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2017 में कैपिटल मार्केट में हुए 5 बड़े बदलाव, जिन्होंने बदल दी इन्वेस्टमेंट की दुनिया

स्टॉक मार्केट रेग्युलेटर सेबी ने साल 2017 में छोटे निवेशकों के हित में कई फैसले लिए।

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नई दिल्ली. स्टॉक मार्केट रेग्युलेटर सेबी ने साल 2017 में छोटे निवेशकों के हित में कई फैसले लिए। कई फैसले तो ऐसे थे, जिनसे निवेश के तरीके बदलने का रास्ता साफ हो गया। सेबी ने जहां शेल कंपनियों पर बड़े स्तर पर कार्रवाई की, वहीं कंपनियों के प्रमोटर्स की मनमानी पर रोक लगाने के लिए बड़े फैसले लिए। हम यहां सेबी के साल के 5 बड़े फैसलों के बारे में बता रहे हैं।

 

 

1.यूनिवर्सल स्टॉक एक्सचेंज को मंजूरी

सेबी ने साल के अंत में हुई बोर्ड मीटिंग में यूनिवर्सल स्टॉक एक्सचेंज को मंजूरी दी, जिससे एक ही प्लेटफॉर्म से अब स्टॉक्स और कमोडिटीज की ट्रेडिंग का रास्ता साफ हो गया। इसके लिए अक्टूबर, 2018 की डेडलाइन तय कर दी गई है। इससे शेयर और कमोडिटीज में ट्रेडिंग के लिए अलग-अलग अकाउंट खुलवाने की जरूरत नहीं होगी। अभी इक्विटी की ट्रेडिंग बीएसई और एनएसई पर और कमोडिटी की ट्रेडिंग एमसीएक्स और एनसीडीईएक्स पर हो रही है। अब इन चारों एक्सचेंज पर कमोडिटीज और इक्विटी की ट्रेडिंग की सुविधा एक साथ मिलेगी।

मार्केट और कमोडिटी एक्सपर्ट्स का कहना है कि ट्रेडिंग के नए नियमों से मार्केट, ब्रोकर्स से लेकर निवेशकों सभी को फायदा होगा। वहीं, ट्रेडिग पहले से आसान हो जाएगी। वॉल्यूम बढ़ने से मार्केट की आय पर भी पॉजिटिव असर होगा।

 

 

 

2.पी-नोट्स पर रोक

सेबी ने साल की शुरुआत में फॉरेन पोर्टफोलियो इन्वेस्टर्स यानी एफपीआई पर डेरिवेटिव एसेट पर पार्टिसिपेटरी नोट्स या पी-नोट्स जारी करने पर रोक लगा दी है। इसके बाद दिसंबर के अंत में विदेशी निवेश को आसान बनाने के लिए कुछ नॉर्म्स को लचीला भी किया।

सेबी ने रजिस्ट्रेशन के लिए पात्र देशों के लिहाज से एफपीआई नियमों में बदलाव किया, इससे कनाडा जैसे अन्य देशों के इन्वेस्टर्स को सीधे भारत में निवेश का मौका मिलेगा। इसके साथ ही एफपीआई को रिस्क प्रोफाइल और केवाईसी जरूरतों के हिसाब से तीन कैटेगरी में बांटने का फैसला किया गया, वहीं अन्य रजिस्ट्रेशन प्रोसिजर्स को भी सरल बना दिया गया।

 

 

3.फ्यूचर्स एंड ऑप्शंस में आरआईएल पर रोक

सेबी ने मार्च में सेबी ने मुकेश अंबानी के नियंत्रण वाली कंपनी रिलायंस इंडस्ट्रीज लिमिटेड (आरआईएल) पर फ्यूचर्स और ऑप्शंस सेगमेंट के इक्विटी डेरिवेटिव में भाग लेने पर एक साल की रोक लगा दी। इसे भारत की सबसे बड़ी कंपनी के खिलाफ बड़ी कार्रवाई माना जा रहा था। ये प्रतिबंध एक साल का है, जो इन कंपनियां प्रत्यक्ष या अप्रत्यक्ष रूप से इसमें कारोबार करने से रोकता है।

 

 

4. शेल कंपनियों पर एक्शन

सेबी ने अगस्त में 331 शेल कंपनियों की लिस्ट जारी की है। इसे शेल कंपनियों पर रेग्युलेटर की बड़ी कार्रवाई के तौर पर देखा गया। इसके साथ ही इन कंपनियों के स्टॉक्स में ट्रेडिंग पर रोक लग गई। इसको लेकर सेबी को विरोध का सामना भी करना पड़ा। हालांकि में बाद में कई कंपनियों को क्लीनचिट भी दे दी गई।

 

 

5.MF के लिए10% से ज्यादा क्रॉस होल्डिंग पर रोक

हाल में हुई सेबी बोर्ड की मीटिंग में म्‍युचुअल फंड कंपनियों में 10 फीसदी शेयर होल्डिंग दूसरी कंपनी में रखने यानी क्रॉस होल्डिंग पर रोक लगा दी। सेबी ने कहा है कि इससे भविष्‍य में हितों के टकराव की स्थिति को रोका जा सकेगा। सेबी के इस फैसले का असर यूटीआई एसेट मैनेजमेंट कंपनी (AMC) पर पड़ेगा। UTI को कंपनी में शेयर होल्डिंग में यह बदलावा अगले साल में करने होंगे।

इससे पहले मई में सेबी ने निवेशकों को डिजिटल वॉलेट के जरिए म्युचुअल फंड के में 50,000 रुपए तक के निवेश की छूट दी। इससे न सिर्फ युवा पीढ़ी के लिए म्युचुअल फंड में पैसा लगाना आसान हुआ, बल्कि इसकी खरीद में भी इजाफा हुआ।

 

 

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