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LIC-IDBI बैंक डील को IRDAI की मिली मंजूरी, 13 हजार करोड़ के निवेश के साथ बैंक में होगी 51% हिस्सेदारी

55,600 करोड़ रुपए के NPA के बोझ से जूझ रहे IDBI बैंक को मिलेगी मदद।

IRDAI board approves LIC proposal to take controlling stake in IDBI bank

 

नई दिल्‍ली. LIC के IDBI बैंक में निवेश बढ़ाने के प्रस्‍ताव को आज IRDAI की मंजूरी मिल गई। इसके बाद LIC बैंक में अपनी हिस्सेदारी बढ़ाकर 51 फीसदी कर सकेगी। जिसके लिए उसे करीब 13 हजार करोड़ निवेश करने होंगे। LIC के इस कदम से जहां अद्धसरकारी बैंक IDBI की बिगड़ती सेहत को बचाया जा सकेगा। वहीं LIC का लंबे समय से बैंक शुरू करने का सपना पूरा हो सकेगा। IRDAI की मंजूरी के बाद अब केंद्र सरकार कैबिनेट के जरिए इस प्रस्ताव को मंजूरी देगी। जिसके बाद पूरी डील को लागू किया जा सकेगा। 51 फीसदी हिस्सेदारी खरीदने के बाद भी बैंक का  LIC का मैनेजमेंट कंट्रोल नहीं होगा। सूत्रों के अनुसार एसबीआई के पूर्व एमडी एस.श्रीराम आईडीबीआई बैंक की कमान संभालेंगे।

 

 

ऐसी छूट पाने वाली पहली कंपनी बनी LIC

हैदराबाद में आज हुई बीमा क्षेत्र के रेग्‍युलेटर IRDAI बोर्ड बैठक में LIC के प्रस्‍ताव को मंजूरी दे दी गई। हालांकि यह प्रस्‍ताव बोर्ड बैठक के एजेंडे में शामिल नहीं था, लेकिन संभावना थी‍ कि इस पर चर्चा हो सकती है। अभी तक के नियमों के अनुसार कोई भी बीमा कंपनी किसी भी कंपनी में 15 फीसदी से ज्‍यादा हिस्‍सेदारी नहीं रख सकती है। इसके लिए उसे IRDAI से विशेष अनुमति लेनी होती है। अभी तक किसी भी बीमा कंपनी को ऐसी अनुमति नहीं दी गई, लेकनि अब LIC ऐसी पहली कंपनी हो गई है।

 

Irdai की वेबसाइट पर जारी होंगे मिनट्स 
LIC के प्रस्‍ताव को मंजूरी देने के बारे में पूछने पर Irdai के चेयरमैन सुभाष चंद्र खुंटिया ने कहा कि आप लोगों को जो भी फैसले लिए गए हैं सभी के बारे में जानकारी दी जाएगी। हम मीटिंग के मिनट्स को जैसे ही मंजूरी देंगे, इसे वेबसाइट पर अपलोड कर दिया जाएगा। 

 

दोनों को कारोबार बढ़ाने में मिलेगी मदद
इस डील से जहां LIC को IDBI बैंक की 2000 ब्रांच का सपोर्ट मिलेगा, जिससे वह अपना कारोबार बढ़ा सकेगा। वहीं IDBI बैंक को LIC के 22 करोड़ पॉलिसी होल्‍डर्स का सपोर्ट मिल सकता है। अगर ऐसा हुआ तो बैंक के पास काफी फंड आ जाएगा। 

 

LIC की है 11 फीसदी हिस्‍सेदारी

LIC की इस वक्‍त IDBI बैंक में 11 फीसदी हिस्‍सेदारी है। इसे 51 फीसदी तक ले जाने के लिए उसे 40 फीसदी हिस्‍सेदारी और खरीदनी पड़ेगी। अनुमान है कि LIC 10 से 13 हजार करोड़ रुपए में इस हिस्‍सेदारी को ले सकती है।


इस नियम के तहत मिली छूट

इंश्‍योरेंस एक्‍ट 2015 के अनुसार Irdai पॉलिसीधारकों के हित में बिना किसी पक्षपात विशेष मामलों में कुछ छूट दे सकती है। इसी नियम के तहत LIC को यह छूट दी गई है।

 

आईडीबीआई को क्यों बेचना पड़ी 51% हिस्सेदारी

वित्‍त मंत्रालय ने हाल ही में NPA से जूझ रहे सरकारी बैंकों के रिकैपिटलाइजेशन प्रोग्राम की घोषणा की थी। इसके तहत दो साल में 2.11 लाख करोड़ रुपए का बैंकों में निवेश किया जाना है। इस कार्यक्रम के तहत IDBI को सबसे ज्‍यादा 10,610 करोड़ रुपए दिया गया था। लेकिन इसके बाद भी बैंक के हालात में सुधार नजर नहीं आया। बैंक अभी भी RBI के प्रॉम्‍ट करेक्टिव एक्‍शन (PCA) के तहत है। इस दौरान बैंक कोई भी बड़ा कारोबारी फैसला नहीं ले सकता है। LIC से निवेश मिलने के बाद बैंक में सुधार का रास्‍ता खुल जाएगा।

 

एलआईसी को डील से नहीं मिलेगा खास फायदा

भारतीय स्‍टेट बैंक के रिटायर्ड सीजीएम सुनील पंत का कहना है कि आईडीबीआई बैंक के लिए यह डील बेलआउट की तरह है। आईडीबीआई बैंक का एनपीए लगभग 28 फीसदी तक पहुंच गया है और आने वाले समय में और बढ़ने की आशंका है। हालांकि इस डील से एलआईसी को तुरंत कोई खास फायदा नहीं होगा। एलआईसी अपने एजेंजी चैनल के जरिए पहले ही देश के तमाम दूरदराज इलाकों में पहुंच रखती है। ऐसे में आईडीबीआई बैंक उसे अपने बीमा कारोबार को बढ़ाने में कोई खास मदद नहीं मिलेगी।

 

आईडीबीआई बैंक के निवेशकों को होगा फायदा

फॉर्च्यून फिस्कल के डायरेक्टर जगदीश ठक्कर का कहना है कि एलआईसी की डील से आईडीबीआई बैंकों के निवेशकों को सबसे ज्यादा फायदा होगा। ऐसा पहली बार हुआ है जब कोई बीमा कंपनी डूबती बैंक को बचा रही है। उनके मुताबिक, एलआईसी के पास कैश ज्यादा है। एलआईसी अनेकों मौकों पर सरकार की साख बचाई है।

 

एलआईसी हमेशा बनी है सरकार की खेवनहार

एनके सिंह का कहना है कि आईडीबीआई बैंक एनपीए की वजह से सरकार के लिए नासूर बन गया था। बैंक में हिस्‍सेदारी खरीद कर एलआईसी ने उसे काफी हद तक राहत दी है। इससे पहले भी एलआईसी सरकार के अधिकतर विनिवेश कार्यक्रम को सफल बनाने में अहम भू‍मिका निभाती रही है। पीएसयू जनरल इन्‍श्‍योरेंस कंपनियों और पीएसयू बैंकों के अलावा दूसरी पीएसयू कंपनियों में भी एलआईसी की हिस्‍सेदारी है।

 

कस्‍टमर पर नहीं पड़ेगा कोई असर

एनके सिंह का कहना है कि एलआईसी की वित्‍तीय सेहत बहुत मजबूत है। ऐसे में इस डील से एलआईसी की सेहत पर कोई असर नहीं पड़ेगा। एलआईसी के पॉलिसी होल्‍डर पर भी इसका कोई असर नहीं होगा। इसका कारण यह है कि एलआईसी के पास इतना बड़ा कार्पस है कि 10 से 15,000 करोड़ से उसकी सेहत पर कोई असर नहीं पड़ने वाला।

 

एलआईसी ने क्‍यों खरीदी आईडीबीआई बैंक में हिस्‍सेदारी

ओरिएंटल इन्‍श्‍योरेंस कंपनी लिमिटेड के रिटायर्ड डीजीएम एनके सिंह ने moneybhaskar.com को बताया कि एलआईसी लंबे समय से अपना एक बैंक चलाना चाहती थी। इसके लिए उसने अपनी हाउ‍सिंग फाइनेंस कंपनी को बैंक में बदलने का प्रयास भी किया था। लेकिन इसके लिए उसे जरूरी मंजूरी नहीं मिली। एलआईसी बैंक के जरिए अपने कार्पस का इस्‍तेमाल करना चाहती है। एलआईसी के पास प्रीमियम के तौर पर बड़े पैमाने पर कैश आता है वह इस रकम को बैंक में बेहतर तरीके से इस्‍तेमाल किया जा सकता है।

 

LIC ने 350 प्लस कंपनियों में कर रखा है निवेश

-LIC ने स्‍टॉक मार्केट की करीब 350 से ज्‍यादा कंपनियों में निवेश कर रखा है।

-LIC ने स्‍टॉक मार्केट में करीब 5 लाख करोड़ रुपए का निवेश कर रखा है।

-सिर्फ वर्ष 2017-18 में LIC ने 1.4 लाख करोड़ रुपए का‍ निवेश किया है। इसमें 80 हजार करोड़ रुपए सीधा निवेश है, जबकि 60 -हजार करोड़ रुपए का निवेश सरकार के विनिवेश कार्यक्रम के तहत किया था।

-2017-18 में स्टॉक से मुनाफा बढ़कर 25 हजार करोड़ रुपए हुआ।

-वर्ष 2015-16 में 11 हजार करोड़ रुपए तो 2016-17 में 19 हजार करोड़ रुपए का मुनाफा हुआ था।

 

IDBI बैंक का तेजी से बढ़ा NPA

मार्च 2018 के तिमाही रिजल्‍ट के अनुसार IDBI बैंक का NPA तेजी से बढ़ा है। मार्च तिमाही में ग्रास NPA बढ़कर 27.95 फीसदी हो गया था, जो दिसबंर तिमाही में 24.72 फीसदी था। वहीं नेट NPA बढ़कर 16.69 फीसदी हो गया है। मार्च 2018 को समाप्‍त तिमाही में बैंक का कुल NPA बढ़कर 55,600 करोड़ रुपए हो गया था।

 
 
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