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इस कंपनी का एक शेयर भी खरीदने पर छूट जाएं पसीने, कभी गुब्‍बारे बेचता था इसका मालिक

आइए जानते हैं उन्होंने कैसे इस कंपनी की शुरुआत की....

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नई दिल्ली.  टायर मैन्युफैक्चरिंग कंपनी MRF का शेयर 80,000 रुपए का हो गया है। यह देश का पहला स्टॉक है जिसने 80 हजार के स्तर को छुआ है। इसकी कीमत इतनी कि एक आम आदमी को एक शेयर भी खरीदने में पसीने छूट जाएं। आपको जानकर हैरानी होगी कि एमआरएफ टायर की नींव रखने वाले के.एम मेनन मैपिल्लई कभी गुब्बारा बेचने का काम करते थे। लेकिन अपने लगन और हिम्मत के दम पर एमआरएफ जैसी कंपनी खड़ी की थी। आइए जानते हैं उन्होंने कैसे इस कंपनी की शुरुआत की....

 

80 हजार का हुआ एक स्टॉक

एमआरएफ का स्टॉक 79,795.95 रुपए के भाव पर खुला था और आधे घंटे के कारोबार में स्टॉक 0.38 फीसदी बढ़कर 80,099.95 रुपए पर पहुंच गया, जो यह ऑलटाइम हाई है। वहीं एनएसई पर स्टॉक ने 80,100 का हाई बनाया।

 

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ऐसे आया टायर कंपनी बनाने का आइडिया

 

एमआरएफ टायर यानी मद्रास रबर फैक्ट्री आज टायर इंडस्ट्री में बड़ा नाम है, लेकिन एक दौर था जब इस कंपनी को शुरू करने वाले शख्स मैपिल्लई ने सड़कों पर बैलून बेचे थे। मैपिल्लई आजादी से पहले केरल की सड़कों पर पैदल घूमकर एक बैग में गुब्बारा रखकर बेचा करते थे। मैपिल्लई के पिता ने आजादी की लड़ाई में हिस्सा लिया था और जेल भी गए थे। मैपिल्लई के पिता जब जेल में थे तो वह गुब्बारा बेचकर परिवार चलाया करते थे औऱ साथ में पढ़ाई भी करते थे।

 

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ऐसे बनाई टायर कंपनी

 

मैपिल्लई ने ग्रेजुएशन भी टायर मैन्युफैक्चरिंग में ही की और फिर करीब 6 साल तक गुब्बारे का कारोबार करने के बाद 1946 में ट्रीड रबर बनाना शुरू कर दिया। 24 साल की उम्र में ही मैपिल्लई ने बिजनेस शुरू कर दिया था। शुरुआत में एक छोटे से कमरे में गुब्बारे और बच्चों के खिलौने बनाने वाले मैपिल्लई अब रबर और टायर के बिजनेस में आ गए थे।
 
खिलौने से टायर का सफर
 मैपिल्लई ने 1960 में प्राइवेट लिमिडेट कंपनी बनाई। उनको रबर और टायरों के बारे अच्छी जानकारी थी। प्राइवेट लिमिटेड कंपनी बनाने के बाद मैपिल्लई ने टायर बनाने के लिए अमेरिका की मैंसफील्ड टायर एंड रबर कंपनी के साथ टाईअप किया। 1967 में एफआरएफ अमेरिका को एक्सपोर्ट करने वाली पहली कंपनी बन गई, तो वहीं 1973 में कंपनी ने देश में पहली बार नायलान टायर लॉन्च किया। साल 1979 तक कंपनी का नाम विदेश में फैल चुका था, लेकिन इसी साल अमेरिकी कंपनी मैंसफील्ड ने एफआरएफ से अपनी हिस्सेदारी खत्म कर ली। इसके बाद कंपनी का नाम एमआरएफ लिमिटेड हो गया। इसके बाद मैपिल्लई ने छोटी-बड़ी कई कंपनियों के साथ टाईअप कर कंपनी को एक नए मुकाम पर पहुंचाया। साल 2003 में 80 साल की उम्र में मैपिल्लई का निधन हो गया। लेकिन मैपिल्लई तब तक कंपनी को टायर के फील्ड में नंबर वन बना दिया।

 

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5 साल में दिया 550% रिटर्न

- मैपिल्लई के जाने के इनके बेटों ने बिजनेस की कमान संभाली और कंपनी लगातार ग्रोथ करती रही। यह मेमन की हिम्मत और उनके बेटों की काबिलियत ही है कि आज एमआरएफ 34 हजार करोड़ की कंपनी बन चुकी है। इसके एक शेयर की कीमत 80100 हजार रुपए है, जो भारत में सबसे ज्यादा है।
- पिछले 5 साल में एमआरएफ के स्टॉक ने 550% रिटर्न दिया है। 17 अप्रैल 2013 को स्टॉक की वैल्यू 12,306.55 रुपए थी, जो पांच साल में 550% बढ़कर 80,099.95 रुपए हो गई है। यानी जिन इन्वेस्टर्स ने 5 साल पहले एफआरएफ में 1 लाख रुपए इन्वेस्ट किए होंगे, उनके 1 लाख अब 5.50 लाख बन गए होंगे। इस साल जनवरी से अभी तक एमआरएफ के स्टॉक में 10 की बढ़ोतरी दर्ज की गई है।

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