विजय माल्या के चलते सरकार बदल सकती है एक कानून, SEBI ने की डिमांड

विजय माल्या (Vijay Mallya) की वजह से देश का एक कानून जल्द बदल सकता है। दरअसल कैपिटल मार्केट रेग्युलेटर (markets regulator) सेबी (SEBI) ने सरकार ने कंपनी कानून (Companies Act) में संशोधन की मांग की है, जिससे सुनिश्चित हो सके कि उसके द्वारा अपात्र घोषित व्यक्ति को डायरेक्टर पद से हटा दिया जाए या उसे यह पद छोड़ना पड़े। ऐसे ही एक मामले में सेबी की कार्रवाई के बावजूद विजय माल्या लंबे समय तक डायरेक्टर पद छोड़ने से इनकार करता रहा।

moneybhaskar

Mar 04,2019 07:14:00 PM IST

नई दिल्ली. विजय माल्या (Vijay Mallya) की वजह से देश का एक कानून जल्द बदल सकता है। दरअसल कैपिटल मार्केट रेग्युलेटर (markets regulator) सेबी (SEBI) ने सरकार ने कंपनी कानून (Companies Act) में संशोधन की मांग की है, जिससे सुनिश्चित हो सके कि उसके द्वारा अपात्र घोषित व्यक्ति को डायरेक्टर पद से हटा दिया जाए या उसे यह पद छोड़ना पड़े। ऐसे ही एक मामले में सेबी की कार्रवाई के बावजूद विजय माल्या (Vijay Mallya) लंबे समय तक डायरेक्टर पद छोड़ने से इनकार करता रहा।

क्या कहता है कंपनी कानून

कंपनी कानून के तहत एक डायरेक्टर को उसी स्थिति में पद या ऑफिस छोड़ना होगा, जब उसे किन्हीं वजहों से एक कोर्ट या एक ट्रिब्यूनल के आदेश से अपात्र घोषित किया गया हो। हालांकि सिक्युरिटी एंड एक्सचेंज बोर्ड ऑफ इंडिया (Securities and Exchange Board of India) यानी सेबी के आदेश से ऐसा किया जाने का उल्लेख नहीं है। सेबी को भारत में लिस्टेड हजारों कंपनियों के बारे में आदेश देने का अधिकार है।

सेबी ने रखा यह प्रस्ताव

सेबी ने एक प्रस्ताव में कहा कि कंपनी कानून में यह स्पष्ट रूप से जिक्र होना चाहिए कि अगर उसके आदेश में संबंधित व्यक्ति अयोग्य करार दिया जाता है तो उसे तत्काल निदेशक पद छोड़ देना चाहिए। अधिकारियों ने कहा कि वित्त मंत्रालय ने प्रस्तावित संशोधन को लेकर सेबी से इस बारे में अपने निदेशक मंडल से मंजूरी प्राप्त करने तथा उसके बाद उसे कारपोरेट कार्य मंत्रालय को भेजने को कहा है। कंपनी कानून के लिये नोडल मंत्रालय कॉरपोरेट कार्य मंत्रालय है।

माल्या ने नहीं माना था सेबी का आदेश

अपने प्रस्ताव में सेबी ने 25 जनवरी 2017 के आदेश का जिक्र किया है। इस आदेश में नियामक ने माल्या और छह अन्य को किसी भी सूचीबद्ध कंपनी में अगले आदेश तक डायरेक्टर पद लेने से मना किया। सेबी ने यूनाइटेड स्प्रिट्स लि. में फंड के अवैध तरीके से स्थानांतरण की जांच के बाद आदेश दिया था। यह कंपनी माल्या के अगुवाई वाले कारोबारी समूह का हिस्सा थी जो अब अस्तित्व में नहीं है। इसे बाद में वैश्विक शराब कंपनी डिआजियो को बेच दिया गया। उसी आदेश में माल्या तथा अन्य को प्रतिभूति बाजार से प्रतिबंधित कर दिया गया था।

आदेश के बावजूद माल्या कई महीने तक बना रहा डायरेक्ट

हालांकि माल्या ने यूनाइटेड ब्रेवरीज तथा समूह की अन्य कंपनियों में निदेशक पद पर बने रहकर कई महीनों तक आदेश का अनुपालन नहीं किया। अंत में अन्य निदेशकों के दबाव पर वह अगस्त 2017 में निदेशक पद से हटे। कंपनी कानून में बदलाव के पीछे तर्क देतु हुए सेबी ने कहा कि सचाई यह है कि माल्या ने उसके आदेश का अनुपालन नहीं किया और इससे कानूनी समस्या उत्पन्न हुई। इससे यह सवाल उठा कि जब कोई निदेशक आदेश का पालन करने में नाकाम रहता है तो क्या सेबी के पास अपने आदेश को लागू करने का अधिकार है।

कंपनी कानून, 2013 की धारा 167 के तहत फिलहाल किसी व्यक्ति पर सेबी के निर्देश के तहत निदेशक के रूप में काम करने की पाबंदी , उसके पद छोड़ने का आधार नहीं बनती। इसी लिए सेबी ने कहा है कि धारा 197 को संशोधित कर इस मसले का समाधान किया जा सकता है।

X
COMMENT

Money Bhaskar में आपका स्वागत है |

दिनभर की बड़ी खबरें जानने के लिए Allow करे..

Disclaimer:- Money Bhaskar has taken full care in researching and producing content for the portal. However, views expressed here are that of individual analysts. Money Bhaskar does not take responsibility for any gain or loss made on recommendations of analysts. Please consult your financial advisers before investing.