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खास खबरः मोदी भी नहीं बदल पाए भारतीयों की पसंद, गोल्ड का ऐसा है जादू

नई दिल्ली.  फाइनेंशियल ईयर 2018 में स्टॉक मार्केट में रिकॉर्ड तेजी के बावजूद गोल्ड के प्रति भारतीयों का लगाव कम नहीं हो रहा है। बीते साल गोल्ड के इम्पोर्ट में करीब 300 टन का इजाफा हुआ। यह आंकड़ा इसलिए भी हैरत में डालता है, क्योंकि गोल्ड ने जहां एक साल में महज 6 फीसदी रिटर्न दिया जबकि स्टॉक मार्केट के बेंचमार्क इंडेक्स ने इससे दोगुना यानी 12 फीसदी रिटर्न दिया। ऐसे में सवाल उठता है कि कम रिटर्न देने के बावजूद भारत में गोल्ड की बिक्री क्यों बढ़ रही है। हम इस खास खबर में आपको बता रहे हैं कि गोल्ड क्यों लोगों का पसंदीदा निवेश बना हुआ है ....

 

कारगर नहीं रहे मोदी के ये कदम

कहा जाता है कि भारतीय घरों में करीब 22,000 टन गोल्ड है। सरकार को गोल्ड के इंपोर्ट के एवज में बड़ी मात्रा में फॉरेन करंसी चुकानी पड़ती है। यही वजह है कि ट्रेड डेफिसिट में गोल्ड की बड़ी हिस्सेदारी है। इसमें कमी लाने के लिए सरकार गोल्ड मोनेटाइजेशन स्कीम लेकर आई थी। इसमें भारतीय घरों में रखा पैसा जमा करके रिटर्न हासिल कर सकते थे और सरकार इंपोर्ट में कमी के लिए उस गोल्ड का यूज करने की योजना थी।  

-इसके अलावा मोदी सरकार गोल्ड के इंपोर्ट को हतोत्साहित करने के लिए लगाई गई इंपोर्ट ड्यूटी को हटाने से इनकार कर चुकी है।

-वहीं सरकार गोल्ड बॉन्ड स्कीम भी ला चुकी है, जिसमें निवेश करके अच्छा रिटर्न हासिल किया जा सकता है। हालांकि मोदी सरकार की यह स्कीम कारगर नहीं रहीं और इंपोर्ट लगातार बढ़ताा जा रहा है।

 


क्यों नहीं पड़ रही गोल्ड की चमक फीकी

रतनचंद ज्वालानाथ ज्वैलर्स के मालिक तरुण गुप्ता ने कहा कि अपने देश में लोग गोल्ड को एक सुरक्षित एसेट के रूप में देखते हैं। मुश्किल वक्त में गोल्ड को आसानी से बेचा जा सकता है, इसीलिए इसकी डिमांड कम नहीं हो रही है। वहीं शादी-विवाह, त्योहारों और खुशी के अन्य मौकों पर गोल्ड खरीदने की परंपरा है। यही वजह है कि लोगों की इसमें दिलचस्पी कम नहीं हुई है।

केडिया कमोडिटी के डायरेक्टर अजय केडिया के मुताबिक, जियोपॉलिटिकल टेंशन, डॉलर में कमजोरी और अमेरिका, यूरोप समेत भारतीय इकोनॉमी में सुस्ती की वजह से गोल्ड की डिमांड बढ़ रही है।  उन्होंने कहा फाइनेंशियल ईयर 2018 में अमेरिका और नॉर्थ कोरिया में जियोपॉलिटिकल टेंशन बढ़ने से सेफ हेवन के रूप में गोल्ड में निवेश बढ़ गया। अमेरिका और चीन के बीच ट्रेड वॉर के बाद अनिश्चितता बढ़ी है, जिसकी वजह सोने की कीमतों में उछाल आया है। उन्होंने कहा कि गोल्ड फिर से सुरक्षित निवेश बन सकता है।

 

गोल्ड ने 6 फीसदी तो स्टॉक मार्केट ने दिया 12% रिटर्न

एंजेल ब्रोकिंग कमोडिटी के डिप्टी वाइस प्रेसिंडेंट अनुज गुप्ता ने कहा, फाइनेंशियल ईयर 2018 में बाजार में निवेश के अन्य विकल्पों में स्टॉक मार्केट में 12 फीसदी रिटर्न मिला है। यहां निवेशकों ने एक साल में 21 लाख करोड़ रुपए की कमाई की है। वहीं बैलेंस्ड म्युचुअल फंड के कुछ स्कीमों 20 फीसदी से ज्यादा रिटर्न मिला है। फाइनेंशियल ईयर 2017-18 में अप्रैल से फरवरी के बीच म्‍युचुअल फंड में 2.94 लाख करोड़ रुपए का निवेश आया है। यह किसी भी साल में हुआ सबसे ज्‍यादा निवेश है। इसके विपरीत गोल्ड में एक साल सिर्फ 6 फीसदी का ही रिटर्न मिला है।

 

दुनिया में लगातार 5वें साल बढ़ा गोल्ड में इन्वेस्टमेंट 

साल 2018 में दुनिया में लगातार 5वें साल गोल्ड में इन्वेस्टमेंट बढ़ा है। बुलियन इन्वेस्टर्स, माइनर्स और क्वाइन मेकर्स की वजह से गोल्ड में डिमांड बढ़ी है। देश में गोल्ड की फिजिकल डिमांड ज्यादा है। वहीं दूसरे देशों में लोग गोल्ड को इन्वेस्टमेंट के तौर पर देखते हैं और पैसा लगाते हैं। 

 

आगे पढ़ें-कैसी रहेगी गोल्ड की चाल

 

 

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