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मिस्त्री ने की टाटा ग्रुप को ‘कंट्रोल’ में लेने की कोशिश, रतन टाटा-टाटा संस पर उनके आरोप सुनने लायक नहींः NCLT

NCLT ने कहा कि मिस्त्री द्वारा Ratan Tata और ग्रुप कंपनियों के खिलाफ लगाए गए आरोप सुनने के लायक नहीं हैं।

NCLT Rejected Cyrus Mistry's Petition Against Tata Sons, Ratan Tata

 

मुंबई. नेशनल कंपनी लॉ ट्रिब्यूनल (NCLT) एक बार सायरस मिस्त्री को झटका दिया है। ट्रिब्यूनल ने कहा कि मिस्त्री द्वारा Tata Sons के पूर्व चेयरमैन Ratan Tata और ग्रुप कंपनियों के खिलाफ लगाए गए आरोप सुनने के लायक नहीं हैं। इसी सप्ताह एनसीएलटी ने टाटा संस के खिलाफ मिस्ट्री की पिटीशन को खारिज कर दिया था।

 

 

एनसीएलटी के आदेश से कई बातें आईं सामने

इसके बजाय ट्रिब्यूनल ने अपने आदेश में यह भी कहा कि मिस्त्री ने टाटा संस के चेयरमैन और बोर्ड में डायरेक्टर पद पर रहने के दौरान ‘ग्रुप पर कंट्रोल’ हासिल करने की कोशिश की। गुरुवार को सार्वजनिक हुए 368 पेज के अपने आदेश में एनसीएलटी की एक स्पेशल बेंच ने कहा कि टाटा फैमिली और उनके बिजनेस के इतिहास का मुंबई से गहरा नाता रहा है। साथ ही दशकों से टाटा ग्रुप द्वारा की जा रही समाज की सेवा और उदारता की हर तरफ तारीफ होती रही है।

 

 

एनसीएलटी ने की मिस्त्री की आलोचना की

बेंच ने माना कि ग्रुप के मूल में ऐसी ही बातें छिपी हुई हैं और टाटा ग्रुप के इसी इतिहास को देखते हुए इसकी उम्मीद कम ही लगती है कि ग्रुप व्यक्तिगत फायदे के लिए कोई एक व्यक्ति फैसले ले सकता है। ट्रिब्यूनल ने रतन टाटा और ट्रस्टी डायरेक्टर एन सूनावाला के खिलाफ चार्ज लगाने पर मिस्त्री की आलोचना भी की है।

 

 

मिस्त्री ने लगाया था शेयरहोल्डर्स के उत्पीड़न का आरोप

24 अक्टूबर, 2016 को टाटा संस के चेयरपर्सन पद से हटाए जाने के बाद मिस्त्री ने अपनी फैमिली द्वारा चलाई जा रही कंपनियों के माध्यम से एनसीएलटी का रुख किया था और टाटा संस द्वारा छोटे शेयरहोल्डर्स के उत्पीड़न और कुप्रबंधन के आरोप लगाए थे।

उन्होंने ग्रुप के पूर्व चेयरमैन रतन टाटा पर कई आरोप लगाए और कहा कि वह ग्रुप कंपनियों के रोजमर्रा के कारोबारी फैसलों में दखलंदाजी किया करते थे। मिस्त्री ने कहा कि इस तरह की दखलंदाजी से ग्रुप को खासा नुकसान हुआ।

 

 

खारिज किए मिस्त्री के आरोप

मिस्त्री ने आरोप लगाया कि टाटा और सूनावाला जैसे अन्य ट्रस्टीज शैडो डायरेक्टर के तौर पर काम कर रहे थे और ‘सुपर बोर्ड’ के तौर पर टाटा संस को कंट्रोल कर रहे थे। हालांकि ट्रिब्यूनल ने इन आरोपों को खारिज करते हुए कहा, ‘पिटीशनर यह साबित करने में नाकाम रहा कि टाटा और सूनावाला ने कंपनी के हित या पिटीशनर के हित में पूर्वाग्रह से ग्रस्त होकर काम किया।’ रतन टाटा की अगुआई वाले टाटा ट्रस्ट की टाटा संस में 66 फीसदी हिस्सेदारी है।

 

 

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