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5 साल और RIL के चेयरमैन बने रहेंगे मुकेश अंबानी, शेयरहोल्डर्स ने दी मंजूरी

मुकेश अंबानी 5 और साल रिलायंस इंडस्ट्रीज (RIL) के चेयरमैन और मैनेजिंग डायरेक्टर बने रहेंगे।

Mukesh Ambani gets another 5 yrs as Reliance Chairman

 

नई दिल्ली. मुकेश अंबानी 5 और साल रिलायंस इंडस्ट्रीज (RIL) के चेयरमैन और मैनेजिंग डायरेक्टर बने रहेंगे। कंपनी शेयरहोल्डर्स ने इसके लिए मंजूरी दे दी है। सीएमडी पद पर यह एक्सटेंशन 19 अप्रैल, 2019 से प्रभावी होगा।  61 वर्षीय अंबानी वर्ष 1977 से आरआईएल के बोर्ड में हैं और पिता धीरूभाई अंबानी की जुलाई, 2002 में मृत्यु के बाद उन्हें कंपनी का चेयरमैन नियुक्त किया गया था।

 

 

अंबानी के पक्ष में पड़े 98.5 फीसदी वोट

कंपनी की मुंबई में 5 जुलाई को हुई एनुअल जनरल मीटिंग में अंबानी की पुनः नियुक्ति के लिए ‘मौजूदा टर्म ऑफ ऑफिस  से 5 साल की अवधि के लिए’ एक रिजॉल्यूशन पेश किया गया था। आरआईएल ने एक रेग्युलेटरी फाइलिंग में कहा कि इस रिजॉल्युशन के लिए 616.45 करोड़ के शेयर बेस में से 50,818 शेयर्स ने वोट किया। इनमें से लगभग 98.5 फीसदी वोट रिजॉल्यूशन के पक्ष में पड़े, जबकि 1.48 फीसदी वोट इसके खिलाफ पड़े।

 

 

मिलेगी कितनी सैलरी और क्या सुविधाएं

रिजॉल्यूशन के मुताबिक अंबानी को एनुअल सैलरी 4.17 करोड़ और सुविधाएं व अलाउंसेस के तौर पर 59 लाख रुपए मिलेंगे। वेतन की कुल सीमा में रिटायरमेंट बेनिफिट्स शामिल नहीं किए गए हैं। वह नेट प्रॉफिट के आधार पर बोनस पाने के भी पात्र होंगे। कंपनी ने कहा कि अंबानी को बिजनेस ट्रिप के दौरान स्पाउस और अटेंडैंट की ट्रैवलिंग, बोर्डिंग और लॉजिंग का खर्च मिलेगा। साथ ही उनके लिए बिजनेस के दौरान इस्तेमाल की गईं कारों का भी प्रोविजन किया गया है और घर में कम्युनिकेशन पर होने वाले खर्च का वास्तविक भुगतान भी किया जाएगा।

 

 

सुरक्षा पर होने वाला खर्च सुविधाओं में शामिल नहीं

एजीएम में रखे गए रिजॉल्युशन के मुताबिक, ‘मुकेश अंबानी और उनके फैमिली मेंबर्स को मिलने वाली सुरक्षा पर होने वाले खर्च को सुविधाओं के तौर पर नहीं लिया जाएगा और इसलिए उसे वेतन की गणना में इस्तेमाल नहीं किया गया है।’

 

 

2012 में सीएमडी बने थे मुकेश अंबानी

6 जुलाई, 2012 को धीरूभाई अंबानी की मृत्यु के बाद मुकेश अंबानी को आरआईएल का सीएमडी नियुक्त किया गया था, जबकि छोटे भाई अनिल अंबानी को वाइस चेयरमैन व एमडी बनाया गया था। दोनों भाई 2005 में अलग हो गए और पिता द्वारा खड़े किए गए बिजनेस का बंटवारा हो गया था।

 

 

20 हजार करोड़ रुपए जुटाने को मिली मंजूरी

रेग्युलेटरी फाइलिंग के मुताबिक एजीएम में शेयरहोल्डर्स ने आरआईएल को नॉन कन्वर्टिबल डिबेंचर (एनसीडी) के माध्यम से 20,000 करोड़ रुपए जुटाने की भी मंजूरी मिल गई है। हालांकि कंपनी ने यह नहीं बताया कि इस फंड को कहां पर इस्तेमाल किया जाएगा।

 

 

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