब ग्रोथ है। इस वजह से आगे क्रूड की डिमांड खुद वहां  ज्यादा रहेगी। वहीं, अब अमेरिका एक्सपोर्ट मार्केट में भी अपनी पोजिशन बेहतर रखना चाहता है। 

 

# US में प्रोडक्शन आलटाइम हाई पर
इंटरनेशनल एनर्जी एजेंसी (आईईए) के मुताबिक, फरवरी में ग्लोबल ऑयल सप्लाई पिछले साल 97.9 मिलियन बैरेल प्रति दिन से बढ़कर 700,000 बैरल्स प्रति दिन हो गई है। यूएस में इन्वेंट्री लगातार बढ़ रही हैं। जनवरी में क्रूड का स्टॉक 2 मिलियन बैरल से बढ़कर 5 मिलियन बैरल तक पहुंच गया है। वहीं अमेरिका प्रति दिन 10.38 मिलियन बैरल्स क्रूड का प्रोडक्शन हो चुका है जो आल टाइम हाई पर है।

 एंजेल ब्रोकिंग के कमेाडिटी एंड रिसर्च वाइस प्रेसिडेंट अनुज गुप्ता का कहना है कि अमेरिका में शेल बढ़े हैं। अमेरिका में ऑयल रिग्स की संख्या में बढ़ी है। पिछले हफ्ते अमेरिकी एनर्जी कंपनियों ने 4 ऑयल रिग्स ओपन किए हैं। इसके साथ ऑयल रिग्स की संख्या बढ़कर 800 हो गई है। ऑयल रिग्स बढ़ने से कीमतों में थोड़ी नरमी आई है। 

 

# रूस को पीछे करने की स्थिति में 
दुनिया के ऑयल प्रोडक्शन देशों में अमेरिका 2019 में रूस को छोड़कर पहले नंबर पर आ जाएगा। इंटरनेशनल एनर्जी एजेंसी ने कहा कि अमेरिका का शेल ऑयल प्रोडक्शन तेजी से बढ़ रहा है ग्लोबल ऑइल मार्केट में वह रूस को जल्द पीछे कर देगा। माना जा रहा है कि अगले साल तक अमेरिका क्रूड ऑयल प्रोडक्शन में नंबर वन हो जाएगा।

 

इन फैक्टर्स से है सपोर्ट 
केडिया का कहना है कि अमेरिका अमेरिका ईरान पर फिर से आर्थिक पाबंदी लगा सकता है। आर्थिक पाबंदी लगने की स्थिति में जियोपॉलिटिकल टेंशन बढ़ेगा। इसके अलावा सऊदी अरब औऱ ईरान में टेंशन का भी क्रूड को सपोर्ट मिलेगा। वहीं अनुज गुप्ता ने कहा कि आर्थिक तंगी की वजह से वेनेजुएला में क्रूड प्रोडक्शन काफी घट गया है। 2005 के मुकाबले यहां क्रूड का प्रोडक्शन आधा रह गया है, जो ऑयल मार्केट के लिए सपोर्टिव है। इससे सप्लाई में तेज गिरावट आ सकती है।

 

चीन में अच्छे डाटा का सपोर्ट
कमोडिटी एक्सपर्ट अनुज गुप्ता ने कहा कि चीन से अच्छे डाटा आने की उम्मीद है। क्रूड का बड़ा कंजम्पशन चीन, यूरोप औऱ अमेरिका है। चीन में डिमांड इंप्रूव होने से क्रूड को सपोर्ट मिलेगा। हालांकि अमेरिका में डाटा अच्छे नहीं हैं। लेकिन अमेरिकी प्रोडक्शन बढ़ाकर डिमांड औऱ सप्लाई के बीच के अंतर को बराबर कर रहा है जिससे क्रूड को सपोर्ट मिलेगा।

 

 # 60 से 68 डॉलर के बीच रहेंगी कीमतें 

एनर्जी एक्सपर्ट नरेंद्र तनेजा का कहना है कि बीते कुछ हफ्तों से क्रूड की कीमतों में उतार-चढ़ाव देखने को मिल रहा है। क्रूड में नरमी से पेट्रोल-डीजल की कीमतें कम हो रही हैं। लेकिन ईरान पर पाबंदी लगने के कंसर्न से क्रूड प्राइस पर प्रेशर है। फिलहाल क्रूड की कीमतें कम होने की संभावना नहीं है। अगले 6 महीने तक क्रूड 60 से 68 डॉलर प्रति बैरल की रेंज में ही रहेगा।

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