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मुकेश अंबानी की शॉपिंग: 12 महीने में कीं 12 डील्स, खर्च कर दिए 29 हजार करोड़ रु.

मुकेश अंबानी बीते 12 महीनों के दौरान ताबड़तोड़ 12 डील की हैं, जिनमें उन्होंने कई कंपनियों को खरीद लिया है।

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नई दिल्ली. भारत के सबसे अमीर शख्स मुकेश अंबानी बीते 12 महीनों के दौरान ताबड़तोड़ 12 डील्स का ऐलान किया है, जिनके माध्यम से उन्होंने कई कंपनियों को खरीद लिया है। इसके लिए उन्होंने लगभग 29 हजार करोड़ रुपए खर्च किए हैं। माना जा रहा है कि उन्होंने कंज्यूमर्स को ज्यादा से ज्यादा ऑफर्स की पेशकश के लिए यह दांव चला है।

 

 

आरआईएल की बड़ी डील्स

 

कंपनी  कब डील साइज
केमरॉक इंडस्ट्रीज जून, 2017   670 करोड़ रुपए
बालाजी टेलीफिल्म्स (24.9% स्टेक) जुलाई, 2017 413 करोड़ रुपए
आरकॉम दिसंबर, 2017 17300 करोड़ रुपए
इंडियन फिल्म कंबाइन (65% स्टेक) फरवरी, 2018   1105 करोड़ रुपए
इरोज इंटरनेशनल (5% स्टेक) फरवरी, 2018  15 करोड़ डॉलर
सावन मार्च, 2018  1 अरब डॉलर
जेनेसिस लग्जरी फैशन (5% अतिरिक्त स्टेक) मार्च, 2018 35 करोड़ रुपए
कायोस टेक्नोलॉजिज (16% स्टेक) मार्च, 2018 70 लाख डॉलर
एम्बाइब (72.7% स्टेक) अप्रैल, 2018 18 करोड़ डॉलर
रिया रिटेल जून, 2018 203 करोड़ रुपए
आलोक इंडस्ट्रीज  जून, 2018     5000 करोड़ रुपए
रेडियस कॉर्प जून, 2018     7.5 करोड़ डॉलर

 

  

कंपनियां खरीदने में खर्च किए 29 हजार करोड़ रु

ब्लूमबर्ग की एक रिपोर्ट के मुताबिक चेयरमैन मुकेश अंबानी की अगुआई में कंपनी बीते एक साल के दौरान कंपनियां या उनकी स्टेक खरीदने पर लगभग 4.21 अरब डॉलर यानी 28,900 करोड़ रुपए खर्च कर चुकी है। आरआईएल द्वारा की गईं इस डील्स में शामिल 10 कंपनियां कंज्यूमर बिजनेस से जुड़ी हैं। अंबानी भारत की मौजूदा बैड लोन की समस्या को भुनाने के मूड में है, जिस क्रम में टेक्सटाइल कंपनी आलोक इंडस्ट्रीज के अलावा एक कार्बन फाइबर फर्म और अंबानी की कर्ज में डूबी कंपनी आरकॉम की कई एसेट्स खरीदने की डील की है।


 

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पेट्रोलियम की तरह दूसरे वेंचर को प्रॉफिटेबल बनाने का प्लान

आरआईएल को दुनिया के सबसे बड़े रिफाइनिंग कॉम्पलेक्स सहित कई बड़े प्रोजेक्ट्स बनाने के लिए जाता जाता है। अब आरआईएल के टेलिकॉम, रिटेल और मीडिया कंपनियों के अधिग्रहण से अंबानी की इन सेक्टर्स के वेंचर्स को पेट्रोकेमिकल्स और रिफाइनिंग बिजनेस की तरह प्रॉफिटेबल बनाने की महत्वाकांक्षा जाहिर होती है। एंटरटेनमेंट और आर्टीफिशियल इंटेलिजेंस बेस्ड एजुकेशन कंपनियों के अधिग्रहण से  अंबानी द्वारा रिलायंस जियो इन्फोकॉम के इर्दगिर्द एक इंटिग्रेडेट डिजिटल ऑफरिंग तैयार करने के संकेत भी जाहिर होते हैं।

 


अपना कंटेंट जेनरेट करने की तैयारी

एक्सपर्ट्स के मुताबिक रिलायंस इन अधिग्रहणों के माध्यम से ‘कंटेंट कब्जाने की कोशिश’ कर रही है। अगर कंपनी पर्याप्त कंटेंट जेनरेट करती है तो निश्चित तौर पर यूजर्स उनके नेटवर्क पर आएंगे। अंबानी ने देश में मौजूद बैड लोन्स की समस्या को भी भुनाने की कोशिश की है।

 

 

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एजीएम में पेश किया था बड़ा प्लान

हाल में आरआईएल की एजीएम के दौरान अंबानी ने अपने ई-कॉमर्स प्लान के बारे में भी संकेत दिए। ब्रोकरेज सीएलएस ने अपनी 3 जुलाई की रिपोर्ट में कहा कि ई-कॉमर्स प्लान कंपनी के स्टॉक की रीरेटिंग की वजह बन सकता है।

 

 

आरकॉम के लिए की सबसे बड़ी डील

आरआईएल ने हाल ने रिया रिटेल प्राइवेट लिमिटेड का अधिग्रहण किया। इसके अलावा 17300 करोड़ रुपए में रिलायंस कम्युनिकेशंस की स्पेक्ट्रम, मोबाइल फोन टॉवर और फाइबर एसेट्स खरीदने का प्रस्ताव है।

 
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