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खास खबर: 5 साल में ट्रिपल हुआ MF, क्‍या है छोटे निवेश से बड़ी इनकम का फॉर्मूला

म्‍यूचुअल फंड की पहुंच भले ही अभी देशभर में न हो, लेकिन बीते कुछ साल में इसका विस्‍तार हुआ है।

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नई दिल्‍ली. सुरक्षित निवेश के साथ अधिक रिटर्न के एक विकल्‍प पर जब एक शहरी या कस्‍बाई निवेशक सोचता है तो अब वह अमूमन म्‍यूचुअल फंड की बात करता है। हाल के कुछ सालों में यह रुझान दिखाई दिया है। म्‍यूचुअल फंड की पहुंच भले ही अभी देशभर में न हो, लेकिन बीते कुछ साल में इसका विस्‍तार हुआ है। नतीजा यह रहा है कि इसमें निवेश पहली बार 23 लाख करोड़ के पार चला गया। इस बीच, एक सवाल पर यह बहस आम है कि बैंक, पोस्‍ट ऑफिस, शेयर बाजार के मुकाबले आखिर म्‍युचूअल फंड की क्‍या ऐसी खासियत है, जिसके चलते उसके निवेशकों का ग्रॉफ तेजी से बढ़ा। इंडस्‍ट्री के जानकार मानते हैं पिछले कुछ सालों से ब्‍याज दरों में गिरावट, रियल स्‍टेट में मंदी के अलावा नोटबंदी जैसे कारणों ने निवेशकों खासकर छोटे इन्‍वेस्‍टर्स को आकर्षित किया। वहीं, ‘म्‍युचुअल फंड सही है’ अभियान ने भी इसकी पहुंच छोटे शहरों तक पहुंचाने में मदद की।

   

क्‍यों बढ़ रहा म्‍यूचुअल फंड में निवेश?

 

1. गिरती ब्‍याज दरों ने लोगों को किया आकर्षित

वैल्‍यू रिसर्च के सीईओ धीरेन्‍द्र कुमार के अनुसार वैसे तो कई कारण हैं, जिन्‍होंने म्‍युचुअल फंड इंडस्‍ट्री को विस्‍तार दिया। लेकिन इनके अनुसार ब्‍याज दरों में गिरावट, रियल स्‍टेट में मंदी और शेयर बाजार का अच्‍छा प्रदर्शन सबसे बड़े कारण हैं। इनका कहना है कि अब लोग काफी समझदार हैं, और अपने फायदे की बात आसानी से समझ लेते हैं। यही कारण है कि जैसे ही ‘म्‍युचुअल फंड सही है’ जैसे अभियान चला छोटे शहरों में इसकी पहुंच बढ़ने लगी। इनके अनुसार देश में म्‍युचुअल फंड इंडस्‍ट्री को काम करते 50 साल से ज्‍यादा हो गए हैं। देश में लाखों लोग ऐसे हैं जिनको यहां पर निवेश पर फायदा मिला है। अब यह यह बात उनके जानने वालों को भी पता चलने लगी है। यही कारण है कि यह इंडस्‍ट्री तेजी से आगे बढ़ रही है।

 

 

2.  नोटबंदी के बाद से हुआ तेज विस्‍तार

च्‍वाइस ब्रोकिंग के प्रेसीडेंट अजय केजरीवाल के अनुसार नोटबंदी और ‘म्‍युचुअल फंड सही है’ जैसे अभियान ने लोगों को काफी जागरूक किया है। उनके अनुसार नोटबंदी के बाद निवेश के मौके कम हुए हैं। अब रियल स्‍टेट और गोल्‍ड में उतना फायदा नहीं और जितना स्‍टॉक मार्केट लगातार दे रहा है। यही कारण रहा है कि पिछले कुछ सालों से म्‍युचुअल फंड में निवेश दिन दूना रात चौगुनी तेजी से बढ़ रहा है। म्‍युचुअल कंपनियां भी अपनी स्‍कीम्‍स को बेचने में सही तरीका अपना रही हैं। वह एक बार में निवेश की जगह हर माह छोटी छोटी रकम लगाने को कह रही हैं। लेकिन जैसे ही निवेश के बाद इन्‍वेस्‍टर को फायदा हो रहा है वह अपना निवेश बढ़ाता जा रहा है। यही कारण है कि हर माह SIP के माध्‍यम से निवेश की राशि बढ़ रही है। यह राशि जहां अप्रैल 2017 में 4 हजार करोड़ रुपए से ज्‍यादा थी, वहीं फरवरी 2018 आते-अाते 6 हजार करोड़ रुपए हो गई।

 

3. स्‍टॉक मार्केट की तेजी ने दिया साथ

फाइनेंशियल एडवाइजर फर्म बीपीएन फिनकैप के डायरेक्‍टर एके निगम के अनुसार स्‍टॉक मार्केट 2008 के बाद से लगातार अच्‍छा रिटर्न दे रहा है। यही कारण है कि ज्‍यादातर इक्विटी म्‍युचुअल फंड रिटर्न काफी अच्‍छे हैं। ढेरों ऐसे फंड हैं जिनका रिटर्न एक साल से ज्‍यादा में 20 फीसदी वार्षिक (CAGR) है। ऐसे में अगर किसी ने निवेशकों को पैसा 4 साल में ही दोगुना हुआ है। एक तरफ इतना अच्‍छा रिटर्न दूसरी तरफ घटती ब्‍याज दरें, यही कारण है कि पिछले कुछ सालों में इस इंडस्‍ट्री में निवेश तेजी से बढ़ा है।

 

 

ऐसे बन जाता है 500 रुपए महीने का निवेश 1 लाख रुपए

इक्विटी म्‍युचुअल फंड की ज्‍यादातर स्‍कीम्‍स का रिटर्न बैंक FD से अच्‍छा रहा है। अगर निवेश 500 रुपए महीने का निवेश 10 तक करता रहे और उसे 12 फीसदी का वार्षिक रिटर्न ही मिले तो 1.17 लाख रुपए का फंड तैयार हो जाता है। वहीं 20 साल निवेश बना रहे तो यह फंड 4.84 लाख रुपए का हो जाएगा। लेकिन अगर कोई निवेशक इस निवेश को 30 साल तक करता रहे तो 16.21 लाख रुपए का फंड तैयार हो जाएगा।

   

पिछले 5 साल में तीन गुना बढ़ी इंडस्‍ट्री

म्‍युचुअल फंड के आंकड़े जारी वाली संस्‍था एसोसिएशन ऑफ म्‍युचुअल फंड (एम्‍फी) के अनुसार पिछले 5 साल में म्‍युचुअल फंड इंडस्‍ट्री एसेट अंडर मैनेजमेंट (AUM) तीन गुना से ज्‍यादा हो गया है। जहां मार्च 2013 में AUM 7.01 लाख करोड़ रुपए था, वहीं यह मार्च 2018 को 23 लाख करोड़ रुपए के पार निकल गया है। वैसे इस इंडस्‍ट्री ने पहली बार 10 लाख करोड़ रुपए का आंकड़ा मई 2014 में पार किया था।

 

आंकड़ों पर नजर

 

-मार्च 13 में AMU 7.01 लाख करोड़ रुपए

 

-मार्च 14 में AMU 9.05 लाख करोड़ रुपए

 

-मार्च 15 में AMU 11.88 लाख करोड़ रुपए

 

-मार्च 16 में AMU 13.53 लाख करोड़ रुपए

 

-मार्च 17 में AMU 18.29 लाख करोड़ रुपए

 

-मार्च 18 में AMU 23.05 लाख करोड़ रुपए



 

7 करोड़ हुई फोलियो की संख्‍या

म्‍युचुअल फंड में हर निवेश को एक फोलियो करते हैं। इनकी संख्‍या फरवरी 2017 तक बढ़कर 6.99 करोड़ हो गई है। जानकारों के अनुसार एक निवेशक के एक से ज्‍यादा फोलियो हो सकते हैं, लेकिन उनका मानना है कि नए निवेशकों की संख्‍या तेजी से बढ़ी है। उनके अनुसार इस काम में सबसे ज्‍यादा मदद सिस्‍टेमैटिक इन्‍वेस्‍टमेंट प्‍लान (SIP) ने की है। देश में इस वक्‍त 2.05 करोड़ SIP अकाउंट चल रहे हैं, जो एक रिकॉर्ड है।



 

वर्ष 2017-18 में SIP माध्‍यम से आया निवेश

 

महीना

SIP से आया निवेश

फरवरी 2018

6,425 करोड़ रुपए

जनवरी 2018

6,644 करोड़ रुपए

दिसबंर     2017

6,222 करोड़ रुपए

नवंबर      2017

5,893 करोड़ रुपए

अक्‍टूबर 2017

5,621 करोड़ रुपए

सितंबर 2017

5,516 करोड़ रुपए

अगस्‍त 2017

5,206 करोड़ रुपए

जुलाई     2017

4,947 करोड़ रुपए

जून     2017

4,744 करोड़ रुपए

मई     2017

4,584 करोड़ रुपए

अप्रैल     2017

4,269 करोड़ रुपए

 

नोट : आंकड़े एम्‍फी की साइट से लिए गए हैं।




 

आगे पढ़ें : देश में म्‍युचुअल फंड का 54 साल का सफर



 

 


 
 

 

कई सालों तक अकेली म्‍युचुअल फंड कंपनी थी UTI

 

देश में म्‍युचुअल फंड की शुरुआत UTI से हुई, जब संसद में एक एक्‍ट के तहत इसकी स्‍थापना की गई। उस समय इसकी देखरेख भारतीय रिजर्व बैंक के हाथ में थी, लेकिन बाद में यह जिम्‍मा IDBI को सौंपा गया। देश में पहली स्‍कीम यूनिट स्‍कीम 1964 थी। 1988 तक यही कंपनी देश में म्‍युचुअल फंड का संचालन कर रही थी और इसके पास 6700 करोड़ रुपए आसेट थी।

 

सरकारी बैंकों को मिली इंट्री

देश में यूटीआई की स्‍कीम्‍स की लोकप्रियता को देखते हुए सरकार ने इसे बढ़ावा देने का फैसला किया। इसके बाद 1987-1993 के बीच कई सरकारी बैंकों और वित्‍तीय संस्‍थानों को मौका दिया गया। SBI ने इस काम की पहल संभाली और यूटीआई के बाद पहली म्‍युचुअल फंड कंपनी इसी ने बनाई। इसकी स्‍थापना 1987 में हुई। इसके बाद कैनबैंक म्‍युचुअल फंड (दिसंबर 87), पंजाब नैशनल बैंक म्‍युचुअल फंड (अगस्‍त 89), इंडियन बैंक म्‍युचुअल फंड (नवंबर 89), बैंक ऑफ इंडिया (जून 90), बैंका ऑफ बड़ौदा म्‍युचुअल फंड (अक्‍टूबर 92) और LIC म्‍युचुअल फंड (जून 1989) ने काम शुरू किया। तेजी से म्‍युचुअल फंड कंपनियों के बढ़ने का फायदा मिला और इनकी कुल आसेट अंडर मैनेजमैंट (AMU) 1993 में 47,004 करोड़ रुपए हो गई।



 

निजी क्षेत्र को 1993 में मिला मौका

म्‍युचुअल फंड क्षेत्र में ढेरों संभावनाओं को देखते हुए सरकार ने तय किया निजी क्षेत्र को इस सेक्‍टर में प्रवेश दिया जाए। इसी के साथ चिंता हुई कि निजी कंपनियों जनता के पैसों से खिलवाड़ कर सकती हैं। इसी को देखते हुए देश में पहली बार यूटीआई को छोड़ कर सभी म्‍युचुअल फंड कंपनियों को 1993 में एक रेग्‍युलेटर के अंतर्गत लाया गया। ये रेग्‍युलेटर सेबी था, जो आज भी इन सेक्‍टर को रेग्‍युलेट कर रहा है। इसी साल में देश की पहली म्‍युचुअल फंड कंपनी कोठारी पॉयनियर को लाइसेंस मिला जिसका बाद में फ्रैंकलिन में विलय हो गया। बाद में मार्च 2000 में यूटीआई को सरकार ने दो हिस्‍सों में बांट दिया एक यूटीआई म्‍युचुअल फंड के नाम से आज भी काम कर रहा है।  

 

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