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नीरव की आमी थी डायमंड की दीवानी, मोदी ने कर दिया खेल

शादी के बाद वाइफ के आमी के डायमंड प्रेम ने उसे डायमंड कारोबार में गलत रास्‍ता दिखा।

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नई दिल्‍ली. नीरव मोदी को शुरू से ही डायमंड का शौक था, जिसे उन्‍होंने अपना पेश बना लिया। लेकिन शादी के बाद वाइफ के आमी के डायमंड प्रेम ने उसे डायमंड कारोबार में गलत रास्‍ता दिखा। इस बात का खुलासा अब हुआ है। हालांकि नीरव और आमी अपनी फैमिली की प्राइवेसी को लेकर बेहद सतर्क रहते थे, लेकिन एक बार उन्‍होंने खुलासा किया था कि उनकी पत्‍नी डायमंड्स की काफी शौकीन हैं, और उनका यह शौक दीवानगी की हद तक है। नीरव की वाइफ आमी अमेरिकी सिटीजन हैं, जहां वहां अपने आलीशान घर में रहती हैं।


काफी ग्‍लैमर थी आमी के बर्थडे की पार्टी

सितंबर 2016 में नीरव ने वाइफ के 40वें बर्थडे को और अपने ब्रांड 5वीं एनिवर्सरी को एक साथ शाही अंदाज में जोधपुर में मनाया था। यह फंक्शन चर्चित उमेद पैलेस होटल में हुआ था। इसमें जोधपुर के पूर्व महाराजा गज सिंह द्वितीय सहित कई हस्तियों को बुलाया गया था।

 

250 छात्रों को स्‍कॉलरशिप देती थीं आमी

नीरव मोदी फाउंडेशन की वेबसाइट के मुताबिक आमी उसकी ट्रस्टी हैं। नीरव के ऑनलाइन प्रोफाइल के मुताबिक ऐमी 'नीरव मोदी स्कॉलरशिप फॉर एक्सीलेंस' के प्रबंधन के लिए जिम्मेदार थीं, जिसके माध्यम से हर साल 250 छात्रों को सहयोग दिया जाता था।

 

 

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ट्रम्प कनेक्शन भी सामने आ रहा

अपने पति और अमेरिकी प्रेसिडेंट डोनाल्ड ट्रम्प की तरह आमी ने वार्टन बिजनेस स्कूल, फिलाडेल्फिया में हुई एल्युमिनाई मीट में भाग लिया था। ऐमी के पास अमेरिकी पासपोर्ट है और इसीलिए उन्हें अपने घर में ही नॉन-रेजिडेंट इंडियन माना जाता है। ट्रम्प के साथ उनका कनेक्शन यहीं खत्म नहीं होता। एक मीडिया रिपोर्ट के मुताबिक ट्रम्प 2015 में नीरव मोदी के न्यूयॉर्क सिटी स्थित स्टोर की ओपनिंग में भी पहुंचे थे।

एक रिपोर्ट के मुताबिक नीरव ने एक साल के बाद ही वार्टन स्कूल छोड़ दिया था और भारत आकर डायमंड बिजनेस में उतर गए थे।

 

क्‍यों चर्चा में आमी और नीरव मोदी

लगभग 11 हजार करोड़ रुपए के PNB स्कैम को लेकर डायमंड मर्चेंट नीरव मोदी इन दिनों भारत ही नहीं दुनिया भर में सुर्खियों में हैं। वह इस वक्‍त विदेश में भाग कर छिप गए हैं। किस देश में हैं इसको लेकर तरह तरह की चर्चा है, लेकिन सरकार ने अभी तक इस मामले में कुछ नहीं बताया है। इस घोटाले के चलते पीएनबी से लेकर सरकार तक हिली हुई है।

 

 

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ये मामला सामने कैसे आया?

- पंजाब नेशनल बैंक ने बुधवार को स्‍टॉक एक्‍सचेंज बीएसई को बताया कि उसने 1.8 अरब डॉलर (करीब 11,356 करोड़ रुपए) का संदिग्‍ध ट्रांजैक्‍शन पकड़ा है।

- यह फ्रॉड कुछ चुनिंदा अकाउंट होल्‍डर्स को फायदा पहुंचाने के लिए किए गए थे।

- बैंक के अनुसार, ऐसा लगता है कि इन ट्रांजैक्‍शन के आधार पर विदेश में कुछ बैंकों ने उन्हें (चुनिंदा अकाउंट होल्‍डर्स को) कर्ज दिया है। ये अकाउंट्स कितने थे, कितने लोगों को फायदा हुआ? इस बारे में अभी तक खुलासा नहीं हुआ है। यह मामला 2011 से जुड़ा है।

 

कैसे हुआ फ्रॉड?

- इस पूरे फ्रॉड को लेटर ऑफ अंडरटेकिंग (एलओयू) के जरिए अंजाम दिया गया। यह एक तरह की गारंटी होती है, जिसके आधार पर दूसरे बैंक अकाउंटहोल्डर को पैसा मुहैया करा देते हैं। अब यदि अकाउंटहोल्डर डिफॉल्ट कर जाता है तो एलओयू मुहैया कराने वाले बैंक की यह जिम्मेदारी होती है कि वह संबंधित बैंक को बकाये का भुगतान करे।

- पीएनबी के कुछ अफसरों ने नीरव मोदी को गलत तरीके से लेटर ऑफ अंडरटेकिंग (एलओयू) दी। इसी एलओयू के आधार पर मोदी और उनके सहयोगियों ने दूसरे बैंकों से विदेश में कर्ज ले लिया। पीएनबी ने भले ही दूसरे लेंडर्स के नाम का उल्लेख नहीं किया, लेकिन समझा जाता है कि पीएनबी द्वारा जारी एलओयू के आधार पर यूनियन बैंक ऑफ इंडिया, इलाहाबाद बैंक और एक्सिस बैंक ने भी क्रेडिट ऑफर कर दिया था।

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