Mutual funds ने जनवरी में शेयर बाजार में लगाए 7 हजार करोड़, FPIs ने की बड़ी बिकवाली

म्युचुअल फंड (Mutual fund) हाउसेस ने जनवरी में शेयर बाजार (Share Bazaar) में 7,000 करोड़ रुपए से ज्यादा का निवेश किया। हालांकि फॉरेन इन्वेस्टर्स (foreign portfolio investors) ने बड़े स्तर पर पैसा निकाला, जिन्होंने 5,200 करोड़ रुपए की बिकवाली की। एक्सपर्ट्स का मानना है कि FPIs की भारतीय शेयर बाजार में बिकवाली से म्युचुअल फंड (mutual fund) मैनेजर्स  को निवेश का मौका मिला है।

moneybhaskar

Feb 05,2019 05:17:00 PM IST

नई दिल्ली. म्युचुअल फंड (Mutual fund) हाउसेस ने जनवरी में शेयर बाजार (Share Bazaar) में 7,000 करोड़ रुपए से ज्यादा का निवेश किया। हालांकि फॉरेन इन्वेस्टर्स (foreign portfolio investors) ने बड़े स्तर पर पैसा निकाला, जिन्होंने 5,200 करोड़ रुपए की बिकवाली की। एक्सपर्ट्स का मानना है कि FPIs की भारतीय शेयर बाजार में बिकवाली से म्युचुअल फंड (mutual fund) मैनेजर्स को निवेश का मौका मिला है।

रिटेल इन्वेस्टर्स का एसआईपी पर भरोसा

सेबी (Sebi) और डिपॉजिट्रीज से मिले डाटा के मुताबिक, फंड मैनेजर्स ने पिछले महीने 7,160 करोड़ रुपए के शेयरों की खरीददारी की। वहीं, FPIs ने शेयर बाजार से 5,264 करोड़ रुपए निकाले। मार्केट एक्सपर्ट्स ने कहा कि फंड मैनेजर्स द्वारा शेयर बाजार में निवेश का श्रेय रिटेल इन्वेस्टर्स को दिया जा सकता है, जिन्होंने सिस्टमैटिक इन्वेस्टमेंट प्लान (systematic investment plan) यानी SIP के माध्यम से निवेश जारी रखा है। फंड हाउसेस का मानना है कि SIP रूट के माध्यम से फंड का प्रवाह जारी रहने के अनुमान को देखते हुए आने वाले महीनों में यह ट्रेंड जारी रह सकता है।

क्या है एसआईपी

एसआईपी (SIP) निवेश का एक ऐसा माध्यम से है, जिससे निवेशक छोटी मात्रा में लगातार निवेश जारी रखते हैं। निवेश आम तौर पर साप्ताहिक, मासिक या तिमाही आधार पर किया जाता है। यह काफी हद तक रिकरिंग डिपॉजिट (recurring deposit) की तरह है, जहां निवेशक हर महीने छोटी या एक निश्चित रकम जमा करते हैं।

आम चुनाव पर है विदेशी निवेशकों की नजर

शेयर बाजार में विदेशी निवेशकों यानी FPIs की बिकवाली इस बात का संकेत है कि वे आम चुनाव (general elections) से पहले ‘देखो और प्रतीक्षा करो’ की स्ट्रैटजी को फॉलो कर रहे हैं। मॉर्निंगस्टार इन्वेस्टमेंट एडवाइजर इंडिया के सीनियर एनालिस्ट मैनेजर (रिसर्च) हिमांशु श्रीवास्तव ने कहा कि FPIs भारत को लेकर सतर्क बने हुए हैं या ‘देखो और प्रतीक्षा करो’ की नीति को अपना रहे हैं, जिनका लंबे समय से यही रुख बना हुआ है।
उन्होंने कहा कि निवेशकों का फोकस आगे भी इकोनॉमिक ग्रोथ और आम चुनावों पर बना रहेगा।

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