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माल्या जिस कंपनी की वजह से हुए बर्बाद, फिर भरेगी उड़ान

एक समय 'किंग ऑफ गूड टाइम्स' कहे जाने वाले माल्या जिस कंपनी की वजह से बर्बाद हुए, वो अब फिर से उड़ान भरने वाली है।

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नई दिल्ली. 9 हजार करोड़ रुपए के फ्रॉड और मनी लॉन्ड्रिंग के आरोप में वांटेड विजय माल्या के प्रत्यर्पण के लिए ब्रिटेन की अदालत में सुनवाई चल रही है। एक समय 'किंग ऑफ गूड टाइम्स' कहे जाने वाले माल्या जिस कंपनी को खरीद कर बर्बाद हुए, वो अब फिर से उड़ान भरने वाली है।

 

 

इस गलती ने कर दिया माल्या को बर्बाद

 

माल्या ने 2007 में देश की पहली लो कॉस्ट एविएशन कंपनी एयर डेक्कन का अधिग्रहण किया था। इसके लिए 30 करोड़ डॉलर की भारी रकम खर्च की गई, जो उस समय लगभग 1,200 करोड़ रुपए (2007 में 1 डॉलर लगभग 40 रुपए के बराबर था) के बराबर थी। हालांकि, कंपनी एयर डेक्कन को खरीदने के पीछे के लक्ष्य को हासिल नहीं कर पाई और उसकी ऊंची कॉस्ट की समस्या जस की तस बनी रही। आर्थिक वजहों से 2012 में इसका संचालन रोक दिया गया। अब एक बार फिर रिजनल कनेक्टिविटी स्कीम (आरसीएस) के तहत इसे शुरू किया जा रहा है।

 

1400 रुपए का होगा टिकट

 

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने शुरू की हुई उड़ान योजना के तहत नासिक से मुंबई के लिए विमान सेवा 23 दिसंबर से शुरू होने वाली है। इसका ट्रायल 20 दिसंबर को लिया जाएगा। 40 मिनट के इस सफर के लिए 1400 रुपए का टिकट होगा। लकी पैसेंजर्स को सिर्फ 1 रुपए में सफर करने का मौका मिलेगा।

 

इन शहरों में शुरू होगी सेवा


उड़ान मुंबई, दिल्ली, कोलकाता और शिलॉन्ग के लिए शुरू होने जा रही है जो कि इनके आस-पास के शहर को जोड़ेंगे। सरकारी की योजना के अनुसार उड़ान का किराया एक घंटे के सफर के लिए 2,500 होगा। नासिक-मुबंई फ्लाइट का किराया 1,400 रुपए से शुरू होगा। जनवरी तक नई उड़ानें शुरू हो जाएंगी जो दिल्ली से आगरा, शिमला, लुधियाना, पंतनगर, देहरादून और कुल्लू को जोड़ेंगी। 

 

आगे पढ़ें- कैसे फेल हो गई माल्या की स्ट्रैटजी

इस तरह फेल हो गई माल्या की स्ट्रैटजी
 
माल्या भले ही एयर डेक्कन को खरीदने में कामयाब रहे, लेकिन उनकी इसके माध्यम से किंगफिशर को मजबूती देने की स्ट्रैटजी बुरी तरह फेल हो गई। बाद में माल्या ने दोनों एयरलाइंस का विलय कर दिया और फिर एयर डेक्कन का नाम बदलकर किंगफिशर रेड हो गया, जो प्रीमियम सेवाओं के साथ ही लो कॉस्ट सेवाएं भी देने लगी। इस प्रकार कंपनी एक ही ब्रांड किंगफिशर के तहत लो कॉस्ट और प्रीमियम सेवाएं दोनों देने लगी।
भारत में लो कॉस्ट एविएशन मॉडल को लाने वाले और एयर डेक्कन के संस्थापक कैप्टन गोपीनाथ ने एक मीडिया रिपोर्ट में कहा था, 'माल्या का एक ब्रांड का फैसला संभावित तौर पर अच्छा था, लेकिन उन्हें सभी घरेलू सेवाओं को लो-कॉस्ट और अंतरराष्ट्रीय सेवाओं को प्रीमियम रखना चाहिए था।' गोपीनाथ के मुताबिक, एक ब्रांड की दोनों सेवाओं में ज्यादा अंतर भी नहीं था, बस तभी से समस्याएं पैदा होने लगीं। 

 

आगे पढ़ें- किंगफिशर पर कैसे पड़ी दोहरी मार

लो कॉस्ट सर्विस की ओर जाने लगे ग्राहक
 
गोपीनाथ के मुताबिक, इस तरह अप्रत्यक्ष रूप से किंगफिशर की दोनों सर्विसेज के बीच अपने मौजूदा कस्टमर बेस को छीनने के लिए होड़ होने लगी। इससे किंगफिशर पर दोहरी मार पड़ी। पहली किंगफिशर के इकोनॉमी पैसेंजर्स ने किंगफिशर रेड की ओर रुख करना शुरू कर दिया, जहां सुविधाएं काफी हद तक समान थीं, लेकिन कॉस्ट कम थी। लेकिन जब माल्या ने किंगफिशर रेड के किराये को बढ़ाने का फैसला किया तो कस्टमर इंडिगो या स्पाइसजेट जैसी लो कॉस्ट एयरलाइंस की ओर रुख करने लगे।
 
आगे पढ़ें- आखिरकार कैसे बंद हो गई किंगफिशर एयरलाइंस

आखिरकार बंद हो गई किंगफिशर

 

गोपीनाथ के मुताबिक, माल्या ने एक और गलत फैसला लिया। उन्होंने कहा, 'माल्या ने एयर डेक्कन के साथ गोद लिए हुए बेटे की तरह व्यवहार किया। विलय के बाद माल्या को उम्मीद थी कि एयर डेक्कन के कस्टमर किंगफिशर की ओर रुख करेंगे, लेकिन इसका उलटा होने लगा। आखिर में एयर डेक्कन (किंगफिशर रेड) के कस्टमर दूसरी लो कॉस्ट एयरलाइंस की ओर रुख करने लगे।' इस प्रकार अक्टूबर 2012 में किंगफिशर एयरलाइंस बंद हो गई।

 

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