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15 दिन में 1 लाख बने 1.50 लाख रु, यहां मिला इतना रिटर्न

Linde India के स्टॉक्स ने दिया एफडी से 170 गुना रिटर्न

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नई दिल्ली. यूं तो फिक्स्ड डिपॉजिट (Fixed Deposit) को निवेश का अच्छा सेफ ऑप्शन माना जाता है। हालांकि बीते 15 दिन में एक जगह पर निवेशकों को इतना रिटर्न मिला है, जिसके आगे एफडी जैसे ऑप्शन कहीं नहीं टिकते हैं। हम भारतीय शेयर बाजार में लिस्टेड Linde India के स्टॉक की बात कर रहे हैं, जिसने बीते 15 दिन में 50 फीसदी से ज्यादा रिटर्न दिया है। अगर इसकी तुलना एफडी से की जाए, तो यह 170 गुना होता है।

 

15 दिन में दिया 50 फीसदी रिटर्न

गौरतलब है कि लिंडे इंडिया के प्रमोटर्स कंपनी के स्टॉक को शेयर बाजार से डीलिस्ट कराने की योजना का ऐलान किया है। इसके माध्यम से प्रमोटर्स कंपनी की पूरी ओनरशिप अपने हाथों में लेना चाहते हैं। इस खबर से सोमवार को स्टॉक 6 फीसदी बढ़कर 620 रुपए के स्तर तक पहुंच गया। बीते सिर्फ तीन दिनों में ही इस स्टॉक में 25 फीसदी तक बढ़त दर्ज की गई है। वहीं बीते 15 दिन में स्टॉक में 55 फीसदी तक चढ़ चुका है।

 

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एफडी से 170 गुना मिला रिटर्न

बैंक एफडी पर सालाना एवरेज 7 फीसदी के आसपास रिटर्न मिलता है। वहीं लिंडे इंडिया के स्टॉक ने 15 दिन में ही 50 फीसदी रिटर्न दिया है। इस हिसाब से कंपनी के स्टॉक ने 15 दिन में एफडी की तुलना में 170 गुना तक रिटर्न दिया है। हालांकि स्टॉक मार्केट में निवेश के अपने जोखिम भी होते हैं।

 

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(नोट- शेयर बाजार में निवेश के अपने जोखिम हैं, इसलिए सतर्कता जरूरी है।)

 

कंपनी ने किया यह ऐलान

लिंडे इंडिया ने एक रेग्युलेटरी फाइलिंग में कहा, ‘कंपनी को अपने प्रमोटर ग्रुप बीओसी ग्रुप से 7 नवंबर, 2018 को एक लेटर मिला। इसके माध्यम से प्रमोटर ने कंपनी के इक्विटी शेयर्स को वॉल्युंटरी डीलिस्टिंग ऑफर लाने की इच्छा जाहिर की है। इसके माध्यम से कंपनी पब्लिक शेयरहोल्डर्स से 25 फीसदी हिस्सेदारी खरीदने की पेशकश करेगी।’

गौरतलब है कि बीओसी ग्रुप, लिंडे ग्रुप का हिस्सा है और उसकी लिंडे इंडिया में 75 फीसदी हिस्सेदारी है। बीओसी ग्रुप के मुताबिक डीलिस्टिंग प्राइस रिवर्स बुक बिल्डिंग प्रोसेस के क्रम में तय किया जाएगा। ’

 
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खर्च होगा कम, विस्तार पर फोकस बढ़ाएगी कंपनी

बीओसी ग्रुप ने कहा कि इस डीलिस्टिंग ऑफर के माध्यम से वह कंपनी की पूरी हिस्सेदारी खरीदना चाहती है, जिससे प्रमोटर ग्रुप को कंपनी के बिजनेस और भविष्य की फाइनेंसिंग की जरूरतों को सपोर्ट करने में आसानी होगी। प्रमोटर्स ने कहा कि इससे कंपनी का बीएसई और एनएसई पर लिस्टिंग के मेंटेनेंस और इन्वेस्टर रिलेशन पर होने वाले खर्च में कमी आएगी। इसके साथ ही लिस्टिंग कंप्लायंस में लगने वाले समय की भी बचत होगी। इससे कंपनी विस्तार पर ज्यादा फोकस कर सकेगी।

 

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